सिंगल लाइफ अच्छी है या शादीशुदा?

single or married

सिंगल लाइफ अच्छी है या शादीशुदा?:-

सिंगल लाइफ अच्छी है या शादीशुदा इस बारे में कहना तो सही है, परंतु इस बारे में जवाब देना गलत होगा। क्योंकि कई लोग ऐसे है जो मानते है की शादी न करने से व्यक्ति के जीवन में तनाव, अकेलापन, पूर्ण जीवन न जीना, जल्दी गलत लत का पकड़ना आदि परेशानिया हो जाती है, तो कई लोग सिंगल रहने पर इन सब बातों के होने को गलत ठहरा देते है, आपने ये तो जरूर सुना होगा की शाद्दी का लड्ड़ू जो खाएं, वो पछताएं जो न खाएं वो ललचाहे।

शादी के बाद आपका साथ देने के लिए एक साथी आ जाता है, परंतु ये सोचिये क्या कुंवारे व्यक्ति का साथ कोई नहीं देता, खा जाता है की शादी के बाद इंसान समाज में इज्जत पाता है, तो क्या जिसकी शादी नहीं होती लोग उसे इज्जत नहीं देते, ये भी कहा जाता है की शादी के बाद व्यक्ति तनाव में कम रहता है, तो जो शादी नहीं करते है वो हमेशा तनाव को साथ लेकर घूमते रहते है, नहीं एक बार आप खुद सोचिये की क्या ये बातें सही है, बल्कि सच ये है शादी न करने वाला व्यक्ति समाज से खुल कर जुड़ पाता है।

क्योंकि शादीशुदा व्यक्ति के ऊपर तो बहुत सी जिम्मेवारिया आ जाती है, क्योंकि कुंवारे व्यक्ति की जिम्मेवारी माँ बाप, या भाई बहन तक होती है, जबकि शादी के बाद व्यक्ति की पत्नी उनके बच्चे, पत्नी की रिश्तेदारी आदि ये सब रिश्ते बढ़ जाते है, तो कहि न कहि व्यक्ति केवल अपने परिवार में ही सिमट कर रह जाता है, और साइंस ने इस बात को अपनी स्टडी में प्रूफ कर दिया है, की शादी का का आनंद केवल हनीमून तक ही सीमित रहता है।

और ये बात भी सच है की नए शादीशुदा जोड़े शादी से पहले की तुलना में अधिक खुश होने का दावा करते है, लेकिन जब एक-दूसरे के प्रति अच्छे होने की बात आती है तो ज्यादातर लोग खुशी या गम के उसी स्तर पर पहुंच जाते हैं जहां वे शादी से पहले थे। तो आप खुद ही बताइये की ऐसा कौन सा बदलाव है जो शादी के बाद व्यक्ति में आता है, हाँ आप ये कह सकते है की शादी के बाद आप अकेले नहीं रहती परंतु तनाव तो किसी न किसी बात का रहता ही है, जबकि कुंवारे इस तनाव से मुक्त रहते है।

शादी के बाद आप खुद ही सोचिये की क्या आप अपने आप के लिए समय निकाल पाते है, क्या अपने दोस्तों के साथ एन्जॉय कर पाते है, अकेले समय निकाल पाते है, अपने लिए करते समय क्या आपको बार बार सोचना नहीं पड़ता है, इसीलिए आज के समय में तो एक रिश्ता और लोगो ने बना दिया है, जिसे लीव इन का नाम दिया गया है, इसमें दो लोग पहले एक साथ रहकर देखते है की क्या वो एक साथ रह सकते है, यदिह तो वो अपने रिश्ते को आगे बढ़ाते है, और यदि नहीं तो वो उसे वही ख़त्म कर देते है।

हर व्यक्ति की इस विषय में अपनी एक अलग सोच और एक नया विचार होता है, कुछ शादी को सही मानते है, तो कुछ कुंवारेपन को सही मानते है। जो लोग सिंगल रहते है कई लोग उनके बारें में ये भी धारणा रखते है की वो हर जगह लड़की को ढूंढते है, या शादीशुदा महिला भी उनका शिकार बनती है, यकीं मानिये ये बात बिलकुल गलत है, आज के समय में लोग अपनी मर्ज़ी से अकेले रहने का चुनाव करते है, और आज के समय में ऐसे लोगो की संख्या में वृद्धि हो रही है।

सिंगल रहने वाले सोचते है की यदि उनकी शादी हो जाएगी तो वो सिमित हो जायेंगे, परंतु कई लोगो को इस तरह से सिमित रहना भी अच्छा लगता है, सिंगल लोगो को यह लगता है की कही उनकी शादी हो गयी तो उनकी आज़ादी पर रोक लग जाएगी, परंतु कई लोग प्यार की तलाश में और अपनेपन के लिए शादी करना चाहते है, इस दुनिया में हर व्यक्ति की सोच और धारणा हर बात को लेकर अलग ही होती है, ऐसा ही शादी के मामले में भी होता है, आइये जाते है की वो कौन सी बातें है जो कई लोग चाहते है और कई इससे बच्चन कर रहना चाहते है।

लोगो की अलग अलग धारणाएं:-

  • कई लोग शादी को रोक टोक समझ कर शादी नही करना चाहते है, तो कई लोग अपनेपन और एक अच्छे दोस्त को पत्नी में पाकर शादी करना चाहते है।
  • कई लोग जिम्मेवारी को लेकर असहज महसूस करते है, तो कई लोग अपने परिवार को आगे बढ़ाने के लिए शादी करना चाहते है।
  • कई लोगो को लगता है की शादी के बाद उनकी जिंदगी सिमित हो जाएगी, तो कुछ लोग शादी के बाद अपनों से मिलने वाले प्यार को बढ़ावा देना चाहते है।
  • कई लोग सोचते है की शादी करने से यदि वो गलत आदतों के शिकार है, तो उन्हें इन सबसे त्याग करना पड़ेगा, परंतु कई लोग इन सब से त्याग कर अपनी जिंदगी के असली लुत्फ़ को उठाना चाहते है।
  • कई लोग शादी को परेशानी समझते है, तो कई लोग इसे अपनी जिंदगी का नया पन्ना समझ कर इसकी शुरुआत करते है।
  • कई लोग दुनिया वालो के ताने सुन कर भी शादी करते है, तो कुछ लोग इन बातों को अनसुना करके लीव इन को बढ़ावा देते है।
  • और साइंस के हिसाब से शादीशुदा लोग समाजिक तौर पर कम जुड़े होते है, जबकि कुंवारे लोग समाजिक तौर पर ज्यादा उभर कर सामने आते है।
  • कई लोगो का मानना है की शादी के बाद सिर्फ लड़ाई झगडे होते है, इसीलिए भी वो शादी को छोड़ कुँवारा रहना ज्यादा पसंद करते है।

हर एक व्यक्ति की धारणा शादी के बारें में और कुंवारेपन के मामले में अलग होती है, शादी करने का निर्णय इस बात पर आधारित होना चाहिए की क्या व्यक्ति अपनी जिम्मेवारी को निभा सकता है, या व्यक्ति के कौशल पर निर्भर होनी चाहिए, ये सोच कर कभी भी व्यक्ति को शादी का निर्णय नहीं लेना चाहिए की अकेले है तो चलो शादी कर लेनी चाहिए, ये सोच और ये धारणा कभी भी किसी रिश्ते को पनपने नहीं देती है, परंतु यदि आप शादी के इस रिस्ते को निभा सकते है तो आपको इस निर्णय को लेना चाहिए।

शादी के बारे में कहा जाएँ तो यदि आपका साथी अच्छा हो, और आपका दोस्त बन कर हमेशा आपके अच्छे और बुरे में आपका साथ देता हो, तो वो शादी का रिश्ता कभी कामयाब नहीं होता है, और यदि आप सोचते है की शादी का रिश्ता केवल नाम के लिए है और आप दोनों एक दूसरे से प्यार न रख कर अपने अपने बारे में सोचते है तो ऐसे रिस्ते से अच्छा है की आप सिंगल रहे, क्योंकि पति पत्नी का रिश्ता तो प्यार से भरा और विश्वास की नींव पर टिक हुआ होना चाहिए, जिससे उस रिश्ते की उम्र और भी लंबी होती जाएँ।

तो ये कुछ बातें है जो आपको सिंगल या मैरिड यानि शादीशुदा रहने के बारे में बता सकती है, बीएस आपको किसी भी रिस्ते में जाने से पहले ये नहीं सोचना चाहिए की वो बुरा होगा, आपको केवल अपने व्यतित्व और कौशल को देखना चाहिए की क्या आप उस रिश्ते को निभाने के लिए सक्षम है, यदि हाँ तो आपको रिश्ता बनाना चाहिए नहीं तो नहीं बनाना चाहिए, शादी का रिश्ता बहुत ही अहम और प्यार भरा होता है, यदि आप किसी से प्यार नहीं कर सकते और दूसरे व्यक्ति के साथ नहीं रह सकते तो आपको इस बारे में पूरा सोच कर ही ईस बात के बारे में विचार करना चाहिए की आप सिंगल अच्छे है या शादीशुदा जीवन अच्छा है।

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