क्या सच में भूत होता है?

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यह एक ऐसा विषय या कहें विचार है जिस पर लोगों कि भिन्न-भिन्न मत है. क्या सच में भूत होता है इस विषय को समझने से पहले हमें कुछ मौलिक बातें समझनी पड़ेगी. हमें जिंदगी कि दो अहम् पहलु पर प्रकाश डालना पड़ेगा. पहला है सत्य और दूसरा है विश्वास! सत्यता और विश्वास में अंतर होता है. कोई चीज का सत्य होना एक बात है और विश्वास होना अलग बात.

सबसे पहले हम किसी विचार या घटना के सत्य होने पर प्रकाश डालेंगे. क्या कोई घटना या विचार सत्य है ये बात हम कैसे जानेंगे? अगर कोई व्यक्ति अपनी कोई बात रख रहा है हमें कैसे पता चलेगा कि वो सत्य कह रहा है. ऐसे में हमारे पास दो रास्ते हैं. पहला उसकी बात को बिना तर्क के सच मान लें क्योँकि उसपर हमें विश्वास है. वो गलत कह ही नहीं सकता है! वो व्यक्ति हमेशा सच बोलने के लिए जाना जाता है इसलिए उसकी बात को हम सच मान लेंगे. दूसरी उसकी बात को सच कि कसौटी पे परखेंगे. सच के कसौटी पर परखने के लिए हमें कुछ तथ्य जुटाने पड़ेंगे. विज्ञान का सहारा लेना पड़ेगा. उदाहरण के तौर पर अगर कोई कहता है कि दूध में निम्बू डालने से दूध के क्रीम और पानी अलग-अलग हो जाते हैं. इसके लिए हमें सबसे पहले दूध और नीबू को आपस में मिलाना पड़ेगा और देखना पड़ेगा कि जो वो व्यक्ति कह रहा है सच है या नहीं. अगर दूध और पानी अलग-अलग हो जाता है तो हम कहेंगे कि वो व्यक्ति सही कह रहा है. और अगर हम बिना कोई प्रयोग किये ही ये मान लेते हैं कि दूध में निम्बू डालने से दूध के क्रीम और पानी अलग हो जाता है जबकि हमने ऐसा होते हुए अपनी जिंदगी में कभी देखा नहीं बस मान लिया. क्यूंकि हमारे पुरखे ऐसा ही कहते आये हैं तो इसलिए वो सत्य है . हम ये भूल जाते हैं कि हमारे पुरखे जो कहें कोई जरुरी नहीं कि वो सत्य ही हो. आदि अनादि काल से हमारे पुरखे ये मानते आये थे कि पृथ्वी गोल नहीं चपटी है परन्तु होता क्या है. क्या हम ये मानेंगे कि पृथ्वी कभी चपटी रही होगी क्योंकि हमारे पुरखे मानते आये थे. नहीं ना ? बिलकुल नहीं मानेंगे! क्योंकि ये अब प्रमाणित हो चूका है लोगों ने अंतरिक्ष से देख भी लिया है कि पृथ्वी चपटी नहीं गोल है. ये विश्वास भी है और सत्य भी है. परन्तु ये विश्वास प्रयोग कि कसौटी पर खरा उतरा है और सत्य बन चूका है.

मोटी तौर पर हम ये कह सकते हैं कि विश्वास को सत्य से एक पतली सी लकीर अलग करती है और वो है प्रयोग जिसे हम discovery , invention या experiment कुछ भी नाम दे सकते हैं. भूत होता है या नहीं इस सवाल को भी इसी तराजू पर चढ़ा के देखना होगा. सबसे पहले ये देखना होगा कि “भूत” नामक प्राणी के बारे में लोगों का विश्वास . लोगों के मानना है कि जब कोई इंसान मरता है तो वो भूत बन जाता है उसकी आत्मा भटकती रहती है. लोगों में प्रवेश कर जाती है और उसे परेशान करती है कभी-कभी तो उसकी जान भी ले लेती है. ये वो आत्मा होती है जब कोई व्यक्ति अकाल मृत्य मरे या फिर उसकी इच्छा अधूरी रह जाय. इस तरह के ना जाने कितनी सारी बातें कही और सुनी जाती है. बहुत सारे लोगों ने भूत को अपनी आखों से देखने की बातें भी कहते है. भूत से बातें भी करने की बात सामने आ चुकी है.
अब चलें इस विश्वास को प्रयोग के कसौटी पर तौलने का प्रयास करते हैं. क्या कोई प्रयोग विधि है जिस पर हम भूत होने या ना होने को प्रमाणित कर सकें. इस क्षेत्र में साइंस भी कन्फ्यूज्ड है. एक तरफ तो वैज्ञानिक रूप से ये सवाल अभी तक खुद ही सवालिया घेरे में है की वास्तव में भूत है या नहीं. और दूसरी तरफ कुछ लोग इसे वैज्ञानिक ढंग से सुलझाने का प्रयास कर रहे है. भूत का पता लगाने के लिए पैरानॉर्मल साइंस विद्यमान है जो भूत को खोजते रहता है. यहाँ तक की कुछ विख्यात यूनिवर्सिटी में भी पैरानॉर्मल विभाग बनाये गए है. कैंब्रिज यूनिवर्सिटी, ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे विश्व के कई यूनिवर्सिटी में इस विषय पर अध्ययन अध्ययापन होता है. कुछ लोग टीम बनाके भी भूत पकड़ने का काम कर रहे हैं. दुनिया भर में इस तरह के कई आर्गेनाईजेशन आपको मिल जायेंगे जो भूत पकड़ने का काम करते हैं. कुछ लोग इसे कोरी कल्पना मानते हैं. अब सवाल उठता है कि अगर भूत नहीं है तो लोग किसको पकड़ रहे हैं? क्या पैरानॉर्मल वाले लोग हमारे विश्वास के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.
प्रायोगिक रूप से साइंस अभी तक ये प्रमाणित नहीं कर पाया है कि भूत जैसी कोई चीज बिद्यमान है इस धरती पर. लेकिन साइंस के पास अभी Ghost Capture Device मौजूद है जो किसी भी ऐसी हरकत को पकड़ लेता है जहाँ पर कुछ भी न होने कि संभावना होती है. ये डिवाइस नेगेटिव एनर्जी को पकड़ लेता है. और बहुत बार पकड़ा भी गया है. पैरानॉर्मल वाले लोग इसे भूत कहते हैं. अब ये आपके विवेक पर छोड़ दिया गया है की आप क्या मानते हैं.

भूत होता हैं या नहीं. ये विज्ञानं और अफवाह से अलग विषय बना के अगर सोचें तो हमें कुछ जानकारी मिल सकती है और हम कुछ निर्णय पर पहुंच सकते हैं. तो चलें इसे आध्यात्मिक ढंग से परखें. अध्यात्म क्या कहता है आत्मा के बारे में; इसे हमें अच्छी तरीके से समझाना पड़ेगा.
अध्यात्म कहता है आत्मा न जन्म लेती है न मरती है. अध्यात्म पुनर्जन्म में विश्वास करती है. इसका मानना है कि जब इंसान मरता है तो उसकी आत्मा एक शरीर से दूसरे शरीर में प्रवेश कर जाती है. लेकिन कब प्रवेश करती है इसमें भी नियम शर्ते लागु है. आत्मा तब प्रवेश करती है जब उसके अनुरूप माहौल हो. जब इंसान कहीं सुनसान जगह गया हो और वहां का वातावरण में नेगेटिव एनर्जी फ्लो कर रही हो और वह इंसान डर जाय. जब हम डरते हैं तो हमारा शरीर सिकुड़ जाती है और बुरी एनर्जी जो फ्लो कर रही है वो उस खाली जगह को भर देती. और हमारा शरीर अजीव व्यवहार करने लगता है. वही भूत बन जाती है. विज्ञान तो आत्मा के बारे में कुछ भी नहीं कहती है पर अध्यात्म कि नीव इसी पर कड़ी है. अगर आप अध्यात्म में विश्वास करते हैं जो बिना किसी वैज्ञानिक प्रयोग पर चलती है. उसका सबकुछ ही ध्यान(मैडिटेशन) पर टिका है जो प्रयोग नहीं महाप्रयोग है. तो हम कह सकते हैं कि एक नेगेटिव एनर्जी है जिसे आप भूत कहो या फिर शैतान मौजूद है. और हाँ हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि पोजेटिव एनर्जी भी मौजूद है जिसे हम भगवान कहते हैं. जब विलेन है तो हीरो मौजूद तो होगा ही.