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पुखराज पहननें से क्या लाभ होता है? और इसे कैसे धारण करना चाहिए

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जैसा की आपलोग सब जानते है की रत्नों का बहूत प्रभाव होता है, इसलिए आप चाहे नेता हो, अभिनेता हो, या कोई सामान्य लोग सब को आपने देखा होगा रत्न धारण किये हुए। लग्न की राशी कमजोर होने पर लोग रत्न धारण करते है, ताकि उस ग्रह का प्रभाव कम हो, और रत्न के माध्यम से जिंदगी में खुशहाली और तरक्की आये, इसलिए लोग रत्न धारण करते है, पर इस बात का बहूत ज्यादा ध्यान रखनी चाहिए की रत्न सही हो, और सही जगह से लिया जाये।

आज हम आपको पुखराज रत्न के बाते में बताने जा रहे है।

पुखराज क्या होता है?

पुखराज एक बहुमूल्य रत्न होता है। बृहस्पति ग्रह से संबंधित रत्न, पुखराज को संस्कृत में पुष्पराग, हिन्दी में पुखराज कहा जाता है।  पुखराज रत्न की रंगत पलाश के फूलों जैसी होती है। पुखराज एक बहुमूल्य रत्नों में से एक है। यह गुरु ग्रह के प्रभाव को बढ़ाने वाला होता है। यह एल्युमिनियम और फ्लोरीन सहित सिलिकेट खनिज होता है जिसका रासायनिक सूत्र है Al2SiO4(F,OH)2.

विभिन्न क्षेत्रों में पुखराज को अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे :-

  • अँग्रेजी मे – टोपाज अथवा यलो सैफायर
  • इजीप्शियन मे – टार्शिश
  • फारसी मे – जर्द याकूत
  • बर्मी मे – आउटफ़िया
  • लैटिन मे – तोपजियों
  • चीनी मे – सी लेंग स्याक
  • पंजाबी मे – फोकज
  • गुजराती मे – पीलूराज
  • देवनागरी मे – पीत स्फेटिक माठी
  • अरबी मे – याकूत अल अजरक
  • सीलोनी मे – रत्नी पुष्परगय

असली पुखराज की पहचान

असली पुखराज को निम्नलिखित तरीके से जाँच सकते है, या तो आप अपने शहर के किसी रत्न लैब में भी चेक करवा सकते है. पर यहाँ हम कुछ ऐसे तरीके बता रहे है जिससे अपने आप जाँच सकते है जैसे :-

  • पुखराज को  चौबीस घंटे तक दूध मे पड़ा रहने पर भी उसकी चमक मे कोई अंतर नही आए तो उसे असली जाने ।
  • जहरीले कीड़े ने जिस जगह पर काटा हो वहाँ पुखराज घिसकर लगाने से यदि जहर तुरंत उतार जाये तो पुखराज असली जाने ।
  • असली पुखराज पारदर्शी व स्निग्ध होने के साथ हाथ मे लेने पर वजनदार प्रतीत होता है ।
  • गोबर से रगड़ने पर असली पुखराज की चमक मे वृद्धि हो जाती है ।
  • धूप मे सफ़ेद कपड़े पर रख देने से असली पुखराज मे से पीली आभा (किरणे) फूट पड़ती है ।
  • आग मे तपाने पर असली पुखराज तड़कता नहीं है साथ ही उसका रंग बदलकर एकदम सफ़ेद हो जाता है ।
  • असली पुखराज मे कोई न कोई रेशा अवश्य होता है चाहे वह छोटा-सा ही क्यों न हो।

पुखराज

पुखराज धारण करने से क्या फायदा होता है?

यह गुरु ग्रह के प्रभाव को बढ़ाने वाला होता है। यह रत्न धनु राशि एवं मीन राशि वालों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके पहनने से ज्ञान में वृद्धि होती है।

गुरु, जिनका जन्म के समय पत्रिका में कमजोर है या अशुभ प्रभाव दे रहा है ऐसे जातक को इसके पहनने से शुभत्व की प्राप्ति होती है। इसे राजनीतिज्ञ, न्यायाधीश, प्रशासनिक सेवाओं से जुडे़ व्यक्ति, आईपीएस जैसे व्यक्ति पहन कर लाभान्वि‍त होते हैं। यह रत्न सोचने-समझने की शक्ति को बढ़ाता है। इसके पहनने से बुरे विचार दूर होते हैं। अन्याय के प्रति लड़ने की ताकत बढ़ती है। इसे कई कलाकार, टीवी सीरियलों के अभिनेता-अभिनेत्रियों को पहने देखा जा सकता है।

पुखराज किसे और कौन सी राशी वालों को धारण करना चाहिए?

अगर  जन्मकुंडली मे वृहस्पति की शुभ भाव मे स्थिति होने पर प्रभाव मे वृद्धि हेतु और अशुभ स्थिति अथवा नीच राशिगत होने पर दोष निवारण हेतु पीला पुखराज धारण करना चाहिए । वृहस्पति की महादशा तथा अंतर्दशा मे भी इसे धारण अवश्य करना चाहिए ।
धनु, कर्क, मेष, वृश्चिक तथा मीन लग्न अथवा राशि वाले जातक भी इसे धारण करके लाभ उठा सकते हैं । यदि जन्मदिन गुरुवार ठठा पुष्य नक्षत्र हो अथवा जन्म नक्षत्र पुनर्वसु , विशाखा या पूर्वभाद्रपद हो तभी पुखराज धारण करने से लाभ होता है । जिनकी कुंडली मे वृहस्पति केन्द्र अथवा त्रिकोणस्थ अथवा इन रत्नों का स्वामी हो अथवा जन्मकुंडली मे गुरु लग्नेश या प्रधान गृह हो तो उन जातकों को निर्दोष व पीला पुखराज धारण करके अवश्य लाभ उठाना चाहिए ।

पुखराज धारण करने की विधि

आप पुखराज को सोने की अंगूठी मे जड़वाकर तथा शुक्लपक्ष मे गुरुवार को वृहस्पति की पूजा के पश्चात दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली मे धारण करना चाहिए । अंगूठी मे पुखराज इस प्रकार इस प्रकार से जड़वाएँ की रत्न का निचला सिरा खुला रहे तथा अंगुली की त्वचा से स्पर्श करता रहे ।
अंगूठी बनवाने के लिए कम से कम चार कैरट अथवा चार रत्ती के वजन अथवा उससे अधिक वजन का पारदर्शी , स्निग्ध तथा निर्दोष पुखराज लेना चाहिए ।
गुरुवार के दिन अथवा गुरुपुष्य  नक्षत्र मे प्रायः सूर्योदय से ग्यारह बजे के मध्य पुखराज की अंगूठी बनवाणी चाहिए ।

विधि :- एक कटोरी में आप गंगा जल, शहद, चीनी, कच्चा दूध, धी, आदि को डाल लें और उसमे अंगूठी को रख दें, तत्पश्चात अंगूठी को सर्वप्रथम गंगाजल से, फिर कच्चे दूध से तथा पुनः गंगाजल से धोकर वृहस्पति के मंत्र (ॐ बृं बृहस्पतये नमः ) या (ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः ) का १०८  जाप करते हुए धारण करनी चाहिए । अंगूठी धारण करने के पश्चात ब्राह्मण को यथायोग्य दक्षिणा (पीला वस्त्र, चने की दाल, हल्दी, शक्कर, पीला पुष्प तथा गुरु यंत्र इत्यादि) का दान अवश्य देना चाहिए ।

पुखराज को कितने समय तक धारण करनी चाहिए ?

कोई भी रत्न ३ साल तक काम करता है, इसलिए आप पुखराज को तीन साल तक ही इस्तेमाल करें, फिर आप दूसरा बनवा लें, और फिर से वही नियम कर के धारण करें,

पुखराज की कीमत?

पुखराज रत्न की कीमत आपके बजट के हिसाब से मिल सकता है, आप एक हजार रूपये से लेके ५०,००० तक के पुखराज या इससे अधिक रूपये में ले सके है, ये क्वालिटी पर निर्भर करता है, आप किसी रत्न विक्रेता से आप जान सकते है, इसकी क्वालिटी और रत्ती के हिसाब से कीमत होता है.

अगर आपको और भी जानकारी चाहिए तो निचे कमेंट करें, पूरी जानकारी दी जाएगी.

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