Ultimate magazine theme for WordPress.

बेबी को फ्रूट जूस कब से पिलायें कैसे और कितना पिलायें

बच्चों के पालन पोषण के लिए माँ वो सभी चीजें करती है जो शिशु के  लिए उचित हो। कब क्या खिलाना है कब क्या पिलाना है वो अच्छे से इन ध्यान रखती हैं।  आप सभी को पता है माँ का दूध सर्वोत्तम होता है शिशु के लिए पर बढ़ते उम्र के साथ और भी चीजें खाने पिने को दी जाती है। बात जब जूस की आती है तो वो सोचती है कब से जूस पिलाना सही होता है. कब कितनी मात्रा में और किस चीज का जूस पिलाने चाहिए ताकि शिशु का विकास सही तरीके से हो सके।

डॉक्टर की सलाह अनुसार बेबी को जूस पिलाना  कम से कम 2 साल तक उचित नहीं होता है। क्यूंकि डॉक्टर के निर्देशानुसार बच्चों में मोटापा दिखाई देने लगता है। पर अगर शिशु कमजोर है तो आप अपने तरीके से जूस पिला सकती हैं।

जूस की जगह फल है ज्यादा लगभदायक

सब्जियों और फल में अधिक मात्रा में फाइबर, विटामिन, प्रोटीन, कार्बोहाड्रेड, और सभी तरह के पोषक तत्वों होते  है जोकि जूस पीने  से ज्यादा, खाने में ही फायदा करता है।  इसलिए शिशु को पर्याप्त मात्रा में  ही खिलाएं।

जूस में फाइबर की मात्रा पूरी तरह से नहीं आ पाती। इसलिए डॉक्टर्स भी जूस पिलाने की सलाह नहीं देते। क्यूंकि एक बार का जूस पीना यानी की एक बार जो फल खाने से फायदा मिलता है वो कम होना और शरीर में फाइबर की मात्रा का कम होना है।

लेकिन इसका यह अर्थ बिलकुल भी नहीं है की आप अपने शिशु को हमेशा ही फल का सेवन करवाती रहें। यह भी शिशु के लिए फायदेमंद नहीं। जैसे की अगर शिशु मीठे फल खायेगा तो कैलोरी की मात्रा शिशु के शरीर में बढ़ जाएगी और शिशु का वजन बढ़ जायेगा। जोकि अभी शिशु की इस उम्र के लिए ठीक नहीं है।

शिशु को जूस पिलाने के फायदे जानते है?

1 यदि आपका शिशु कमजोर है तो आप अपने शिशु को जूस दें सकतें है। किन्तु कब से देना है और कितनी मात्रा में देना है। यह आपको अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लेना चाहिए।

2 जूस पिलाने से  शिशु के शरीर में एनर्जी बनी रहती है।

3 जूस पिलाने से शिशु  के शरीर में  मिनरल्स और विटामिन की कमी नहीं होती।

4 जूस शिशु के शरीर में तरल पर्दार्थ की कमी नहीं होती।

जूस अधिक मात्रा में नहीं पिलाने चाहिए जानिए की क्यों

1 जूस पीन से  शिशु के आने वाले ने दांत या नए (जो वह निकलने वाले  है) ,उसमे सड़न पैदा कर सकता है।

2  अधिक मात्रा में जूस पीने से दस्त या डायरिया जैसी बीमारी हो सकती है।

3 जूस पीने की आदत से भी शिशु को नुक्सान हो सकता है क्यूंकि ऐसा करने से वह स्तनपान,फार्मूला दूध,और ठोस आहार का सेवन करने में आना-कानी कर सकता है, जो की ठीक नहीं है।

4 जूस मीठा होता है इसके चलते हो सकता है की शिशु को मीठा पेय पीने की आदत हो जाये और वह सादा पानी भी न पीये।  ऐसी स्तिथि में यह सही नहीं है शिशु के स्वस्थ के लिए।

कब दें सकते हैं  शिशु को जूस जानते है 

जब कभी शिशु को कब्ज की समस्या हो जाये तो आप उससे जूस पिला सकक्ते हैं इससे कब्ज की समस्या दूर हो जाएगी।

जूस की मात्रा

जूस की मात्रा भी केवल 1  से 2  चम्मच तक ही दी जा सकती है।

कौन कौन सा जूस सही है पिलाना

अनार का जूस, सेब का जूस और नाशपाती का जूस पिलाना फायदेमंद होता है।

जबसे आप शिशु को ठोस आहार खिलाना शुरू करें उनके साथ स्तनपान, फॉर्मूला दूध और पेय  के तौर पर पानी अवश्य दें।

यदि आप अपने शिशु को शाकाहारी आहार दें  रही है तो अपने शिशु को विटामिन सी की मात्रा को भी अवशय दें।  इससे आपका शिशु का शरीर में विटामिन सी की कमी भी नहीं होगी और उसके शरीर में आयरन की मात्रा भी पर्याप्त होगी। इसके लिए आप सब्जी या दाल में 1 2  बूंदे  निम्बू की डाल  कर शिशु को दें सकती है। और संतरे के जूस पिला सकते हैं।

बेहतर है आप जब भी कोई नई खान पान शिशु के देने जा रही है तो आप डॉक्टर से संपर्क कर ही शुरू करें। ये आपके लिए और आपके शिशु के फायदेमंद रहेगा।