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15 साल में पास की IIT की परीक्षा, कॉलेज पहुंचा तो प्रोफेसर रह गए दंग

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आज हम आपको 15 साल के अभय का चर्चा करेंगे, क्यों की बड़े बड़े परीक्षाओ में सिर्फ जो टॉप करते है उसी का नाम आता है पर कुछ ऐसे भी होते है जो असाधारण प्रतिभा के धनी होते है, आज हम आप एक ऐसे ही स्टूडेंट के बारे में चर्चा कर रहे है, जब वो IIT में एडमिशन लेने गया तो वह के स्टाफ चौंक गए, हुआ यु की, एक छोटा सा बच्चा अपने डॉक्युमेंट अटेस्ट कराने पहुंच गया। दिखने में 9वीं या दसवीं का बच्चा जब देश के सबसे प्रतिष्ठित संसथान IIT में नामांकन कराने पहुंच जाए तो हैरत होना लाजिमी है। आमतौर पर बड़े एग्जाम्स में सिर्फ टॉपर्स की ही चर्चा होती है, लेकिन सफल लिस्ट में कई लोग ऐसे भी होते हैं जो कम रैंक लाकर भी हमें इंस्पायर कर जाते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी 15 साल के अभय अग्रवाल की है, जिन्होंने इतनी कम उम्र में ही IIT में दाखिला ले लिया है। इस उम्र में अधिकतर बच्चे 10वीं में होते हैं और अधिकतर तो IIT की तैयारी भी नहीं शुरू करते।

फिरोजाबाद के रहने वाले अभय अग्रवाल IIT में प्रवेश पाने वाले सबसे कम उम्र के स्टूडेंट हो सकते हैं। अभय ने इसी साल JEE-एडवांस्ड की परीक्षा पास की है। उसे ऑल इंडिया लेवल पर 2467वीं रैंक हासिल हुई है। अभय के सर्टिफिकेट के मुताबिक उसका जन्म 9 नवंबर, 2001 को हुआ था। इस लिहाज से देखें तो वह सिर्फ 15 साल का ही है। अभय शुरू से ही काफी प्रतिभावान था इसलिए उसने शुरू की कुछ कक्षाएं जंप कर दीं। यही वजह है कि वह बाकी छात्रों के मुकाबले काफी पहले ही 12वीं में पहुंच गया और अपनी प्रतिभा को साबित करते हुए IIT की परीक्षा भी पास कर ली।

अभय एक साधारण सा परिवार का बच्चा है। अभय का पिता मुकेश अग्रवाल फिरोजाबाद नगर निगम में एक पंप अटेंडेंट के तौर पर काम करते हैं। हालांकि अभय IIT-BHU की जगह IIT रुड़की से इंजिनियरिंग करना चाहते हैं। इसलिए वह सेकंड काउंसिलिंग का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि दूसरी काउंसिलिंग में उनके रुड़की जाने की ख्वाहिश पूरी हो जाएगी। रोबोटिक्स में खासी दिलचस्पी होने की वजह से अभय मैकेनिकल इंजीनियरिंग ब्रांच में पढ़ाई करना चाहते हैं। अभय ने 9वीं कक्षा से ही इंजिनियरिंग करने के बारे में सोचना शुरू कर दिया था। IIT की तैयारी के लिए अभय ने 12वीं के साथ ही कोचिंग भी ली थी।

अभय का बड़ा भाई देवांशु अग्रवाल भी एक प्राइवेट कॉलेज से बीटेक कर रहा है। उसने अपने छोटे भाई को अच्छे से गाइड किया। जिसकी बदौलत अभय IIT जैसी परीक्षा पास कर सका। अभय के परिवार वाले बताते हैं कि वह ज्यादा से ज्यादा समय किताबों के बीच ही बिताता था। आमतौर पर वह 7 से 8 घंटे की पढ़ाई करता था। अभय बताते हैं कि 9वीं कक्षा में उसने फेसबुक अकाउंट बनाया था लेकिन पढ़ाई में व्यवधान न पैदा हो इसलिए 11वीं में ही उसने फेसबुक को अलविदा कह दिया था। अभय की सफलता से पूरे फिरोजाबाद के लोग खुश हैं।