Ananthapura Lake Temple Kerala, अनंतपुरा झील मंदिर केरल

अनंतपुरा झील मंदिर एक हिन्दू मंदिर है जिसका निर्माण एक झील के मध्य में किया गया है। ये मंदिर कुंबाला से लगभग 6km की दुरी पर दक्षिण भारत के केरल राज्य के कासरगोड़ जिले के छोटे से गांव अनंतपुरा की एक झील के मध्य में स्थित है। ये केरल का एकमात्र ऐसा मंदिर है जो झील में स्थित है। इस मंदिर को पद्मनाभस्वामी मंदिर तिरुवनंतपुरम का मूलस्थान (मूल स्थल) माना जाता है। किवदंतियों के मुताबिक ये वही मूल स्थान है जहां अनंतपद्मनाभा की स्थापना हुई थी।

जिस झील के भीतर गर्भगृह का निर्माण किया गया है उसका क्षेत्रफल 2 acres (302 feet square) में फैला हुआ है। इस मंदिर में आने वाले भक्त यहाँ के एक आकर्षक स्थान पर जाना नहीं भूलते जो एक गुफा है ये गुफा झील के दाई कोने में स्थित है। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, देवता अनंत पद्मनाभा ने तिरुवनंतपुरम जाने के लिए इस गुफा का प्रयोग किया था। जिसके कारण इन दोनों स्थानों को एक समान नाम दिया गया, जबकि दोनों मंदिर क्षेत्र के छोर पर स्थित है।

संक्षिप्त इतिहास :

केवल कुछ मिथको को छोड़कर इस मंदिर के सभी इतिहास अस्पष्ट है। ये वही स्थान है जहां महान तुलु ब्राह्मण ऋषि, दिवाकर मुनि विलवमंगलम तपस्या और पूजा किया करते थे। पौराणिक कथाओ के मुताबिक एक दिन भगवान् नारायण उनके समक्ष बालक के रूप में प्रस्तुत हुए। उस बालक के मुख पर एक अलौकिक तेज़ था जिसे देखकर ऋषि व्याकुल हो उठे। वे उस बालक में बारे में जानने के लिए बहुत उत्सुक हो उठे और उससे कहा की तुम कौन हो। बालक ने कहा की उसके माता, पिता नहीं है और नहीं उसके पास रहने के लिए घर है। विलवमंगलम को उस पर दया आ गयी और उसे वही रुकने की इजाज़त दे दी। लेकिन उस बालक ने एक शर्त रखी की जब भी वह अपमानित महसूस करेगा इस स्थान से हमेशा के लिए चला जायेगा। कुछ दिनों तक उस बालक ने ऋषि की सेवा की। परन्तु जल्द ही उसके बालपन वाले मज़ाक ऋषि के लिए असहनीय हो गए जिसकी उन्होंने हिंसक प्रतिक्रिया व्यक्त की। अपमानित होकर लड़का वह से चला गया परन्तु जाते जाते एक घोषणा करके गया की यदि विलवमंगलम उसे दोबारा देखना चाहते है तो उन्हें अनंथनकत (नाग देवता अनंत के जंगल) जाना होगा।

विलवमंगलम को जल्द ही आभास हो गया की वो बलकि और कोई नहीं अपितु स्वयं भगवान् थे जिसके बाद उसे अपने किये पर बहुत पश्चातावा हुआ। जिस स्थान पर वह बालक अदृश्य हुआ था वहां उन्होंने एक गुफा की खोज की और उस बालक को ढूंढने हुए उस गुफा के भीतर चले गए। उसके पश्चात वे एक समुद्र तक जा पहुंचे और दक्षिण की ओर बढ़ने लगे। अंत में वे समुद्र के निकट एक पेड़ों से ढके क्षेत्र में जा पहुंचे। विलवमंगलम ने देखा की जो बालक अदृश्य हो गया था वो इल्लिप्पा वृक्ष (महुआ वृक्ष) में विलीन हो रखा था। इसके तुरंत बाद वो पेड़ नीचे गिर गया और भगवान् विष्णु का आकार धारण कर लिए जो हज़ारो सर वाले सर्प पर लेटे हुए थे।

बाबिया – एक अभिभावक मगरमच्छ :

इस मंदिर से एक अन्य कथा भी जुडी हुई है जो अभिभावक मगरमच्छ की कथा है। बहुत प्राचीन काल से इस स्थान पर एक मगरमच्छ देखा जाता है। हालाँकि भक्तो के तालाब में स्नान करने के दौरान वो उन्हें किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचता है। इस मगरमच्छ को दुनिया बाबिया के नाम से जानती है। ये इस मंदिर का स्थानीय अभिभावक और दूत है। बाबिया सिर्फ भक्तो द्वारा चढ़ाये गए प्रसाद को ही ग्रहण करता है। आमतौर पर चावल और गुड से बन दलिया। पूजा करने के पश्चात दोपहर में यहाँ आने वाले भक्त बाबिया को खाना खिलाते है। मंदिर के अधिकारियों का दावा है की बाबिया एक शाकाहारी मगरमच्छ है और वो कभी भी किसी भी मनुष्य को हनी नहीं पहुंचता है यहाँ तक की झील की मछलियों को भी नहीं।

यहाँ एक दिलचस्प स्थानीय कथा है जो इस अभिभावक मगरमच्छ के पीछे की कहानी का वर्णन करती है। एक बार श्री विलवमंगलथु स्वामी (भगवान विष्णु के भक्त) अपने प्रिय भगवान् के लिए तपस्या कर रहे थे। जिस दौरान वो प्रार्थना कर रहे थे, भगवान् कृष्ण एक छोटे बालक के रूप में उनके सामने प्रस्तुत हुए और उन्हें परेशान करना प्रारंभ कर दिया। उस बालक के व्यवहार से दुखी और परेशान होकर उन्होंने अपने बाएं हाथ से उस बालक को धक्का दे दिया। वो बालक तुरंत ही पास की गुफा में अदृश्य हो गया जिसके बाद संत को सत्य का आभास हो गया। कहा जाता है जिस दरार में श्री कृष्ण अदृश्य हुए थे वह आज भी मौजूद है। वह मगरमच्छ यहाँ के प्रवेश और मंदिर की निगरानी करता है।

सं 1945 में, जब ब्रिटिश सैनिकों को यहाँ तैनात किया गया था, उनमे से एक ने उस मगरमच्छ की गोली मार कर हत्या कर दी थी। उस मगरमच्छ की मृत्यु के कुछ दिनों पश्चात ही उस सैनिक की एक सर्प के काटने से मृत्यु हो गयी। लोगो का मानना है की ये सर्प देव अनंता का प्रतिशोध था। उसके पश्चात एक अन्य मगरमच्छ इस झील में नज़र आने लगा, कहा जाता है जो इसे एक बार देख लेता है वो बहुत भागयशाली होता है। किवदंतियों का कहना है की इस झील में हर समय एक मगरमच्छ रहेगा। जब एक मगरमच्छ की मृत्यु हो जाएगी, दूसरा अपने आप इस झील में प्रस्तुत हो जायेगा। मंदिर में आने वाले भक्त इस मगरमच्छ को बहुत सम्मान देते है।

संरचना :

ये मंदिर अपने आप में ही एक अद्भुत संरचना है जिसे 302 feet की आकर्षक झील के बीचो बीच बनाया गया है। इस झील में बारहमास शुद्ध जल की आपूर्ति होती है। झील के आस पास मंदिर के अवशेष देखने को मिलते है जो इस बात का तथ्य है की ये इस महान मंदिर परिसर का हिस्सा था। मंदिर की श्रीकोविल (गर्भगृह), नमस्कार-मंडप, थिटाप्पल्ली और जल-दुर्गा के मंदिर और गुफा का प्रवेश द्वार इस झील में स्थित है। नमस्कार मंडप एक पूर्वी चट्टान से एक पैदल पुल द्वारा जुड़ा हुआ है जो गर्भगृह तक पहुंचने का एकमात्र मार्ग है।

मंदिर के प्रमुख देवता भगवान् विष्णु है। मंदिर की गर्भ गृह की मूल मूर्तियों का निर्माण धातु व् पत्थर से नहीं किया गया है जो इस मंदिर की प्रमुख विशेषताओं में से एक है। इन प्रतिमाओं का निर्माण 70 से अधिक दुर्लभ औषधीय सामग्री के मिश्रण जिसे “कादू-शारकारा-योगम्” कहा जाता है से किया गया है। इन प्रतिमाओं को सं 1972 में पञ्चलोहा धातु की प्रतिमाओं से बदल दिया गया था। इनको कांची कामकोटि मठाधिपति द्वारा दान किया गया था। उसके कुछ समय पश्चात कादू-शारकारा-योगम्” से बानी मूर्तियों को पुनर्स्थापित करवा दिया गया। भगवान् विष्णु की प्रतिमा में वे शयन अवस्था में पांच सर वाले सर्प देव अनंता के ऊपर लेटे हुए है। इस मंदिर में सभी धर्म जाति और समुदाय के लोग प्रवेश कर सकते है। इस मंदिर के आस पास के क्षेत्र और इस मंदिर को संरक्षित करने की योजना बनायी जा रही है।

इस मंदिर में लकड़ी की नक्काशियों की उत्तम छवि देखने को मिलती है जो मंदिर के मंडपम की छत पर की गयी है। ये नक्काशियां दशावतारम (भगवान् विष्णु के दस अवतार) की कथा की घटनाओं को दर्शाती है। इनमे से कुछ को रंगा गया है। मुक्ता-मंडपम में नव-गृह (नौ गृह) को रंगा गया है। गर्भगृह की दोनों ओर की लकड़ियों में द्वार-पालक (जय और विजय) की खूबसूरत नक्काशी की गयी है।
इस मंदिर में सभी धर्म और जाति के लोग प्रवेश कर सकते है। अनंतपुरा झील मंदिर के सबसे निकट कासरगोड़ रेलवे स्टेशन है जो यहाँ से 12km की दुरी पर स्थित है। कुंबाला रेलवे स्टेशन यहाँ का एक अन्य रेलवे स्टेशन है। इस मंदिर के सबसे निकट मंगलौर एयरपोर्ट है जो यहाँ से 60km की दुरी पर स्थित है। कारीपुर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट, कोजहीकोडे यहाँ से 200km की दुरी पर स्थित है। रोड मार्ग द्वारा पहुंचने के लिए कुंबाला-बादियादका रोड पर नाईकाप (कुंबाला से 4km दूर) से मुड़ जाए।

Title : Ananthapura Lake Temple Kerala