उत्तराखंड का लोकप्रिय पर्यटक स्थल : औली

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उत्तराखंड भारत के उन राज्यों में से एक जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य और पर्वतो के लिए पुरे देश भर में मशहूर है. उत्तराखंड में कई आकर्षक हिल स्टेशन है जिनमे से एक है औली ! जो एक प्रसिद्ध स्कीइंग डेस्टिनेशन है. औली भारत के उत्तराखंड राज्य के हिमालय पहाड़ों में स्थित है. इसे गढ़वाली में औली बुग्याल के नाम से भी जाना जाता है जिसका अर्थ है घास का मैदान.

औली समुद्रतल से 2500 से 3050 meter की ऊँचाई पर स्थित है. औली को शिमला, गुलमर्ग और मनाली से अच्छा स्की डेस्टिनेशन स्थान माना जाता है. उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ भी कहते है जिसका अर्थ है “देवताओ की भूमि”. ये राज्य महत्वपूर्ण धर्मिल स्थल है क्योकि यहाँ ‘चार-धाम’ (गंगोत्री-यमुनोत्री-केदारनाथ-बद्रीनाथ) भी मौजूद है. औली बद्रीनाथ जाने वाले मार्ग में स्थित है.

औली के चारो ओर शंकुधारी और ओक के वन मौजूद है जहसे विश्व के सबसे ऊंचे पहाड़ हिमालय का पैनोरमिक दृश्य देखने को मिलता है. औली में एशिया का सबसे लम्बा गोंडोला (केबल कार) भी है जो 4km लम्बा है. इसमें एक चेयर लिफ्ट और स्की लिफ्ट है. सीकिंग के अलावा यहाँ एक दिलचस्प ट्रेकिंग मार्ग भी है. यहाँ एक छोटा सा मंदिर भी है जिसका सबंध हिन्दू महाकाव्य रामायण से है. स्कींग करने के यहाँ आने का उचित समय जनवरी के अंतिम हफ्ते से मार्च के पहले हफ्ते तक का है. औली 30.32°N 79.36°E पर उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है.

कैसे पहुंचे :

हवाई मार्ग – यहाँ का निकटतम देहरादून का एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट जो औली 281km की दुरी पर स्थित है. देहरादून जॉली ग्रांट एयरपोर्ट एक डोमेस्टिक एयरपोर्ट है जो देहरादून शहर से 20km की दुरी पर स्थित है. देहरादून एयरपोर्ट से औली के लिए टैक्सी कैब की सुविधा उपलब्ध है जिसका किराया लगभग 4000 रूपए है. इस एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए दैनिक उड़ाने उपलब्ध है. औली का निकटतम अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट दिल्ली में 500km की दुरी पर स्थित है.

औली के निकट स्थित एयरपोर्ट :

जॉली ग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून (DED) [डोमेस्टिक] : 281 km
गौचर एयरपोर्ट (GAD) [डोमेस्टिक] : 90 km

औली के निकट स्थित रेलवे स्टेशन :

ऋषिकेश रेलवे स्टेशन, ऋषिकेश : 210 km
देहरादून रेलवे स्टेशन, देहरादून : 160 km

पर्यटन :

औली, भारत का प्रसिद्ध हिल स्टेशन है. औली में कई आकर्षक स्थल है जिनमे से कुछ नीचे बताये गए है. औली स्की-लवर्स के लिए बहुत प्रसिद्ध है. यहाँ बर्फ़बारी भी देखने को मिलती है.

आर्टिफिशियल झील :

विश्व की सबसे ऊंची मानव-निर्मित झील औली में स्थित है. कम बर्फबारी के दौरान यहाँ की सरकार नए स्की स्लोप पर आर्टिफिशिकल बर्फ का निर्माण कराती है. इस झील के पानी का प्रयोग बर्फ की बंदूकों के लिए और स्की स्लोप के लिए किया जाता है. ताकि अच्छा स्कीइंग सरफेस उपलब्ध कराया जा सके.

औली, चारो ओर से ऊंचे शिखरों जैसे मना, कमेट और सबसे ऊंचा नैना देवी से घिरा हुआ है. यहाँ आप बर्फ से ढके पहाड़ों को सूरज ढलते समय रंग बदलते देख सकते है जो बहुत अविश्वसनीय और खूबसूरत लगता है. यह आकर आप जान जायंगे की क्यों साधु हिमालय पर साधना करने आते है. यहाँ का शांत और सुखद वातावरण आपको सुकून देगा जो आपके मन और शरीर पर पोसिटिव प्रभाव डालता है. यहाँ आप “मन की शांति” पा सकते है जिसकी कोई कीमत नहीं है.

ट्रैकिंग :

कुंआरी पास ट्रेक सबसे लोकप्रिय ट्रेक है जो औली से प्रारम्भ होता है. कुंआरी, का अर्थ है “doorway”, हिमालय का सबसे ऊंचा पहाड़ पास है जो उत्तर भारत के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित है. ये चमोली जिले के अधीन आता है. कुंआरी पास ट्रेक की स्थापना 1900s सदी में की गयी थी. कुंआरी पास ट्रेक को कर्ज़न ट्रेल (जिसका नाम भारत के ब्रिटिश वाइसराय “Lord Curzon” पर पड़ा) भी कहा जाता है. यहाँ के सुन्दर वन, शांत वातावरण और सुखद जलवायु आपके मन को अवश्य मोह लेगी. यहाँ से पवित्र नंदा देवी (7817 m) पहाड़ और अन्य विशाल पहाड़ जैसे द्रोणागिरि (7066 m), कमेट (7757 m), चौखम्बा (7128 m) और त्रिशूल (7120 m) का दृश्य देखने को मिलता है. यहां मौजूद ट्रेल दोनों summer trekking और winter trekking, के लिए उपयुक्त है. विंटर कुंआरी पास ट्रेक का प्रयोग स्नो ट्रैकिंग के रूप में भी किया जाता है.

औली के चारो ओर हिमालय की कई शक्तिशाली शिखर मौजूद है. जिनमे से ज्यादा का नाम या तो देवी के नाम पर है या उसका कुछ पौराणिक संबंध है. इनमे से एक है सबसे सुन्दर Mt नंदा देवी जिसकी ऊँचाई 7,817 Mts (25,643 ft) है यहां से Mt नीलकंठ का भी नज़ारा देखा जा सकता है. औली बद्रीनाथ जाने वाले मार्ग में स्थित है. सर्दियों में बद्रीनाथ में भारी बर्फ़बारी के कारण मंदिर को 5–6 महीने के लिए बंद कर दिया जाता है. जब भगवान् बद्री विशाल को लाया जाता है और जोशीमठ मंदिर में रखा जाता है. ये हिन्दुओ के लिए एक स्वर्ण अवसर होता है जिसे वे खोना नहीं चाहते. औली में हनुमान जी का एक छोटा सा मंदिर है जिसके सबंध रामायण से है. सामान्य लोगो का मानना है की जब लक्ष्मण,राम भगवान् के छोटे भाई श्री लंका के राक्षस से युद्ध के दौरान घायल हो गए थे. तब एक वैद्य ने आदेश दिया की केवल ‘संजीवनी’ एकमात्र जडीबुटी है जो लक्ष्मण के प्राणो को बचा सकती है और जो हिमालय के संजीवनी पहाड़ी पर पायी जाएगी. भगवान राम ने हनुमान जी को संजीवनी लेन का आदेश दिया. हिमालय से संजीवनी पहाड़ लाते समय हनुमान जी ने अपनी यात्रा प्रारम्भ करने से पूर्व औली में विश्राम किया था.

यहाँ भी जाये :

विष्णु प्रयाग – ये नदी अलकनंदा और दौली गंगा का पवित्र संगम है. यहाँ तक जोशीमठ द्वारा पंहुचा जा सकता है.

जोशीमठ, नाम ‘ज्योतिर्मठ’ अर्थात शिव जी के ज्योतिर्लिंग का स्थान से बना है. शंकराचार्य ने सन्यासियों के लिए चार पीठों में से एक की स्थापना की थी. ये बद्रीनाथ जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए विश्राम स्थल है. ये स्थान भगवान् विष्णु अर्थात बद्रीनाथ के भक्तो के लिए एक पवित्र स्थान है. जोशीमठ में नरसिंह का एक मंदिर है जो भगवान विष्णु का अवतार है.

बद्रीनाथ उत्तराखंड के चार धामों में से एक. ये उन हिन्दुओ के लिए बहुत महत्वपूर्ण स्थल है जो भगवान विष्णु को पूजते है. इसे सर्दियों के दौरान बंद कर दिया जाता है.

तपोवन – ‘तपो’ का अर्थ है ध्यान, और ‘वन’ का अर्थ है जंगल. ये स्थान जोशीमठ से 15km की दुरी पर स्थित है जहां एक मंदिर और गर्म पानी का प्राकृतिक झरना है.

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