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बेबी रोने के 10 कारण कौन से होते हैं?

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शिशु का रोना

जन्म के बाद शिशु का विकास जैसे जैसे बढ़ता है, वैसे वैसे शिशु हर दिन कोई न कोई नई हरकत करता है, हर दिन कुछ नया सीखता है, जिससे शिशु का विकास बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। और शिशु की प्यारी मुस्कान हर किसी को अपनी और आकर्षित करती है, लेकिन कई बार शिशु बहुत रोते है, और शिशु के रोने का क्या कारण है इसे समझना महिला के लिए थोड़ा मुश्किल सकता है, खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बनती है उनके लिए। क्योंकि हर समय शिशु एक ही वजह से रोए ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है। और कुछ शिशु तो बहुत अधिक रोते है, शिशु का रोना सामान्य बात होती है, लेकिन यदि शिशु जरुरत से ज्यादा रोता है तो इसे अनदेखा न करते हुए इसके सही कारण का पता करना जरुरी होता है, क्योंकि शिशु का बहुत ज्यादा रोना भी अच्छी बात नहीं होती है।

शिशु के रोने के कारण

शिशु का रोना बहुत ही आम बात होती है, लेकिन कई बार शिशु अचानक से बहुत अधिक रोना शुरू कर देते हैं। ऐसे में महिला को शिशु के रोने के सही कारण का पता करना बहुत जरुरी होता है, ताकि यदि शिशु को कोई परेशानी है तो उसे दूर करने में मदद मिल सकें। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की शिशु के रोने के कौन कौन से कारण हो सकते हैं।

भूख लगना

शिशु को भूख लगना आम बात होती है, और शिशु को जब भूख लगती है तो छोटा होने के कारण वो आपको बता नहीं पाता है की मुझे भूख लगी है। लेकिन भूख लगने पर वो आस पास की हर चीज को मुँह में लेने लगता है या रोना शुरू कर देता है। ऐसे में यदि शिशु हर चीज को मुँह में ले रहा हो या बहुत अधिक रो रहा हो तो शिशु को दूध पिलाकर देखना चाहिए। यदि शिशु भूख के कारण रो रहा होता है तो दूध पीने के बाद शांत हो जाता है।

शारीरिक परेशानी

शिशु यदि किसी शारीरिक परेशानी जैसे की बुखार, पेट में दर्द, पेट में गैस आदि की समस्या से परेशान होता है। तो भी शिशु अधिक चिड़चिड़ा महसूस कर सकता है। जिसके कारण शिशु बहुत अधिक रो सकता है, और यदि आपको शिशु के शरीर के तापमान में फ़र्क़ नज़र आये तो आपको तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

डाइपर की वजह से

यदि शिशु का डाइपर गीला हो गया है, शिशु में मल कर दिया है तो इसके कारण शिशु को स्किन पर परेशानी महसूस हो सकती है जिसके कारण शिशु को अच्छा महसूस नहीं होता है। जिसके कारण शिशु अधिक रो सकता है, ऐसे में यदि आप शिशु का गीला या गन्दा डाइपर बदल देती है तो शिशु को आराम मिलता है और शिशु चुप हो जाता है।

रैशेस

शिशु की स्किन बहुत ही कोमल और नाजुक होती है ऐसे में उसका अच्छे से ख्याल रखना बहुत जरुरी होता है। लेकिन कई बार शिशु को स्किन पर रैशेस या छोटे छोटे लाल लाल दाने निकल जाते हैं जिसके कारण जलन, खुजली, दर्द का अनुभव हो सकता है जिसके कारण शिशु बहुत अधिक रो भी सकता है।

तापमान

छोटे बच्चे के लिए उसके रहने की जगह के तापमान का सही होना भी बहुत जरुरी होता है। क्योंकि यदि शिशु बहुत अधिक ठण्ड या गर्मी का अनुभव करता है तो इसके कारण भी कई बार शिशु बहुत अधिक रोना शुरू कर देता हैं।

दांत निकलना

शिशु के छह से आठ महीने में दांत निकलना शुरू हो जाते हैं और जब शिशु के दांत निकलते हैं तो इस दौरान शिशु बहुत अधिक चिड़चिड़ा महसूस कर सकता है। साथ ही शिशु के मसूड़ों में खुजली व् दर्द भी हो सकता है, और इससे आराम पाने के लिए आपने देखा होगा की शिशु हर चीज को मुँह में लेकर चबाने की कोशिश करता है। और इसी कारण इस समय बच्चे अधिक रो भी सकते हैं।

ध्यान के लिए

बच्चा कितना भी छोटा हो उसे हमेशा अपने आस पास कोई न कोई दीखता रहना चाहिए क्योंकि इससे शिशु बहुत खुश रहते हैं। लेकिन यदि आप शिशु को अकेले छोड़ देते हैं तो वो आपको अपने पास बुलाने के लिए बहुत अधिक रोना शुरू कर सकता है, और उसके बाद जैसे ही आप उनके साथ खेलते हैं या उन्हें गोद में उठाते हैं तो वो बिल्कुल चुप हो जाते हैं।

थकान

छोटे बच्चे थोड़ी देर खेलकर ही बहुत जल्दी थक जाते हैं और यदि बच्चा थक जाता है। और थकावट महसूस होने के बाद शिशु का सोने का मन हो सकता है जिसके कारण भी शिशु रो सकता है।

नींद की कमी

नींद का भरपूर लेना शिशु के बेहतर विकास के लिए होना जरुरी होता है। लेकिन यदि किसी कारण शिशु की नींद पूरी होती है तो इसके कारण भी शिशु चिड़चिड़ा और थकान महसूस कर सकता है। और इसी कारण शिशु बहुत अधिक रो सकता है।

पेट में दिक्कत

यदि दूध पीने के बाद शिशु डकार नहीं लेता है, दूध पीने के बाद शिशु को गैस की समस्या होती है, पेट में दर्द होता है, शिशु दूध पीने के बाद उल्टी आदि कर देता है, तो ऐसी परेशानियों के होने पर भी शिशु बहुत अधिक रो सकता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से शिशु अधिक रो सकता है, ऐसे में इस परेशानी से निजात पाने के लिए आपको शिशु की भूख, नींद, तबियत आदि का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। साथ ही यदि किसी शारीरिक परेशानी के कारण शिशु अधिक रोता है तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। इसके अलावा शिशु के संकेतों को समझने की कोशिश करनी चाहिए इससे शिशु के रोने के कारण को जानने में आपको मदद मिलेगी, और शिशु को जो भी दिक्कत है उसे आसानी से दूर करने में मदद मिलेगी।