Bakra Eid 2018 Date : बकरा ईद कब है 2018?

बकरा ईद कब है 2018
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बकरा ईद, इस्लामी धर्म को मानने वाले लोगों का प्रमुख त्यौहार हैं। बकरीद रमजान के पवित्र महीने के खत्म होने के लगभग 2 महीने बाद मनाया जाता है। बकरीद के दिन धार्मिक मर्यादायों के अनुसार, बकरे की कुर्बानी दी जाती है। इसे ईद-उल-ज़ुहा के नाम से भी जाना जाता है।

बकरा ईद 2018

जामा मस्जिद के ऐलान के मुताबिक़ 2018 में बकरीद 22 अगस्त को मनाई जाएगी।

2018 में बकरीद की सरकारी छुट्टी

केंद्र सरकार की घोषणा के मुताबिक, बकरीद की सरकारी छुट्टी 23 अगस्त की जगह 22 अगस्त की कर दी गई है।

बकरीद का महत्व

बकरीद का दिन फर्ज-ए-कुर्बान का दिन भी होता है। इस्लामी धर्म में गरीबों का खास ध्यान रखने की परंपरा है, इसीलिए बकरीद के दिन भी गरीबों का खास ख्याल रखा जाता है। बकरे की कुर्बानी के बाद गोश्त के तीन हिस्से किये जाते हैं, जिनमे से एक हिस्सा परिवार के लिए और बाकी के 2 हिस्से गरीब और जरूरतमंदों में बांट दिए जाते है।

कब मनाई जाती है बकरीद?

इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक, 12 वें महीने धू-अल-हिज्जा की 10 तारीख को बकरीद मनाई जाती है। यह तारीख पाक रमजान के महीने के खत्म होने के लगभग 70 दिनों के बाद आती है।

क्यों मनाई जाती है बकरीद?

इस्लाम धर्म के लोगों के लिए इस पर्व का बहुत खास महत्व है। इस्लामिक मानता के अनुसार, हजरत इब्राहिम अपने बेटे हजरत इस्माइल को बकरीद के दिन खुदा के हुक्म पर खुदा की राह में कुर्बान करने जा रहे थे। तभी अल्लाह ने उनके नेक इरादों को देखते हुए उनके बेटे को जीवनदान दे दिया। बकरीद इसी की याद में मनाया जाता है। इस घटनाक्रम के बाद से अल्लाह के हुक्म पर इंसानों की नहीं जानवरों की कुर्बानी देने का इस्लामिक कानून शुरू हो गया।

कुर्बानी देने की प्रथा

बकरीद पर केवल बकरे की ही नहीं बल्कि ऊंट की भी कुर्बानी देने की प्रथा है। बहुत से लोग ईद-उल-ज़ुहा के दिन ऊंट की कुर्बानी देते हैं। ध्यान देने वाली बात ये है की कुर्बानी के लिए खास जानवरों का चयन किया जाता है। बकरे और ऊंट के आकार व् रूप पर भी खास ध्यान दिया जाता है। इसके भी बहुत से नियम कानून होते है और इनका उललंघन करना अल्लाह की तौहीन करने के समान माना जाता है।

कुर्बानी के नियमानुसार, ऐसे पशु की कुर्बानी कभी नहीं दी जाती जिसे कोई शारीरिक बिमारी हो, भैंगापन हो, उसके सींग या कान का अधिकतर हिस्सा टुटा हुआ हो या वह शरीरिक रूप से कमजोर हो। बहुत छोटे आकर के पशु को भी कुर्बान नहीं किया जाता। पशु कम से कम दो दांत (एक साल) या चार दांत (डेढ़ साल) का होना चाहिए।

कुर्बानी देने का नियम

कुर्बानी देने के वक्त पर भी सख्त नियम हैं यानी कुर्बानी ईद की नमाज के बाद की जाती है, इससे पहले कुर्बानी देने का कोई मोल नहीं रहता। और कुर्बानी के गोश्त के तीन हिस्से किये जाते है जिसे नियमानुसार गरीबों और परिवारजनों में बांट दिया जाता है।