छुट्टियों में इन जगहों पर घूमने जाएँ और यादगार छुट्टियाँ मनाएँ!

गरमी की छुट्टियाँ आते ही लोग परिवार के साथ घूमकर छुट्टी का आनंद लेना चाहते हैं, ताकि साल भर की थकान और बोरियत दूर हो सके और आने वाले अगले पूरे साल के लिए मन में नई ऊर्जा का संचार हो सके। घूमने फिरने के शौक़ के साथ साथ अगर आप रोमांच भी पसंद करते हैं, तो यक़ीनन आप ऐसी जगह जाना चाहेंगे, जहाँ आप ट्रेकिंग, बोटिंग, पैराग्लाइडिंग इत्यादि का भी आनंद ले सकें।

 गरमी की छुट्टियों के लिए हिल स्टेशन सबकी पहली पसंद होते हैं। ऐसे में उत्तर में कौसानी, चैल, कसौली, शिमला, नैनीताल, डलहौज़ी, श्रीनगर, औली, लेह लद्दाख, पूर्वोत्तर में गंगटोक, दार्जिलिंग, शिलोंग, अंडमान निकोबार द्वीप, पश्चिम में माउंट आबू, दक्षिण में कुर्ग, ऊटी, मुन्नार, कोडईकनाल, महाबलेश्वर इत्यादि अच्छे विकल्प साबित हो सकते हैं। यहाँ आप रोमांच के साथ साथ प्राकृतिक सौंदर्य का भी भरपूर आनंद उठा सकते हैं। इस आर्टिकल में हम आपको भारत के कुछ प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के बारे में बताएँगे, जहाँ आप अपनी गरमी की छुट्टियों को यादगार बनाने के लिए जा सकते हैं।

  1. गुलमर्ग – 

गुलमर्ग एक बहुत ही खूबसूरत जगह है, इसका नाम सुनकर ही ऐसा लगता है जैसे कोई हसीन वादी हो

और उसमे बहुत ही सुन्दर ढेर सारे गुल ( पुष्प ) खिले हों, जो आपको अपनी तरफ बुला रहे हों। गुलमर्ग का नज़ारा कुछ ऐसा ही है-  एक खूबसूरत बर्फीले  पहाड़ों से घिरी वादी जो पुष्पों से भरी है।

पुष्पों से सुसज्जित घाटी को देखने की लिए आपको गर्मियों के मौसम में जाना चाहिए, फूलों का मौसम मार्च महीने से जून तक रहता है।  इसके आलावा यदि आप बर्फ का मजा लेना चाहते हैं तो आप ठण्ड के मौसम में जाईए, वहाँ पर अक्सर दिसम्बर महीने से फरबरी महीने तक बर्फ़बारी होती है जो बहुत ही मनमोहक छटा बिखेरती है।

श्रीनगर से 57 किमी की दूरी पर स्थित गुलमर्ग भारत-पाकिस्तान के बॉर्डर के पास है। गुलमर्ग का मतलब ही फूलों का वन होता है। कई सालों से यहां लाखों सैलानी बर्फ से घिरी पहाड़ियों का आनंद लेने के लिए आते हैं।

कब जाएं

यहां पर आप मई से सितंबर तक कभी भी जा सकते हैं। गुलमर्ग में एक बहुत ही खूबसूरत गोल्फ कोर्स है। यहां जाने के लिए कई साधन आपको मिल जाएंगे।

क्या देखें– 

  • गोल्फ़ कोर्स – गुलमर्ग के गोल्‍फ कोर्स विश्‍व के सबसे बड़े और हरे भरे गोल्‍फ कोर्स में से एक है। अंग्रेज यहां अपनी छुट्टियाँ बिताने आते थे। उन्‍होंने ही गोल्‍फ के शौकीनों के लिए 1904 में इन गोल्‍फ कोर्स की स्‍थापना की थी। वर्तमान में इसकी देख रेख जम्‍मू और कश्‍मीर पर्यटन विकास प्राधिकरण करता है।
  • स्कीइंग – स्कीइंग में रुचि रखने वालों के लिए गुलमर्ग देश का ही नहीं बल्कि इसकी गिनती विश्‍व के सर्वोत्तम स्कीइंग रिजॉर्ट में की जाती है। दिसंबर में बर्फ गिरने के बाद यहाँ बड़ी संख्‍या में पर्यटक स्कीइंग करने आते हैं। यहाँ स्कीइंग करने के लिए ढ़लानों पर स्कीइंग करने का अनुभव होना चाहिए। जो लोग स्कीइंग सीखना शुरु कर रहे हैं, उनके लिए भी यह सही जगह है। यहां स्कीइंग की सभी सुविधाएं और अच्‍छे प्रशिक्षक भी मौजूद हैं।
  • खिलनमर्ग – खिलनमर्ग गुलमर्ग के आंचल में बसी एक खूबसूरत घाटी है। यहां के हरे मैदानों में जंगली फूलों का सौंदर्य देखते ही बनता है। खिलनमर्ग से बर्फ से ढ़के हिमालय और कश्‍मीर घाटी का अद्भुत नजारा देखा जा सकता है 
  • अलपाथर झील चीड़ और देवदार के पेड़ों से घिरी यह झील अफरवात चोटी के नीचे स्थित है। इस खूबसूरत झील का पानी मध्‍य जून तक बर्फ की बना रहता है।
  • निंगली नल्‍लाह – गुलमर्ग से आठ किमी दूर स्थित निंगली नल्‍लाह एक धारा है, जो अफरात चोटी से पिघली बर्फ और अलपाथर झील के पानी से बनी है। यह सफेद धारा घाटी में गिरती है और अंतत: झेलम नदी में मिलती है। घाटी के साथ बहती यह धारा गुलमर्ग का एक प्रसिद्ध पिकनिक स्‍पॉट है।
  •  गुलमर्ग का गोंडोला – गुलमर्ग का गोंडोला बहुत ही मशहूर है, बिना गोंडोला ( एक केबल तार प्रणाली ) की यात्रा के मजा नहीं आएगा। आप गोंडोला ऑनलाइन भी बुक करा सकते हैं अथवा वहां जाकर क़तार में खड़े होकर भी बुक कर सकते हैं।

कैसे जाएं– 

वायु मार्ग – 

नज़दीकी हवाई अड्डा श्रीनगर (56 किलोमीटर) देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। दिल्‍ली से यहाँ के लिए नियमित उड़ानें हैं।

रेल मार्ग – 

गुलमर्ग से निकटतम रेलवे स्‍टेशन जम्‍मू है जहाँ देश के विभिन्‍न भागों से ट्रेनें चलती हैं। अब निकटतम रेलवे स्टेशन श्रीनगर है जो जल्द ही जम्मू से जुड़ने के बाद देश बाकि शहरो से सीधा जुड़ जायेगा ।

सड़क मार्ग – 

गुलमर्ग श्रीनगर से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। देश के अन्‍य भागों से श्रीनगर के लिए नियमित रूप से बसें चलती हैं।

  1. औली – 

औली उत्तराखंड का एक भाग है। यह 5-7 किलोमीटर में फैला छोटा सा स्की-रिसोर्ट है। इस रिसोर्ट को 9,500-10,500 फीट की ऊँचाई पर बनाया गया है। यहाँ बर्फ से ढकी चोटियाँ बहुत ही सुन्दर दिखाई देती हैं। इनकी ऊँचाई लगभग 23,000 फीट है। यहाँ पर देवदार के वृक्ष बहुतायत में पाए जाते हैं। इनकी महक यहाँ की ठंडी और ताजी हवाओं में महसूस की जा सकती है।

औली में प्रकृति ने अपने सौन्दर्य को खुल कर बिखेरा है। बर्फ से ढकी चोटियों और ढलानों को देखकर मन प्रसन्न हो जाता है। यहाँ पर कपास जैसी मुलायम बर्फ पड़ती है और पर्यटक खासकर बच्चे इस बर्फ में खूब खेलते हैं।

जिंदादिल लोगों के लिए औली बहुत ही आदर्श स्थान है। यहाँ पर बर्फ गाड़ी और स्लेज आदि की व्यवस्था नहीं है। यहाँ पर केवल स्कीइंग की जा सकती है।

कब जाएँ – 

औली जाने के लिए सबसे अच्छा मौसम जनवरी-मार्च का है। इस समय यहाँ पर बर्फ पड़ती है। यह समय स्कीइंग करने के लिए बिल्कुल आदर्श है। परंतु गरमी की छुट्टियों में गरमी भरे मौसम दूर परिवार के साथ सुकून भरे पल बिताने के लिए ये स्थान बेहतरीन विकल्प है।

क्या देखें – 

  • रुद्रप्रयाग – दिल्ली से औली जाते समय रास्ते में रुद्रप्रयाग पड़ता है। यहाँ पर रात को रूका जा सकता है। रूद्रप्रयाग से औली पहुँचने के लिए साढ़े चार घंटे का समय लगता है। रूद्रप्रयाग में रात को ठहरने की अच्छी व्यवस्‍था है। जोशीनाथ रोड से केवल 3-4 किलोमीटर दूरी पर अच्छे रिसोर्ट हैं, जिनमें बच्चों के खेलने के लिए मैदान और मचान बने हुए हैं। इसके अलावा इनमें खाने के लिए अच्छे रेस्तरां भी हैं।
  • जोशीमठ – जोशीमठ बहुत ही पवित्र स्थान है। यह माना जाता है कि महागुरू आदि शंकराचार्य ने यहीं पर ज्ञान प्राप्त किया था। यह मानना बहुत ही मुश्किल है क्योंकि यहाँ पर बहुत ही विषम परिस्थितियाँ हैं। इसके अलावा यहाँ पर नरसिंह, गरूड़ मंदिर आदि शंकराचार्य का मठ और अमर कल्प वृक्ष है। यह माना जाता है कि यह वृक्ष लगभग 2,500 वर्ष पुराना है। इसके अलावा तपोवन भी घुमा जा सकता है। यह जोशीमठ से 14 किलोमीटर और औली से 32 किलोमीटर दूर है। तपोवन पवित्र बद्रीनाथ यात्रा के रास्ते में पड़ता है। यहीं से बद्रीनाथ यात्रा की शुरूआत मानी जाती है। बद्रीनाथ यात्रा भारत की सबसे पवित्र चार धाम यात्रा में से एक मानी जाती है।
  • औली में रूकने के लिए क्ल्फि टॉप रिसोर्ट सबसे अच्छा स्थान है। यहाँ से नंदा देवी, त्रिशूल, कमेत, माना पर्वत, दूनागिरी, बैठातोली और नीलकंठ का बहुत ही सुन्दर दृश्य दिखाई देता है।
  • यहाँ कई रिसोर्ट ऐसे भी हैं, जो स्कीइंग के अलावा रॉक क्लाइम्बिंग, फॉरस्ट कैम्पिंग और घोड़े की सवारी आदि की व्यवस्था भी करते हैं।
  • इसके अलावा यहाँ पर जंगलों में भी घूमा जा सकता है। इन जंगलों में खूबसूरत बलतु और कॉनीफर के वृक्ष पाए जाते हैं।
  • नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान – नंदा देवी के पीछे सूर्योदय देखना एक बहुत ही सुखद अनुभव है। नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान यहाँ से 41 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा बर्फ गिरना और रात में खुले आकाश को देखना मन को प्रसन्न कर देता है। शहर की भागती-दौड़ती जिंदगी से दूर औली एक बहुत ही बेहतरीन पर्यटक स्थल है।

कैसे जाएँ

औली तक आप फ्लाइट, रेल या सड़क मार्ग से भी जा सकते हैं। औली के लिए निकटतम एयरपोर्ट देहरादून है, जहां से आप आगे के लिए बस या कार कोई भी साधन ले सकते हैं।

  1. शिलांग – 

शिलांग भारत के उत्तर पूर्वी राज्य मेघालय की राजधानी है। भारत के पूर्वोत्तर में बसा शिलांग हमेशा से पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रहा है। इसे भारत के पूरब का स्कॉटलैण्ड भी कहा जाता है। पहाड़ियों पर बसा छोटा और खूबसूरत शहर पहले असम की राजधानी था। असम के विभाजन के बाद मेघालय बना और शिलांग वहां की राजधानी। लगभग 1695 मीटर की ऊंचाई पर बसे इस शहर में मौसम हमेशा सुहावना बना रहता है। मानसून के दौरान जब यहां बारिश होती है, तो पूरे शहर की खूबसूरती और निखर जाती है और शिलांग के चारों तरफ के झरने जीवंत हो उठते है।

शिलांग एक छोटा-सा शहर है जिसे पैदल घूमकर देखा जा सकता है। अपनी सुविधा के अनुसार सिटी बस या दिनभर के लिए ऑटो या टैक्सी किराए पर लेकर भी घूमा जा सकता है।

कब जाएँ – 

यहां मार्च से जून तक मौसम सुहावना रहता है, लेकिन बरसात के दिनों यहां घूमने का अपना ही मजा है। मॉनसून में यहां पर्यटक कम ही आते हैं। इस मौसम में यहां होटल के किरायों में छूट भी मिल सकती है।

क्या देखें – 

  • शिलांग पीक – शिलांग का सबसे ऊंचा प्वाइंट है। इसकी ऊंचाई 1965 मीटर है। यहां से पूरे शहर का विहंगम नजारा देखा जा सकता है। रात के समय यहां से पूरे शहर की लाईट असंख्य तारों जैसी चमकती है।
  • लेडी हैदरी पार्क – यह लगभग हर प्रकार के फूलों से सुसज्‍जित खूबसूरत पार्क है। इसमें एक छोटा चिड़ियाघर और अनेक प्रजातियों की तितलियों का संग्रहालय है।
  • केलांग रॉक – मेरंग-नोखलॉ रोड पर ग्रेनाइट की एक ऊंची और विशाल चट्टान है जिसे कैलांग रॉक के नाम से जाना जाता है। यह एक गोलाकार गुम्बदनुमा चट्टान है जिसका व्यास लगभग 1000 फुट है।
  • वार्डस झील – यह कृत्रिम झील है जो घने जंगलों से घिरी है।
  • मीठा झरना – हैप्पी वैली में स्थित यह झरना बहुत ऊंचा और बिलकुल सीधा है। मॉनसून में इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है।
  • हाथी झरना – यह ऊपरी शिलांग में स्थित है, जहां वायुसेना का पूर्वी वायु कमान भी है। यहां कई छोटे- छोटे झरने एक साथ गिरते हैं। यहां एक छोटे से रास्ते के सहारे झरने के नीचे भी जाया जा सकता है, जहां एक छोटी झील बनी हुई है।
  • चेरापूंजी – यह शिलांग से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान दुनिया भर में मशहूर है। हाल ही में इसका नाम चेरापूंजी से बदलकर सोहरा रख दिया गया है। वास्तव में स्थानीय लोग इसे सोहरा नाम से ही जानते हैं। यह स्थान दुनियाभर में सर्वाधिक बारिश के लिए जाना जाता है, हालांकि अब यह ख्याति इसके समीप स्थित मौसिनराम ने अर्जित कर ली है। इसके नजदीक ही नोहकालीकाई झरना है, जिसे पर्यटक जरूर देखने जाते हैं। यहां कई गुफा भी हैं, जिनमें से कुछ कई किलोमीटर लम्बी हैं। चेरापूंजी बांगलादेश सीमा से काफी करीब है, इसलिए यहां से बांग्लादेश को भी देखा जा सकता है।
  • उमियाम – शिलांग से 20 किलोमीटर दूर स्थित यह एक जलक्रीड़ा परिसर है, जो उमियाम जल विद्युत परियोजना की वजह से बनी झील पर स्थित है। यहां कई प्रकार की जलक्रीड़ाओं (वाटर स्पोर्ट्स) का आनन्द लिया जा सकता है।
  • मौसिनराम – यह मनोरम पहाडियों के बीच में एक प्राकृतिक गुफा है। गुफा के मध्य बिल्कुल गौ थन के आकार की शिला से लगातार नीचे बने प्राकृतिक शिवलिंग पर बूंद बूंद गिरता पानी लगता है जैसे भगवान शिव का जलाभिषेक हो रहा हो। कुल मिलाकर हिंदु धर्म के अनुसार यह स्थल एक शक्ति पीठ बनने का सामर्थ्य रखता है।
  • जैकरम, हॉट स्प्रिंग – प्रकृति की अद्भुत देन यह स्थान बहुत ही सुंदर है। गंधक युक्त गरम पानी जो कि झरने से निकलता है चर्मरोंगो के लिये एक औषधि का कार्य करता है। झरने के पानी को पाईप लाईन द्वारा स्नान घर में पहुंचाया गया है जहां पर महिला व पुरूष आराम पूर्वक स्नान कर सकते हैं। स्नान करने के बाद पूरी थकान दूर हो जाती है।
  • महादेवखोला मंदिर – सुरंगमय पहाडियों के बीच में गोरखा रेजीमेंट द्वारा निर्मित एक प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर से भगवान शंकर की अनेक दंत कथाएं जुड़ी हुई है। शिलांग के मारवाड़ी समाज के लिये यह श्रद्धा का केन्द्र है। शिवरात्रि के दिन यहां बड़ा मेला लगता है।

कैसे जाएँ – 

  • वायुयात्रा – 

यहां जाने के लिए हवाई जहाज उत्तम माध्यम है। शिलांग से 40 किलोमीटर की दूरी पर उमरोई में शिलांग हवाई अड्डा है। कोलकाता और गुवाहाटी से यहां के लिए सीधी उड़ानें है। दिल्ली से कोलकाता और गुवाहाटी के लिए सीधी उड़ानें है।

  • रेल – 

मेघालय में रेल लाइनें नहीं है। गुवाहाटी यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन है, जो शिलांग से 104 किलोमीटर दूर है। यहां से शिलांग पहुंचने में लगभग साढ़े तीन घन्टे लगते हैं। गुवाहाटी तक रेल के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। दिल्ली से गुवाहाटी पहुंचने के लिए राजधानी समेत कई रेलगाड़ियां हैं। गुवाहाटी से असम परिवहन निगम और मेघालय परिवहन निगम की बसें शिलांग से हर आधे घन्टे में चलती हैं। आप चाहें तो टैक्सी भी कर सकते हैं।