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गीता का ज्ञान, गीता का सार, Bhagwat Geeta Updesh

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हिन्दुओं का पवित्र ग्रन्थ गीता को कौन नहीं जानता है, चाहे वो किसी भी धर्म के हो या किसी भी देश के रहने बाले, गीता के बारे में काफी दिलचस्पी रखते है, क्यों की इस ग्रन्थ में जो ज्ञान की बातें लिखी है, उससे प्रेरणा लेकर ज्ञान और गृहस्त की मार्ग पर चलते हुए मोक्ष को प्राप्त कर सकता है, आज हम आपको गीता क्या है? गीता का ज्ञान क्या और और इंसान को क्या अपनाना चाहिए अपने जीवन काल में उसका वर्णन कर रहे है।

श्रीमद्भगवद्‌गीता हिन्दुओं के पवित्रतम ग्रन्थों में से एक है। यह कोई मानवीय पुस्तक नहीं अपितु स्वयं भगवान् की वाणी है। महाभारत के अनुसार कुरुक्षेत्र युद्ध में श्री कृष्ण ने गीता का सन्देश अर्जुन को सुनाया था। यह महाभारत के भीष्मपर्व के अन्तर्गत दिया गया एक उपनिषद् है। इसमें एकेश्वरवाद, कर्म योग, ज्ञानयोग, भक्ति योग,सान्ख्योग की बहुत सुन्दर ढंग से चर्चा हुई है। इसमें देह से अतीत आत्मा का निरूपण किया गया है। यह विश्व के उन चुनिन्दा ग्रंथों में से है जो ईश्वरीय माने जाते हैं। गीता की सबसे ख़ास बात यह है कि इसका अर्थ समझना अत्यंत सरल है परन्तु आशय समझना अत्यंत दुरूह है। महाभारत काल से ही लगभग सारे विद्वानों में यह आम मान्यता है कि मानवीय तौर पर ऐसी पुस्तक लिखना असम्भव है।

श्रीमद्भगवद्‌गीता की पृष्ठभूमि महाभारत का युद्ध है। जिस प्रकार एक सामान्य मनुष्य अपने जीवन की समस्याओं में उलझकर किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाता है और उसके पश्चात जीवन के समरांगण से पलायन करने का मन बना लेता है उसी प्रकार अर्जुन जो महाभारत का महानायक है अपने सामने आने वाली समस्याओं से भयभीत होकर जीवन और क्षत्रिय धर्म से निराश हो गया है, अर्जुन की तरह ही हम सभी कभी-कभी अनिश्चय की स्थिति में या तो हताश हो जाते हैं और या फिर अपनी समस्याओं से उद्विग्न होकर कर्तव्य विमुख हो जाते हैं। भारत वर्ष के ऋषियों ने गहन विचार के पश्चात जिस ज्ञान को आत्मसात किया उसे उन्होंने वेदों का नाम दिया। इन्हीं वेदों का अंतिम भाग उपनिषद कहलाता है। मानव जीवन की विशेषता मानव को प्राप्त बौद्धिक शक्ति है और उपनिषदों में निहित ज्ञान मानव की बौद्धिकता की उच्चतम अवस्था तो है ही, अपितु बुद्धि की सीमाओं के परे मनुष्य क्या अनुभव कर सकता है उसकी एक झलक भी दिखा देता है।

गीता का सार :

बेकार की चिंता हम क्यों करते हैं
बेकार में ही हम किसी से क्यों डरते हैं
कोई भी हमें मार नहीं सकता .आत्म अज़र अमर है.
आत्म न कभी जन्म लेती है और न ही कभी मरती है.
इस संसार में जो हो रहा है अच्छा ही हो रहा है.
जो भी अब तक हुआ है वो भी अच्छा ही हुआ है.
और आगे भी जो होगा वो अच्छा ही होगा.
जो बीत गया उसके लिए पश्चाताप करने से
कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है.
आने वाले वक़्त की चिंता हमें नहीं करनी चाहिए .
अपने वर्तमान को जीने में ही समझदारी है.
जो हाथ से निकल गया
उसके लिए बेकार में ही हम क्यों रोते हैं .
हमारा क्या चला गया.
हम अपने साथ न कुछ लाये थे
और न ही हमने कुछ उत्पन्न किया.
जो भी हमने लिया , यहीं से लिया.
और जो हमने दिया, यहीं से दिया.
हम खाली हाथ आये थे
और हमें खाली हाथ ही चले जाना है
जो आज हमारा है वो कल किसी और का होगा.
उसे अपना समझकर खुश होने से कोई लाभ नहीं.
परिवर्तन इस संसार का नियम है.
और मृत्यु जीवन का अटल सत्य है.
एक पल में हम अपार दौलत के मालिक बन जाते हैं
तो अगले ही पल हम बिल्कुल कंगाल हो जाते हैं.
तेरा-मेरा, छोटा-बड़ा , अपना-पराया
अपने मन से दूर करने में ही हमारी भलाई है.
ये शरीर तक हमारा नहीं है.
और न ही हम इस शरीर के हैं.
ये शरीर पांच तत्वों अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी
और आकाश से मिलकर बना है
और अंत में इन्ही तत्वों में मिल जाएगा.
हम अपने आप को भगवान् के समक्ष अर्पित कर दें.
यही सबसे उत्तम सहारा है.
और भय ,चिंता और शोक से मुक्ति पाने का
एक सर्वश्रेष्ठ मार्ग भी है .
हम जो कुछ भी करें भगवान् को अर्पण करें.
यही जीवन मुक्ति का सरल और सच्चा मार्ग है.

गीता का ज्ञान :-

1. गुस्से पर काबू  रखना  – ‘क्रोध से भ्रम पैदा होता है. भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है. जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है. जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है.’

2. मनुष्य का देखने का नजरिया – ‘जो ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, उसी का नजरिया सही है.’

3. अपने मन पर नियंत्रण – ‘जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है.’

4. खुद का आकलन और पहचानना – ‘आत्म-ज्ञान की तलवार से काटकर अपने ह्रदय से अज्ञान के संदेह को अलग कर दो. अनुशासित रहो, उठो.’

5. खुद का निर्माण – ‘मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है. जैसा वो विश्वास करता है वैसा वो बन जाता है.’

6. हर काम का फल मिलता है – ‘इस जीवन में ना कुछ खोता है ना व्यर्थ होता है.’

7. अपने मन को वश में करना – ‘मन अशांत है और उसे नियंत्रित करना कठिन है, लेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है.’

8. विश्वास के साथ विचार – ‘व्यक्ति जो चाहे बन सकता है, यदि वह विश्वास के साथ इच्छित वस्तु पर लगातार चिंतन करे.’

9. तनाव जिंदगी को नर्क बनाती है – ‘अप्राकृतिक कर्म बहुत तनाव पैदा करता है.’

10. अपना काम पहले करें – ‘किसी और का काम पूर्णता से करने से कहीं अच्छा है कि अपना काम करें, भले ही उसे अपूर्णता से करना पड़े.’

11. इस तरह करें काम – ‘जो कार्य में निष्क्रियता और निष्क्रियता में कार्य देखता है वह एक बुद्धिमान व्यक्ति है.’

12. वो काम करें जिससे आप खुश रहें  – ‘जब वे अपने कार्य में आनंद खोज लेते हैं तब वे पूर्णता प्राप्त करते हैं.’

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