बोफोर्स कांड में अभी भी कांग्रेस को राहत नहीं सीबीआई पहुची सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले फैसले के खिलाफ

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What in India, New Delhi – हाई कोर्ट द्वारा बोफोर्स के सभी आरोपियों को बरी करने के 13 साल बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शुक्रवार (2 फरवरी) को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। जिसमे हाईकोर्ट ने आरोपियों को बरी किया था। 31 मई, 2005 को हिन्दुजा बंधुओं समेत सभी आरोपियों को बरी किया था। बोफोर्स घोटाला केस 1987 में सामने आया था और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर भी इसमें शामिल होने के आरोप लगे थे। माना जा रहा है कि सीबीआई ने अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल की सलाह पर हाई कोर्ट के फैसले को एक दशक से ज्यादा समय बाद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

जैसा की आप जानते होंगे स्वीडन से बोफोर्स तोप खरीदने के लिए 64 करोड़ रुपये दलाली के आरोप यूरोप में रहने वाले व्यापारी हिन्दुजा बंधुओं समेत उस समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और इटली के बिजनेसमैन ओतावियो क्वात्रोच्ची पर लगे थे। और इसमें कांग्रेस की काफी किरकिरी हुई थी, विरोधी हमेशा इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते रहे हैं। भारत सरकार और स्वीडिश बोफोर्स निर्माता कंपनी एबी बोफोर्स के बीच 1437 करोड़ रुपये मूल्य के 155एमएम के कुल 400 हॉवित्सजर गन खरीदने का सौदा 24 मार्च 1986 को हुआ था। पर एक सनसनीखेज दाबे में कहा गया था की कंपनी ने इस रक्षा सौदे को पाने के लिए भारत में उच्च पदस्थ राजनीतिज्ञों और रक्षा अधिकारियों को दलाली दी है। उसके बाद सरकार ने इसकी जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया था। सीबीआई ने 22 जनवरी, 1990 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। सीबीआई ने बिन चड्ढा और हिन्दुजा भाइयों को मामले में मुख्य आरोपी बनाया था। बाद में 1 मई, 2005 को दिल्ली हाईकोर्ट ने तीनों हिंदूजा भाइयों (और बोफोर्स कंपनी के खिलाफ सभी आरोप रद्द कर दिए थे।

CBI द्वारा उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। और कांग्रेस पार्टी के लिए फिर से नई मुसीबत लेकर आ सकती है। इसके पहले भी कांग्रेस पार्टी को बहूत किरकिरी हो चुकी है।