प्रेगनेंसी – Lifestyle Blog India https://www.whatinindia.com What In India Sat, 06 Jun 2020 15:07:30 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=5.4.1 https://www.whatinindia.com/wp-content/uploads/2020/04/cropped-whatininda-32x32.png प्रेगनेंसी – Lifestyle Blog India https://www.whatinindia.com 32 32 मिट्टी, कोयला, चॉक, बत्ती, मुल्तानी मिट्टी को प्रेगनेंसी में खाने से ऐसे पाएं छुटकारा https://www.whatinindia.com/pregnancy-me-mitti-khana/ https://www.whatinindia.com/pregnancy-me-mitti-khana/#respond Sat, 06 Jun 2020 15:07:30 +0000 https://www.whatinindia.com/?p=39072 गर्भावस्था में मिट्टी खाने के नुकसान

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला के जीभ के स्वाद में परिवर्तन आ सकता है। जिसके कारण उनका कुछ न कुछ अलग अलग खाने का मन करता है है जैसे किमकुछ का आकर्षण किसी सब्ज़ी या फल के प्रति बढ़ता है। तो कुछ महिलाओं का मिट्टी, कोयला, चॉक, […]

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गर्भावस्था में मिट्टी खाने के नुकसान

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला के जीभ के स्वाद में परिवर्तन आ सकता है। जिसके कारण उनका कुछ न कुछ अलग अलग खाने का मन करता है है जैसे किमकुछ का आकर्षण किसी सब्ज़ी या फल के प्रति बढ़ता है। तो कुछ महिलाओं का मिट्टी, कोयला, चॉक, बत्ती, मुल्तानी मिट्टी आदि खाने का मन करता है। और जो महिलाएं इन चीजों का सेवन पहले भी करती थी प्रेगनेंसी के दौरान उन्हें इन चीजों को खाने की इच्छा ज्यादा हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में महिला का मिट्टी, कोयला, चॉक, बत्ती, मुल्तानी मिट्टी आदि खाने का मन क्यों होता है।

क्यों होता है प्रेग्नेंट महिला का मिट्टी, कोयला, चॉक, बत्ती, मुल्तानी मिट्टी आदि खाने का मन

गर्भावस्था के दौरान मिट्टी, कोयला, चॉक, बत्ती, मुल्तानी मिट्टी जैसी चीजों को खाने की इच्छा को पिका सिंड्रोम कहा जाता है जिसके कारण महिला की किसी चीज को खाने की बहुत ज्यादा इच्छा होती है। पिका सिंड्रोम के अलावा कुछ और भी कारण होते हैं जिनकी वजह से प्रेग्नेंट महिला को इन चीजों को खाने की इच्छा हो सकती है।

  • गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण महिला की इन चीजों को खाने की इच्छा ज्यादा होती है।
  • प्रेग्नेंट महिला के शरीर में यदि खून की कमी होती है तो भी महिला का ऐसी चीजें खाने का मन अधिक करता है।
  • कुछ गर्भवती महिलाओं को इन चीजों का स्वाद तो कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान इन चीजों की गंध बहुत अच्छी लगती है जिसकी वजह से महिला की इन चीजों को खाने की इच्छा होती है।

गर्भवती महिला को मिट्टी, चॉक आदि चीजें खाने के नुकसान

प्रेग्नेंट महिला यदि मिट्टी, कोयला, चॉक, बत्ती, मुल्तानी मिट्टी आदि का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान अधिक करती है तो इसके कारण गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी बहुत सी परेशानियां हो सकती है। जैसे की :-

  • चबाने के दौरान महिला के दांतों में चोट लगने का खतरा।
  • पेट सम्बन्धी परेशानियों के कारण दिक्कत होना।
  • उल्टी, दस्त जैसी परेशानी अधिक होना।
  • इन चीजों को खाने के कारण महिला की भूख में कमी आती है जिसके कारण महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ जाती है।
  • संक्रमण होना।

मिट्टी, कोयला, चॉक, आदि खाने से बच्चे को होने वाले नुकसान

प्रेग्नेंट महिला जो भी खाती है तो उसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है ऐसे में जब प्रेग्नेंट महिला इन चीजों का सेवन करती है तो इनका असर भी गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। जिसकी वजह से शिशु को नुकसान पहुँच सकता है।

  • मिट्टी आदि में पाए जाने वाले विषैले तत्व शिशु तक पहुंचकर न केवल शिशु के विकास को रोक देते हैं बल्कि इससे शिशु की जान तक को खतरा हो सकता है।
  • गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण बच्चे तक पर्याप्त पोषण नहीं पहुँचता है जिसकी वजह से बच्चे के समय से पहले जन्म होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
  • जन्म के समय शिशु के वजन में कमी, शिशु के अंगो के विकास में कमी जैसी परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।

प्रेग्नेंट महिला के लिए मिट्टी, कोयला, चॉक, आदि खाने से छुटकारा पाने के लिए टिप्स

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला अपनी इस आदत से निजात पाना चाहती है तो कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके महिला आसानी से इस परेशानी से निजात पा सकती है। तो आइये अब जानते हैं की वो आसान टिप्स कौन से हैं।

डॉक्टर से मिलें

अपनी इस आदत से निजात पाने के लिए आप सबसे पहले डॉक्टर से मिलें, और जिन जिन चीजों का सेवन करने का आपका मन करता है उन सभी के बारे में डॉक्टर को बताएं। क्योंकि इन चीजों को छोड़ने के लिए क्या करना चाहिए जिससे प्रेगनेंसी में आपको या बच्चे को कोई नुकसान न हो इसके बारे में डॉक्टर आपको ज्यादा अच्छे से बता सकते हैं।

जब भी किसी चीज को खाने की इच्छा हो तो अपना टेस्ट बदलें

यदि कभी अचानक से आपकी मिट्टी या अन्य कोई चीज खाने की इच्छा होती है तो तुरंत आपको अपनी पसंद की किसी और हैल्थी चीज का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए। यदि आप अपनी इस आदत को पक्का कर लेती हैं तो आपको इस आदत से छुटकारा पाने में मदद मिलती है।

शरीर में पोषक तत्वों की कमी न होने दें

गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण गर्भवती महिला का इन चीजों को खाने का अधिक मन करता है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस परेशानी से निजात पाने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए ताकि गर्भवती महिला को इन चीजों को खाने की इच्छा ही न हो।

तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपकी भी इन चीजों को खाने की इच्छा होती है तो इसे नज़रअंदाज़ न करें बल्कि अपनी इस आदत को तुरंत बदल दें, और इसके लिए डॉक्टर से मिलें।

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प्रेगनेंसी में परवल खाने के फायदे और नुकसान https://www.whatinindia.com/benefits-of-parwal-in-pregnancy/ https://www.whatinindia.com/benefits-of-parwal-in-pregnancy/#respond Sat, 06 Jun 2020 12:50:03 +0000 https://www.whatinindia.com/?p=39069 प्रेगनेंसी में परवल खाने के फायदे और नुकसान

गर्भावस्था के दौरान अधिकतर सभी सब्जियों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में कुछ ऐसी सब्जियां होती है जो शायद आपने पहले कभी न ट्राई की हो लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान न केवल उन सब्जियों का सेवन आपके लिए फायदेमंद होता है। बल्कि वह सब्जियां खाने में भी स्वादिष्ट होती है। और […]

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प्रेगनेंसी में परवल खाने के फायदे और नुकसान

गर्भावस्था के दौरान अधिकतर सभी सब्जियों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में कुछ ऐसी सब्जियां होती है जो शायद आपने पहले कभी न ट्राई की हो लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान न केवल उन सब्जियों का सेवन आपके लिए फायदेमंद होता है। बल्कि वह सब्जियां खाने में भी स्वादिष्ट होती है। और ऐसी ही एक सब्ज़ी है परवल, परवल दिखने में एक छोटे खीरे की तरह होता है, साथ ही परवल में विटामिन्स, मैग्नीशियम, फाइबर जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भावस्था के दौरान महिला व् बच्चे को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को परवल का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं।

फाइबर

प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को अपच, कब्ज़, गैस, सीने में जलन, पेट में जलन, खट्टी डकार जैसी परेशानियां होती है। और इसका कारण होता है पाचन क्रिया का अच्छे से काम न करना, ऐसे में गर्भवती महिला को इस परेशानी से राहत के लिए फाइबर युक्त आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है। और परवल फाइबर से भरपूर होता है, इसीलिए गर्भवती महिला यदि परवल का सेवन करती है तो पाचन क्रिया धीमे पड़ने के कारण होने वाली सभी परेशानियों से गर्भवती महिला को निजात पाने में मदद मिलती है।

विटामिन सी

गर्भावस्था के दौरान महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है जिसके कारण गर्भवती महिला को संक्रमण होने का खतरा रहता है। ऐसे में परवल का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि परवल में विटामिन सी मौजूद होता है जो की एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट होता है और महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है। विटामिन सी अलावा विटामिन बी 1, विटामिन बी 2, विटामिन ए भी परवल में मौजूद होते हैं जो माँ व् बच्चे को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल होता है कण्ट्रोल

गर्भावस्था के दौरान परवल का सेवन करने से बॉडी में कोलेस्ट्रॉल को कम करने और ब्लड में शुगर के लेवल को सही रखने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को कोलेस्ट्रॉल बढ़ने या गेस्टेशनल शुगर जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

कैल्शियम व् मैग्नीशियम

परवल में कैल्शियम व् मैग्नीशियम की भी कुछ मात्रा मौजूद होती है ऐसे में गर्भवती महिला के लिए परवल का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि इससे गर्भवती महिला की हड्डियों को पोषण मिलता है साथ ही गर्भ में पल रहे बच्चे के शारीरिक विकास को बेहतर करने में फायदा होता है।

एंटी ऑक्सीडेंट्स

परवल में एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने में मदद करते हैं। जिससे झाइयां, दाग धब्बे जैसी परेशानी से प्रेग्नेंट महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

पेन किलर की तरह काम करता है

गर्वस्थ के दौरान गर्भवती महिला को बॉडी पार्ट्स, जोड़ो आदि में दर्द की समस्या रहती है ऐसे में परवल का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि परवल गर्भवती महिला के लिए पेन किलर का काम करता है।

ब्लड में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकालता है

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थ माँ व् बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला परवल का सेवन करती है तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को बॉडी में विषैले पदार्थों के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि परवल का सेवन करने से ब्लड में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है।

वजन रहता है नियंत्रित

गर्भावस्था के दौरान जरुरत से ज्यादा वजन बढ़ना माँ व् बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है। लेकिन परवल का सेवन करने से गर्भवती महिला को वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में परवल खाने के नुकसान

गर्भावस्था में परवल खाने से गर्भवती महिला या बच्चे को कोई भी नुकसान नहीं होता है। लेकिन गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की जरुरत से ज्यादा परवल का सेवन प्रेग्नेंट महिला न करे क्योंकि किसी भी चीज का ज्यादा सेवन करने से पेट से जुडी समस्या हो सकती है, गले सड़े परवल महिला खाने में इस्तेमाल न करें, अच्छे से परवल को धोने के बाद ही खाने के लिए महिला इसे खाने के लिए प्रयोग करें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान परवल खाने से क्या फायदे या नुकसान गर्भवती महिला को होते हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और परवल की सब्ज़ी खाना चाहती है तो अपने मनपसंद तरीके से परवल की सब्ज़ी बनाकर उसका सेवन कर सकती है।

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प्रेगनेंसी में कच्चे केले की सब्ज़ी खाने के फायदे https://www.whatinindia.com/pregnancy-me-kacche-kele-ki-sabji/ https://www.whatinindia.com/pregnancy-me-kacche-kele-ki-sabji/#respond Sat, 06 Jun 2020 09:44:05 +0000 https://www.whatinindia.com/?p=39066 प्रेगनेंसी में कच्चे केले की सब्ज़ी खाने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान केला खाना बहुत फायदेमंद होता है साथ ही यदि कोई गर्भवती महिला कच्चे केले की सब्ज़ी खाना चाहती है तो महिला कच्चे केले की सब्ज़ी का सेवन भी कर सकती है। क्योंकि कच्चे केले में कैलोरी, फाइबर, आयरन, विटामिन सी, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला व् गर्भ […]

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प्रेगनेंसी में कच्चे केले की सब्ज़ी खाने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान केला खाना बहुत फायदेमंद होता है साथ ही यदि कोई गर्भवती महिला कच्चे केले की सब्ज़ी खाना चाहती है तो महिला कच्चे केले की सब्ज़ी का सेवन भी कर सकती है। क्योंकि कच्चे केले में कैलोरी, फाइबर, आयरन, विटामिन सी, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में कच्चे केले की सब्ज़ी खाने से गर्भवती महिला व् शिशु को कौन से फायदे मिलते हैं।

ऊर्जा मिलती है

कच्चे केले की सब्ज़ी में कैलोरी भरपूर होती है और गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ऊर्जा से भरपूर और फिट रहने के साथ बच्चे के बेहतर विकास के लिए अतिरिक्त कैलोरी की जरुरत होती है। ऐसे में केले की सब्ज़ी का सेवन करने से गर्भवती महिला को पर्याप्त कैलोरी मिलती है जो गर्भवती महिला व् बच्चे दोनों को फिट रखने में मदद करती है।

फाइबर

गर्भावस्था के दौरान कब्ज़, अपच, गैस जैसी परेशानियों का होना आम बात होती है। क्योंकि वजन बढ़ने के कारण, बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है। लेकिन कच्चे केले की सब्ज़ी का सेवन करने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। क्योंकि कच्चे केले में फाइबर प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है।

विटामिन सी

विटामिन सी जो की एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट होता है वह कच्चे केले में भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला कच्चे केले की सब्ज़ी का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला को विटामिन सी भरपूर मात्रा में मिलता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी बढ़ती है और गर्भावस्था के दौरान महिला व् बच्चे को हर तरह के संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

आयरन

गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी का होना माँ व् बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा असर डालता है। इसीलिए डॉक्टर भी प्रेगनेंसी के दौरान आयरन से भरपूर आहार का सेवन करने के साथ आयरन की दवाई का सेवन करने की सलाह भी देते हैं। ऐसे में कच्चे केले का सेवन गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि कच्चे केले में भरपूर मात्रा में आयरन मौजूद होता है साथ ही कच्चे केले में विटामिन सी भी होता है जो बॉडी के सभी अंगो में आयरन को अच्छे से अवशोषित होने में मदद करता है। जिससे एनीमिया व् खून की कमी के कारण होने वाली अन्य परेशानियों से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

मैग्नीशियम

कच्चे केले में मैग्नीशियम भी मौजूद होता है जो गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत करने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों व् दांतों के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

पोटैशियम

कच्चे केले में पोटैशियम की मात्रा भी मौजूद होती है जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने में मदद करती है। जिससे गर्भवती महिला को हाई ब्लड प्रैशर की समस्या, हदय सम्बन्धी परेशानियों से बचाने में मदद करता है। साथ ही पोटैशियम ब्लड में शुगर के लेवल को मेन्टेन रखने में मदद करता है जिससे गेस्टेशनल शुगर जैसी परेशानी से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में कच्चे केले की सब्ज़ी का सेवन करने के फायदे जो गर्भवती महिला व् शिशु को मिलते हैं। ऐसे में इन बेहतरीन फायदों के लिए आप कच्चे केले की सब्ज़ी का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान कर सकती है।

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प्रेगनेंसी में रोजाना 1 अखरोट 2 बादाम और 5 किशमिश खाने से यह फायदे होंगे https://www.whatinindia.com/walnut-almond-kishmish-in-pregnancy/ https://www.whatinindia.com/walnut-almond-kishmish-in-pregnancy/#respond Sat, 06 Jun 2020 04:52:35 +0000 https://www.whatinindia.com/?p=39063 प्रेगनेंसी में रोजाना अखरोट बादाम और किशमिश खाने से यह फायदे होंगे

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अपने खान पान के लिए ऐसी चीजों का चुनाव करने की सलाह दी जाती है। जो पोषक तत्वों से भरपूर हो, जिससे गर्भवती महिला को फिट रहने में मदद मिलें, प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स कम हो, बच्चे का शारीरिक व् मानसिक विकास तेजी से हो। तो ऐसे […]

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प्रेगनेंसी में रोजाना अखरोट बादाम और किशमिश खाने से यह फायदे होंगे

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अपने खान पान के लिए ऐसी चीजों का चुनाव करने की सलाह दी जाती है। जो पोषक तत्वों से भरपूर हो, जिससे गर्भवती महिला को फिट रहने में मदद मिलें, प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स कम हो, बच्चे का शारीरिक व् मानसिक विकास तेजी से हो। तो ऐसे में ड्राई फ्रूट्स का सेवन करने की सलाह प्रेग्नेंट महिला को दी जाती है।

क्योंकि ड्राई फ्रूट्स में मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ बच्चे के शारीरिक व् दिमागी विकास को बेहतर करने में मदद मिलती है। ऐसे में प्रेगनेंसी में रोजाना 1 अखरोट 2 बादाम और 5 किशमिश खाने से प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे को क्या क्या फायदे मिलते हैं इस बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में अखरोट

विटामिन सी, विटामिन बी 6, ओमेगा 3 फैटी एसिड, पोटैशियम, फोलेट, आयरन, मैग्नीशियम, व् अन्य बहुत से पोषक तत्व अखरोट में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला के साथ बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।

प्रेगनेंसी में अखरोट खाने के फायदे

  • ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर अख़रोट का सेवन करने से गर्भ में शिशु के मस्तिष्क के विकास को बेहतर होने में मदद मिलती है।
  • विटामिन सी, विटामिन इ जैसे एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर अखरोट गर्भवती महिला व् गर्भ में शिशु को हर तरह के संक्रमण से सुरक्षित रखता है साथ ही बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद करता है।
  • पोटैशियम की मात्रा भी अखरोट में मौजूद होती है जो ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने व् हदय को स्वस्थ रखने में मदद करती है।
  • कैल्शियम व् मैग्नीशियम से भरपूर अख़रोट गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत करने व् बच्चे की हड्डियों व् दांतों के बेहतर विकास में मदद करता है।
  • अखरोट फोलेट व् आयरन का भी बेहतरीन स्त्रोत होता है जो बॉडी में खून की कमी को पूरा करने के साथ शिशु के मस्तिष्क व् रीढ़ की हड्डी के विकास को बेहतर करने में मदद करता है। साथ ही इससे शिशु को जन्म दोष के खतरे से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में बादाम

आयरन, फोलिक एसिड, प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर जैसे पोषक तत्वों से भरपूर बादाम का सेवन भी गर्भावस्था के दौरान महिला को जरूर करना चाहिए। बादाम का सेवन गर्भवती महिला कच्चा या भिगोकर करने के साथ दूध में डालकर, खीर आदि में डालकर भी कर सकती है। तो आइये अब जानते हैं की बादाम खाने से प्रेग्नेंट महिला को कौन से फायदे मिलते हैं।

गर्भावस्था के दौरान बादाम खाने के फायदे

  • आयरन की अधिकता होने के कारण बादाम का सेवन से गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।
  • फोलिक एसिड से भरपूर बादाम का सेवन करने से गर्भ में पल रहे बच्चे के दिमाग के विकास को बढ़ाने व् शारीरिक विकास को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • फाइबर से भरपूर बादाम का सेवन करने से गर्भवती महिला को पाचन तंत्र से जुडी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • गर्भवती महिला की हड्डियों की मजबूती के लिए और गर्भ में पल रहे बच्चे की हड्डियों के बेहतर विकास के लिए भी गर्भवती महिला को बादाम का सेवन करना चाहिए। क्योंकि बादाम में कैल्शियम भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।
  • प्रोटीन की मात्रा भी बादाम में मौजूद होती है जो गर्भवती महिला की मांसपशियों को मजबूत करने के साथ बच्चे की कोशिकाओं के बेहतर विकास में भी मदद करती है।

प्रेगनेंसी में किशमिश

कैलोरी, फैट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, फोलेट, पोटैशियम, आयरन, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर किशमिश का सेवन करना भी प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होता है। क्योंकि यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला व् गर्भ में बच्चे के विकास के लिए फायदेमंद होते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में किशमिश खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

प्रेगनेंसी में किशमिश खाने के फायदे

  • गर्भवती महिला शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए किशमिश का सेवन कर सकती है क्योंकि किशमिश में आयरन की मात्रा मौजूद होती है।
  • फोलेट से भरपूर किशमिश का सेवन करने से गर्भ में पल बच्चे के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है।
  • किशमिश में फाइबर भी मौजूद होता है जो गर्भवती महिला को कब्ज़, अपच जैसी परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • कार्बोहाइड्रेट, कैलोरी से भरपूर किशमिश का सेवन करने से गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।
  • गर्भवती महिला की हड्डियों की मजबूती के लिए और गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास के लिए कैल्शियम से भरपूर आहार लेने की सलाह प्रेग्नेंट महिला को दी जाती है। और किशमिश में कैल्शियम भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।

तो ऐसे में यह तीनों ड्राई फ्रूट्स ही प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होते हैं और तीनों को यदि सही मात्रा में एक साथ खाया जाये तो इससे गर्भवती महिला व् भ्रूण को तीन गुना फायदा मिलता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को तीन गुना फायदेके लिए रोजाना 1 अखरोट 2 बादाम और 5 किशमिश का सेवन करना चाहिए।

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प्रेग्नेंट महिला इन चीजों का सूप बनाकर जरूर पीए https://www.whatinindia.com/soup-in-pregnancy/ https://www.whatinindia.com/soup-in-pregnancy/#respond Fri, 05 Jun 2020 14:34:36 +0000 https://www.whatinindia.com/?p=39056 प्रेग्नेंट महिला इन चीजों का सूप बनाकर जरूर पीए

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ न कुछ अलग खाने की इच्छा होती है। ऐसे में गर्भवती महिला की खाने की इच्छा को पूरी करने के लिए आज इस आर्टिकल में हम आप एक बेहतरीन और टेस्टी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं जो है सूप। सूप को बनाने के लिए तरह तरह की सब्जियों […]

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प्रेग्नेंट महिला इन चीजों का सूप बनाकर जरूर पीए

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ न कुछ अलग खाने की इच्छा होती है। ऐसे में गर्भवती महिला की खाने की इच्छा को पूरी करने के लिए आज इस आर्टिकल में हम आप एक बेहतरीन और टेस्टी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं जो है सूप। सूप को बनाने के लिए तरह तरह की सब्जियों का इस्तेमाल किया जाता है। और इसे आप टेस्टी बनाने के लिए अपने हिसाब से मसालों का इस्तेमाल कर सकते हैं व् अन्य चीजों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें की सूप बनाने के लिए आप उन्ही सब्जियों और उन्ही चीजों का इस्तेमाल करें जिनका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला किन किन चीजों का सूप प्रेगनेंसी के दौरान पीना चाहिए।

मिक्स वेजिटेबल सूप

गर्भवती महिला के लिए मिक्स वेजिटेबल का सूप बहुत फायदेमंद होता है। इस सूप को बनाने के लिए गर्भवती महिला अपनी पसंद की सब्जियों जैसे की लाल, पीली, हरी शिमला मिर्च, कॉर्न, गाजर, टमाटर, हरी मटर, बंदगोभी आदि को मिलाकर सूप बना सकती है। इस सूप में सभी सब्जियों में मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला को मिलते हैं जिससे माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

टमाटर का सूप

थोड़े टमाटर लेकर उसे अच्छे से धो लें, उसके बाद उन्हें उबालकर पीस लें। पीसने के बाद उन्हें सूप के रूप में तैयार कर लें। टमाटर का सूप न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि गर्भवती महिला को टमाटर का सूप पीने से बहुत से पोषक तत्व भी मिलते हैं। जैसे की आयरन, फोलेट, फाइबर, आदि जो गर्भवती महिला व् बच्चे के लिए फायदेमंद भी होते हैं।

ब्रोकली सूप

ब्रोकली सूप का सेवन भी गर्भवती महिला ट्राई कर सकती है क्योंकि ब्रोकली विटामिन ए और फोलिक एसिड का बेहतरीन स्त्रोत होती है जो गर्भवती महिला व् बच्चे के लिए फायदेमंद होते है।

पालक का सूप

पालक विटामिन्स, फाइबर, फोलेट व् अन्य मिनरल्स का बेहतरीन स्त्रोत होती है जो गर्भवती महिला व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है इसीलिए गर्भवती महिला पालक के सूप का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान कर सकती है। पालक के साथ अन्य कोई हरी सब्ज़ी मिलाकर भी यदि महिला सूप बनाना चाहे तो बना सकती है।

नॉन वेज से बना सूप

चिकन, मटन से बने सूप का सेवन भी यदि गर्भवती महिला करना चाहती है तो कर सकती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान नॉन वेज का सेवन बहुत फायदेमंद होता है और यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है। लेकिन ध्यान रखें की चिकन, मटन या अंडे जिस भी चीज का आप इस्तेमाल करती है वह अच्छे से धुला होने के साथ अच्छे से पका होना चाहिए।

राजमा का सूप

राजमा को एक प्याज़, हरी मिर्च, लहसुन आदि डालकर अच्छे से उबाल लें उसके बाद उसे अच्छे से पीसकर उसमे निम्बू मिलाएं, धनिया मिलाएं, बारीक प्याज़ काटें, चाट मसाला डालें, आदि। ऐसा करके राजमा का सूप बनाकर भी प्रेग्नेंट महिला खा सकती है क्योंकि राजमा का सेवन गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

तो यह हैं कुछ सूप जो गर्भावस्था के दौरान पीने फायदेमंद होते हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदों के लिए और जीभ के स्वाद को सही करने के लिए आप भी सूप का सेवन कर सकती है। इसके अलावा गर्भवती महिला का यदि कोई पसंदीदा सूप है तो उसे बनाकर भी गर्भवती महिला खा सकती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की प्रेगनेंसी के दौरान उस खाद्य पदार्थ का सेवन फायदेमंद हो।

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प्रेगनेंसी में लीची का सेवन करना चाहिए या नहीं https://www.whatinindia.com/litchi-in-pregnancy/ https://www.whatinindia.com/litchi-in-pregnancy/#respond Fri, 05 Jun 2020 09:13:49 +0000 https://www.whatinindia.com/?p=39052 प्रेगनेंसी में लीची का सेवन करना चाहिए या नहीं

सब्जियों व् फलों का सेवन गर्भावस्था के दौरान जरूर करना चाहिए क्योंकि यह पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। जो गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं। लेकिन केवल उन्ही फलों व् सब्जियों का सेवन गर्भवती महिला को करना चाहिए जिसे खाने से गर्भवती महिला व् […]

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प्रेगनेंसी में लीची का सेवन करना चाहिए या नहीं

सब्जियों व् फलों का सेवन गर्भावस्था के दौरान जरूर करना चाहिए क्योंकि यह पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। जो गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं। लेकिन केवल उन्ही फलों व् सब्जियों का सेवन गर्भवती महिला को करना चाहिए जिसे खाने से गर्भवती महिला व् शिशु को पोषण मिलें न की किसी तरह का नुकसान हो। इसीलिए गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी में किसी भी चीज का सेवन करने से पहले पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान लीची का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करना चाहिए या नहीं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को लीची का सेवन करना चाहिए या नहीं?

लीची स्वाद में मीठी होने के साथ रसदार होती है जिसका स्वाद गर्भवती महिला को बहुत पसंद आ सकता है। साथ ही लीची में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में शामिल होते हैं जैसे की विटामिन सी, मैग्नीशियम, एंटी ऑक्सीडेंट्स आदि। जो की गर्भवती महिला व् गर्भ में शिशु दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। लेकिन लीची का सेवन करने से पहले अच्छे से देख लेना चाहिए की लीची खराब तो नहीं है, लीची के स्वाद में कोई गड़बड़ तो नहीं है, आदि। साथ ही लीची का सेवन जरुरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है। ऐसे में कभी आपकी इच्छा हो तो स्वाद के लिए दो तीन लीची का सेवन किया जा सकता है।

गर्भावस्था में लीची खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि लीची का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में लीची खाने के क्या फायदे हैं।

विटामिन सी

लीची में विटामिन सी की मात्रा मौजूद होती है जो की एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट होता है। जो गर्भवती महिला की प्रतरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे को हर प्रकार के संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।

खून की कमी पूरी होती है

विटामिन सी और आयरन दोनों की मात्रा लीची में मौजूद होती है। और विटामिन सी बॉडी के सभी पार्ट्स में ब्लड को अवशोषित होने में मदद करता है जिससे गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

फाइबर

लीची में फाइबर की मात्रा भी मौजूद होती है जो गर्भवती महिला की पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। जिससे प्रेग्नेंट महिला को कब्ज़ व् अन्य पेट सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

मैग्नीशियम

लीची में मैग्नीशियम भी होता है जो गर्भवती महिला ही हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है साथ गर्भ में शिशु की हड्डियों के विकास में भी मदद करता है।

किन गर्भवती महिलाओं को लीची का सेवन नहीं करना चाहिए?

  • यदि प्रेग्नेंट महिला को लीची का सेवन करने से किसी भी तरह की एलर्जी होती है तो महिला को लीची का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • शुगर से पीड़ित महिला को लीची का सेवन नहीं करना चाहिए साथ ही लीची का सेवन जरुरत से ज्यादा भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे गेस्टेशनल शुगर की समस्या हो सकती है।
  • यदि गर्भवती महिला को नकसीर निकलती है तो भी लीची का सेवन करने से गर्भवती महिला को परहेज करना चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी में लीची का सेवन करने से जुड़े कुछ टिप्स तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी में लीची का सेवन करते समय इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको या आपके बच्चे को लीची का सेवन करने से किसी भी तरह की परेशानी न हो। साथ ही लीची को अच्छे से चेक करने के बाद ही खाना चाहिए।

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पुराने जमाने में लोग कैसे बताते थे की गर्भ में लड़का है या लड़की https://www.whatinindia.com/signs-of-baby-boy-or-girl/ https://www.whatinindia.com/signs-of-baby-boy-or-girl/#respond Fri, 05 Jun 2020 08:11:50 +0000 https://www.whatinindia.com/?p=39049 पुराने जमाने में लोग कैसे बताते थे की गर्भ में लड़का है या लड़की

पुराने समय में जब भी कोई महिला गर्भधारण करती थी तो घर की बुजुर्ग महिलाएं गर्भवती महिला के लक्षणों को देखकर बता देती थी की गर्भ में लड़का है या लड़की। और यह किसी एक लक्षण से नहीं बल्कि ऐसे बहुत से लक्षण होते थे जिन्हे देखकर पुराने जमाने में इस बात का अंदाजा लगाया […]

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पुराने जमाने में लोग कैसे बताते थे की गर्भ में लड़का है या लड़की

पुराने समय में जब भी कोई महिला गर्भधारण करती थी तो घर की बुजुर्ग महिलाएं गर्भवती महिला के लक्षणों को देखकर बता देती थी की गर्भ में लड़का है या लड़की। और यह किसी एक लक्षण से नहीं बल्कि ऐसे बहुत से लक्षण होते थे जिन्हे देखकर पुराने जमाने में इस बात का अंदाजा लगाया जाता था। हर महिला एक अलग लक्षण से इस बात का अंदाजा लगाती थी। और कुछ महिलाएं तो आज भी गर्भवती महिला के शरीर में महसूस होने वाले लक्षणों को देखकर इस बात का अंदाजा लगाती है। तो आइये अब जानते हैं की पुराने जमाने में लोग कैसे बताते थे की गर्भ में लड़का है या लड़की:-

मीठा या नमकीन खाना: यदि गर्भवती महिला की मीठा खाने की इच्छा होती है तो गर्भ में लड़की है और यदि गर्भवती महिला का नमकीन खाने का मन है तो गर्भ में बेटा है।

पिता का वजन: होने वाले बच्चे के पिता का वजन यदि बढ़ने लग जाता है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

नाक का आकार: गर्भवती महिला की नाक का आकार यदि प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ा हुआ महसूस होता है तो यह पेट में बेटा होने की और संकेत करता है।

ब्रेस्ट का आकार: प्रेग्नेंट महिला का दायां ब्रेस्ट यदि बाएं से बड़ा होता है तो इसका मतलब होता है की पेट में बेटा है जबकि यदि बाएं ब्रेस्ट का आकार दाएं ब्रेस्ट से बड़ा होता है तो यह पेट में बेटी होने का लक्षण होता है।

पेट का आकार: गर्भवती महिला के पेट का आकार यदि गोल व् आगे की तरफ कम निकला हुआ होता है तो इसका मतलब होता है की गर्भ में बेटा है। जबकि महिला का पेट बड़ा व् आगे की तरफ ज्यादा निकला हुआ होता है तो गर्भ में लड़की होती है।

बच्चे का लात मारना: पेट में पल रहा बच्चा यदि पेट के निचले हिस्से की तरफ अधिक लात मारता है तो इसका मतलब होता है की गर्भ में बेटा है। जबकि गर्भ में बच्चा यदि पसली पर अधिक लात मारता है तो पेट में बेटी है।

बच्चे का भार: सीधे हाथ की तरफ यदि गर्भवती महिला को शिशु का भार अधिक महसूस करती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। जबकि यदि गर्भ में बच्चे का भार उल्टे हाथ की तरफ अधिक होता है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

भूख: यदि प्रेग्नेंट महिला की भूख में बढ़ोतरी होती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। जबकि यदि महिला को ज्यादा भूख न लगे तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

पैरों के पंजे का ठंडा होना: यदि गर्भवती महिला के पैरों के तलवें ठन्डे रहते हैं। तो पुराने जमाने में ऐसा कहा जाता था की यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण है।

व्यवहार में बदलाव: प्रेग्नेंट महिला के व्यवहार में यदि कोई बदलाव नहीं आता है वो वैसे ही रहती है जैसे की पहले रहती थी तो यह गर्भ में लड़का होने का लक्षण होता है। जबकि यदि महिला के व्यव्हार में बदलाव आता है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

थकावट का अहसास: माँ बनने वाली महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान एक्टिव रहती है, थकान आदि का अहसास महिला को कम होता है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। जबकि गर्भ में बेटी होने पर महिला बहुत जल्दी थक जाती है और थकावट आदि की समस्या से ज्यादा परेशान रहती है।

यूरिन का रंग: गर्भवती महिला के यूरिन का रंग यदि बहुत ज्यादा पीला होता है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है।

स्किन में बदलाव: यदि प्रेग्नेंट महिला को मुहांसे, दाने, दाग धब्बे आदि की समस्या प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा होती है तो यह गर्भ में लड़का होने की तरफ इशारा करता है।

बालों का बढ़ना: गर्भावस्था के दौरान यदि महिला की स्किन पर होने वाले बाल बहुत तेजी से बढ़ते हैं तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। जबकि बाल यदि सामान्य गति से बढ़ते हैं तो यह गर्भ में लड़की होने का लक्षण होता है।

सोने की पोजीशन: प्रेगनेंसी में वजन बढ़ने के कारण गर्भवती महिला को सोने में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला बाईं और करवट लेकर आसानी से सो जाती है। महिला को कोई कोई दिक्कत नहीं होती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है।

वजन: प्रेग्नेंट महिला का वजन यदि पूरी बॉडी की बजाय पेट की तरफ से ज्यादा बढ़ता है तो यह गर्भ में बेटा होने का संकेत होता है। जबकि यदि महिला की पूरी बॉडी का वजन सभी जगह से बढ़ता है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

त्वचा का रूखापन व् फटना: प्रेग्नेंट महिला की स्किन यदि बहुत ज्यादा रूखी व् फटने लगती है तो यह भी एक लक्षण होता है जो यह बताता है की गर्भ में पल रहा शिशु बेटा है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जिन्हे देखकर इस बात का अंदाजा लगाया जाता था की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की। लेकिन यह पूरी तरह से सच हो ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है। और कई बार ऐसा भी होता है की यह अंदाजा बिल्कुल सही भी होता है।

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प्रेग्नेंट होते ही अपनी इन 15 आदतों को छोड़ दें https://www.whatinindia.com/leave-these-habits-in-pregnancy/ https://www.whatinindia.com/leave-these-habits-in-pregnancy/#respond Fri, 05 Jun 2020 06:14:54 +0000 https://www.whatinindia.com/?p=39046 प्रेग्नेंट होते ही अपनी इन 15 आदतों को छोड़ दें

प्रेगनेंसी गर्भवती महिला के लिए बहुत ही बेहतरीन समय होता है लेकिन साथ ही इस दौरान महिला को बहुत सी चीजों का ध्यान भी रखना पड़ता है। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके व् बच्चे का विकास भी प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही बेहतर तरीके से हो। इस […]

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प्रेग्नेंट होते ही अपनी इन 15 आदतों को छोड़ दें

प्रेगनेंसी गर्भवती महिला के लिए बहुत ही बेहतरीन समय होता है लेकिन साथ ही इस दौरान महिला को बहुत सी चीजों का ध्यान भी रखना पड़ता है। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके व् बच्चे का विकास भी प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही बेहतर तरीके से हो। इस दौरान महिला को अपनी आदतों में बदलाव, दिनचर्या में बदलाव, खाने पीने के तरीके में बदलाव आदि भी करने पड़ते हैं। साथ ही आपकी कुछ ऐसी आदतें और काम भी होते जो आपको गर्भवती होते ही छोड़ देने चाहिए। क्योंकि उसके कारण महिला व् बच्चे को नुकसान होता है। तो आइये अब जानते हैं की ऐसी कौन सी आतें हैं जिन्हे महिला को प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही छोड़ देना चाहिए।

सुबह देरी से उठना

यदि आप सुबह देरी से उठती है तो प्रेग्नेंट होने पर आपको अपनी इस आदत में बदलाव करना चाहिए। क्योंकि देरी से उठने के कारण आपकी दिनचर्या पर बुरा प्रभाव पड़ता है। जो गर्भवती महिला के लिए सही नहीं होता है।

खाली पेट चाय पीना

अधिकतर महिलाओं की सुबह उठते ही खाली पेट चाय पीने की आदत होती है लेकिन प्रेग्नेंट होते ही आपको अपनी इस आदत में बदलाव करना चाहिए। क्योंकि खाली पेट चाय पीने से महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियां अधिक हो सकती है।

पेन किलर का सेवन

बॉडी के किसी भी हिस्से में दर्द होते ही यदि आपकी पेन किलर लेने की आदत है तो आपको अपनी इस आदत में भी बदलाव करना पड़ेगा। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान बिना डॉक्टरी परामर्श के किसी भी दवाई का सेवन बच्चे के विकास को नुकसान पहुंचा सकता है।

जंक फ़ूड

ज्यादा लोगो की खाने में पहली पसंद जंक फ़ूड ही होता है लेकिन प्रेग्नेंट होते ही आपको जंक फ़ूड, बाहर का खाना, स्ट्रीट फ़ूड, ज्यादा तेल मसाले वाला आहार सबको छोड़ना होगा, क्योंकि यह महिला की सेहत व् बच्चे के विकास दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है।

स्मोकिंग अल्कोहल

यदि आपकी धूम्रपान या शराब पीने की आदत है तो गर्भधारण के बाद आपको अपनी इस आदत को छोड़ना होगा। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान नशीले पदार्थों का सेवन माँ व् बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचाता है।

बासी या कटी पड़ी चीजों का सेवन करने

कई बार ऐसा होता है की भूख लगने पर जो भी फ्रिज में रखना सामान या वैसे घर में रखी कोई भी चीज आपके सामने होती है। तो आप उसे खा लेती है ऐसे में गर्भधारण के बाद आपको अपनी इस आदत में बदलाव करना चाहिए। क्योंकि ऐसे रखी किसी भी चीज का सेवन, बासी भोजन आपकी सेहत व् बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।

किसी भी शादी पार्टी में चले जाना

घर में जब भी किसी शादी या पार्टी का इनविटेशन आने पर यदि आप तुरंत उस प्रोग्राम में जाने के लिए तैयार हो जाती हैं। तो आपको अपनी इस आदत में बदलाव करना चाहिए क्योंकि प्रेग्नेंट होने पर भीड़भाड़ या शोरशराबे वाली जगह पर जाना बच्चे के विकास पर बहुत बुरा असर डाल सकता है।

ज्यादा मीठा खाना

ज्यादा मीठा खाना भी गर्भावस्था के दौरान बहुत ही हानिकारक होता है क्योंकि इसके कारण वजन बढ़ना, गेस्टेशनल डाइबिटीज़ जैसी परेशानी हो सकती है। इसीलिए गर्भधारण होते ही आपको ज्यादा मीठे के सेवन से भी परहेज करना चाहिए।

ज्यादा नमक खाना

यदि आपकी तेज नमक खाने की आदत है तो प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही आपको अपनी इस आदत में बदलाव करना चाहिए। क्योंकि ज्यादा नमक खाने से गर्भवती महिला को है ब्लड प्रैशर की समस्या होती है, साथ ही ज्यादा मिर्च का सेवन करने से पेट से सम्बंधित परेशानियां भी बढ़ सकती है।

जिम करना

फिट रहने के लिए यदि आप जिम, एरोबिक्स, कार्डियो आदि करती हैं तो गर्भधारण के तुरंत बाद आपको इन सब्जी को बंद कर देना चाहिए। क्योंकि इसके कारण आपको परेशानी हो सकती है।

डाइट करना

वजन कम करने के लिए यदि आप डाइट कर रही हैं तो आपको गर्भधारण के तुरंत बाद अपनी इस आदत में बदलाव करना होगा। और डाइट करने की बजाय पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए ताकि माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

तनाव लेना

यदि आपकी छोटी छोटी बातों को पर टेंशन लेने की आदत है तो गर्भधारण होते ही आपको इस आदत को बदलना होगा। और टेंशन लेने की बजाय खुश कैसे रहे इसके बारे में सोचना होगा।

छोटी छोटी दिक्कत को अनदेखा करना

कई बार होता है की यदि आपको बॉडी में कहीं दर्द होता है या अन्य कोई शारीरिक परेशानी होती है तो आप जल्दी से डॉक्टर के पास नहीं जाते हैं। लेकिन गर्भधारण करते ही बॉडी में कोई भी समस्या होते ही आपको एक बार डॉक्टर से मिलने जरूर जाना पड़ेगा।

जल्दी जल्दी काम करना

कुछ महिलाओं की आदत होती है की वो अपने काम को बहुत जल्दी जल्दी करती हैं। लेकिन गर्भधारण के बाद आपको कोई भी काम करते समय बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है क्यों थोड़ी सी भी लापरवाही आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।

रात को देरी से सोना

रात को देरी से सोना सेहत के लिए बहुत हानिकारक होता है ऐसे में यदि आपकी यह आदत है तो गर्भधारण के बाद तुरंत अपनी इस आदत को आपको बदलना होगा। और रात को समय से सोने के साथ भरपूर नींद लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ आदतें जिनमे महिला को प्रेग्नेंट होते ही बदलाव कर देना चाहिए। क्योंकि इन आदतों के कारण गर्भवती महिला को परेशानी हो सकती है। साथ ही गर्भ में शिशु के विकास में भी दिक्कत हो सकती है। ऐसे में आपकी प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स न आएं इसके लिए गर्भवती महिला को अपनी इन आदतों में बदलाव करना चाहिए।

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प्रेगनेंसी में जोड़ो में दर्द होने के कारण व् उपाय https://www.whatinindia.com/joint-pain-in-pregnancy/ https://www.whatinindia.com/joint-pain-in-pregnancy/#respond Fri, 05 Jun 2020 05:14:06 +0000 https://www.whatinindia.com/?p=39043 प्रेगनेंसी में जोड़ो में दर्द होने के कारण व् उपाय

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते है, शारीरिक बदलाव होते हैं, प्रेगनेंसी के आगे बढ़ने के साथ वजन में भी बढ़ोतरी होती है, आदि। ऐसे में गर्भवती महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिसमे से बॉडी पार्ट्स में पेन होना बहुत आम बात होती है। बॉडी […]

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प्रेगनेंसी में जोड़ो में दर्द होने के कारण व् उपाय

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते है, शारीरिक बदलाव होते हैं, प्रेगनेंसी के आगे बढ़ने के साथ वजन में भी बढ़ोतरी होती है, आदि। ऐसे में गर्भवती महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिसमे से बॉडी पार्ट्स में पेन होना बहुत आम बात होती है। बॉडी पार्ट्स के साथ गर्भवती महिला को जॉइंट पेन की समस्या भी हो सकती है। जिसके कारण गर्भवती महिला को बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। तो आइये अब जानते हैं की गर्भवती महिला को जॉइंट पेन होने के क्या कारण होते हैं और किस तरह प्रेग्नेंट महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है।

गर्भावस्था में जोड़ो में दर्द होने के कारण

  • वजन बढ़ने के कारण घुटनों, एड़ियों आदि पर दबाव ज्यादा पड़ता है जिसकी वजह से जोड़ो में दर्द अधिक महसूस होता है।
  • शरीर में पानी की कमी होने के कारण भी जोड़ो में दर्द की समस्या होती है।
  • प्रेग्नेंट महिला यदि नमक का सेवन अधिक करती है तो इसकी वजह से भी जोड़ो में दर्द की समस्या होती है।
  • गर्भवती महिलाएं यदि खुद को फिट रखने के लिए ज्यादा व्यायाम करती है तो इसकी वजह से भी जॉइंट पेन की समस्या होती है।
  • भारी वजन उठाने के कारण, ज्यादा देर एक ही जगह पर खड़े रहने की वजह से भी यह परेशानी हो सकती है।
  • प्रेग्नेंट महिला यदि लौ ब्लड प्रैशर की समस्या से परेशान रहती है तो भी महिला को यह परेशानी हो सकती है।
  • गर्भवती महिला यदि किसी शारीरिक बीमारी जैसे की थायरॉयड आदि से पीड़ित है तो भी प्रेग्नेंट महिला को यह समस्या हो सकती है।

गर्भावस्था में जॉइंट पेन से निजात पाने के आसान टिप्स

यदि गर्भवती महिला को जॉइंट पेन की समस्या अधिक हो तो है तो कुछ आसान तरीको का इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है। तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

मालिश

किसी भी तेल को थोड़ा गुनगुना करके रोजाना रात को सोने से पहले मालिश करें ऐसा करने से आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

सिकाई

हीटिंग पैड, नमक गर्म करके, पानी की बोतल में गर्म पानी डालकर या किसी भी अन्य तरीके से जोड़ो की सिकाई करें। ऐसा करने से भी जोड़ो में दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

हल्का व्यायाम

जॉइंट पेन से आराम के लिए गर्भवती महिला को थोड़ा बहुत व्यायाम करना चाहिए, क्योंकि व्यायाम करने से मांसपेशियां रिलैक्स रहती है। बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर तरीके से होता है, जिससे गर्भवती महिला को जॉइंट पेन से राहत मिलती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की ज्यादा व्यायाम न करें।

कैल्शियम युक्त आहार

जोड़ो में दर्द की समस्या से राहत के लिए गर्भवती महिला को कैल्शियम युक्त आहार का सेवन करना चाहिए। जैसे की दूध व् दूध से बने उत्पाद, क्योंकि दूध व् दूध से बने उत्पाद का सेवन करने से हड्डियों को मजबूत रहने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को जोड़ो में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

पोषक तत्वों से भरपूर आहार

गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। क्योंकि पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने से बॉडी को फिट रहने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को जॉइंट पेन व् शरीर में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

भरपूर आराम

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत जल्दी थकावट महसूस होती है ऐसे में थकावट अधिक महसूस होने के कारण भी जॉइंट पेन की समस्या हो जाती है। ऐसे में जॉइंट पेन से राहत के लिए गर्भवती महिला को भरपूर आराम करना चाहिए।

पानी का भरपूर सेवन

गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि पानी का भरपूर सेवन करने से बॉडी हाइड्रेट रहती है जिससे गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ उपाय जिनकी मदद से प्रेग्नेंट महिला को जॉइंट पेन की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपको भी यह समस्या है तो आप भी इस परेशानी से निजात पाने के लिए इन आसान तरीको का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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गर्भावस्था में ऐंठन होने के कारण व् उपाय https://www.whatinindia.com/how-to-get-rid-from-pregnancy-cramps/ https://www.whatinindia.com/how-to-get-rid-from-pregnancy-cramps/#respond Thu, 04 Jun 2020 06:37:47 +0000 https://www.whatinindia.com/?p=39039 गर्भावस्था में ऐंठन होने के कारण व् उपाय

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिसमे से ऐंठन की समस्या होना बहुत ही आम बात होती है। प्रेगनेंसी के दौरान पेट, पैरों में ऐंठन होने के कारण गर्भवती महिला सबसे ज्यादा परेशान रहती है। क्योंकि गर्भाशय के बढ़ते आकार के कारण पेट की मांसपेशियों में खिंचाव […]

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गर्भावस्था में ऐंठन होने के कारण व् उपाय

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिसमे से ऐंठन की समस्या होना बहुत ही आम बात होती है। प्रेगनेंसी के दौरान पेट, पैरों में ऐंठन होने के कारण गर्भवती महिला सबसे ज्यादा परेशान रहती है। क्योंकि गर्भाशय के बढ़ते आकार के कारण पेट की मांसपेशियों में खिंचाव आता है और वजन बढ़ने के कारण पैरों पर अधिक दबाव पड़ता है जिसके कारण पैरों में ऐंठन की समस्या होती है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में ऐंठन होने के क्या कारण होते हैं और गर्भवती महिला किस तरह इस परेशानी से निजात पा सकती है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में पैरों में ऐंठन होने के कारण

  • वजन बढ़ने के कारण।
  • गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होने के कारण पैरों पर अधिक दबाव पड़ता है सतह ही पेट व् पीठ की मांसपशियों में खिचाव ज्यादा होता है जिसकी वजह से ऐंठन की समस्या होती है।
  • भारी वजन उठाने के कारण।
  • बहुत देर तक एक ही पोजीशन में बैठे रहने के कारण।
  • गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट के निचले हिस्से पर दबाव अधिक बढ़ जाता है जिसकी वजह से ऐंठन की समस्या हो जाती है।
  • बॉडी में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण।
  • बॉडी में तरल पदार्थों का जमाव होने के कारण सूजन व् ऐंठन की समस्या होती है।
  • बहुत देर तक एक ही पोजीशन में बैठने के कारण

गर्भावस्था में ऐंठन की समस्या से निजात पाने के टिप्स

यदि प्रेग्नेंट महिला ऐंठन की समस्या से परेशान है तो इस परेशानी से निजात पाने के लिए कुछ आसान तरीको का इस्तेमाल कर सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को ऐंठन से निजता पाने के लिए क्या करना चाहिए।

खान पान का ध्यान रखें

गर्भवती महिला बॉडी में पोषक तत्वों की कमी न होने दें, अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखें, समय से खाए, ज्यादा नमक का सेवन न करें, पानी का भरपूर सेवन करें, आदि। यदि गर्भवती महिला अपने खान पान से जुड़े इन टिप्स का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से पोषक तत्वों की कमी के कारण होने वाली ऐंठन की समस्या से प्रेग्नेंट महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

आराम करें

गर्भावस्था के दौरान शरीर को आराम की ज्यादा जरुरत होती है, ऐसे में यदि महिला भरपूर आराम नहीं करती है तो इस कारण भी मांसपेशियों में जकड़न बढ़ती है जिससे ऐंठन की समस्या होती है। ऐसे में ऐंठन की समस्या से बचने के लिए महिला को भरपूर आराम करना चाहिए। साथ ही गर्भवती महिला को बहुत देर तक एक ही पोजीशन में नहीं बैठना चाहिए।

मालिश करें

गुनगुने तेल से ऐंठन वाली जगह की मसाज करें, ऐसा करने से भी मांसपेशियों को आराम मिलता है और बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है। ऐसा करने से ऐंठन से आराम मिलता है, लेकिन ध्यान रखें की पेट पर हलके हाथों से मालिश करें बिल्कुल भी दबाव न डालें।

व्यायाम व् योगासन

ऐंठन की समस्या से निजात पाने के लिए गर्भवती महिला को हल्का फुल्का व्यायाम भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि व्यायाम करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है साथ ही बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है, मानसिक रूप भी महिला रिलैक्स रहती है। जिससे ऐंठन से बचे रहने में गर्भवती महिला को मदद मिलती है।

गुनगुने पानी से सिकाई

यदि प्रेग्नेंट महिला पैरों में ऐंठन की समस्या से ज्यादा परेशान है तो गुनगुने पानी में नमक डालकर पैरों की सिकाई करें। ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को पैरों में ऐंठन से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं गर्भवती महिला को ऐठन की समस्या होने के कारण व् इस परेशानी से बचाव के लिए कुछ आसान टिप्स, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी इन टिप्स का ध्यान रखें साथ ही ऐंठन की समस्या अधिक होने पर इसे अनदेखा न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।

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