चैती छठ 2018, छठ पर्व की पूरी जानकारी और विधि

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भारत के कई राज्यों में छठ पूजा का बहुत महत्व है, जिसमे सूर्य देव की उपासना की जाती है। मूलतः सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है। छठ पूजा साल में दो बार मनाई जाती है पहली बार चैत्र माह में और दूसरी बार कार्तिक माह में। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाये जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ कहा जाता है। यह पर्व पारिवारिक सुख समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है।

यह पर्व चार दिनों का होता है पहला दिन सेंधा नमक और घी से बना हुआ अरवा चावल और कद्दू की सब्जी प्रसाद के रूप में खाई जाती है। अगले दिन से उपवास होता है दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को पुरे नियम और धर्म से दूध भात (खीर बनाकर) पूजा करने के बाद घर के सभी सदस्य प्रसाद के रूप में लेते है जिसे खरना कहते है।

तीसरे दिन डूबता हुए सूर्य को अर्घ्य या दूध अर्पित करते है और अंतिम दिन उगते हुए सूरज को अर्घ्य दिया जाता है। छठ पूजा में प्रकृति की दी हुई वस्तुओं से ही पूजन किया जाता है जैसे : फल-फ्रूट इत्यादि। इन चार दिनों में स्वच्छ्ता और पवित्रता का बहुत ज्यादा ध्यान रखा जाता है। और कड़े नियमों का पालन करते हुए व्रत संपन्न किया जाता है।

छठ पर्व की और महत्वपूर्ण जानकारियां :

जैसा की आपको ऊपर बताया गया है की यह पर्व चार दिनों का होता है। अब हम उन चार दिनों की विस्तृत जानकारी दे रहे है।

पहला दिन नहाय-खाय

छठ पर्व का पहला दिन जो होता है उसे नहाय खाय कहा जाता है, उस दिन घर की साफ़ सफाई करके छठ व्रती स्नान कर पवित्र तरीके से शाकाहारी भोजन ग्रहण कर छठ व्रत की शुरुवात करते है। उस दिन को कद्दू-भात भी कहा जाता है। उस दिन व्रत के दौरान चावल, चने की दाल और कद्दू (घिया, लौकी) की सब्जी को बड़े नियम-धर्म से बनाकर प्रसाद रूप में खाया जाता है।

लोहंडा या खरना

छठ पूजा के दुसरे दिन को खरना या लोहंडा कहा जाता है। छठ व्रती दिन भर उपवास करने के बाद शाम को भोजन करते है। जिसे खरना कहा जाता है। खरना का प्रसाद चावल को गन्ने के रस में बनाकर या चावल को दूध में बनाकर और चावल का पिठ्ठा और चुपड़ी रोटी बनाई जाती है। शाम को पूजा पाठ के उपरांत पहले छठ व्रती खाते है उसके बाद घर के अन्य सदस्यों को प्रसाद के रूप में वही भोजन मिलता है।

पहला अर्घ्य

तीसरे दिन दिनभर चहल पहल का माहौल रहता है। व्रतधारी दिन भर डलिया और सूप में नानाप्रकार के फल, ठेकुआ, लडुआ (चावल का लड्डू), चीनी का सांचा इत्यादि को लेकर शाम को बहता हुआ पानी (तालाब, नहर, नदी, इत्यादि) पर जाकर पानी में खड़े होकर सूर्य की पूजा करते हुए परिवार के सभी सदस्य अर्घ्य देते है। और फिर शाम को वापस घर आते है। रात में छठ माता के गीत वगेरह गाया जाता है।

सुबह का अर्घ्य

चौथे दिन छठ व्रती को सूर्य उगने के पहले ही फिर से उसी तालाब, नहर, नदी पर जाना होता है जहां पर तीसरे दिन गये थे। अब उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए भगवान् सूर्य से प्रार्थना करते है। परिवार के सभी सदस्य भी व्रती के साथ अर्घ्य देते है और फिर वापस अपने घर को आते है।

छठ व्रती चार दिनों का कठिन व्रत करके चौथे दिन पारण करते है। और एक दुसरे के घर में प्रसाद का आदान प्रदान होता है।

अगर कोई त्रुटी इस आर्टिकल के लिखते वक्त रह गई हो तो क्षमा प्रार्थी है। यहाँ पर सिर्फ छठ पूजा की जानकारी मात्र देने का उद्देश्य है।

छठ पूजा मार्च 2018, चैत्र मास, चैती छठ का विवरण इस प्रकार है


चैती छठ 2018

2018 में चैती छठ की डेट –

20 मार्च 2018 : नहाय खाय छठ
21 मार्च 2018 : खरणा छठ
22 मार्च 2018 : चैती छठ * मुख्य दिन पहला अर्घ्य (अरग)
23 मार्च 2018 : पारण छठ पूजा


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