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छठी मैया कौन है? और क्या कहानी है?

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Chhati Maiya Kaun hai?

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लोक आस्था के महापर्व “छठ” का हिन्दू धर्म में बेहद खास महत्व है। इसे भारत के पूर्वी हिस्सों में बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। हालाँकि, अब इसे देश के अन्य राज्यों में भी मनाया जाने लगा है। यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमे न केवल उदयाचल सूर्य की पूजा की जाती है बल्कि अस्ताचलगामी सूर्य को भी पूजा जाता है।

इस पर्व को बड़ी शुद्धता और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। जिसमे हर चीज का अपना महत्व होता है। छठ पर्व दिवाली के छठे दिन मनाया जाता है। जिसकी तैयारियां दिवाली के बाद से ही दिखने लगती है।

जहां एक तरफ दिवाली का बाजार अपनी समाप्ति पर होता है वहीं दूसरी तरफ छठ पर्व का बाजार सजने लगता है। वर्ष 2017 में छठ पर्व की शुरुआत 24 अक्टूबर, मंगलवार से प्रारंभ हो जाएगा। जिसकी शुरुआत नहाय खाय से होगी। पर्व का समापन 27 अक्टूबर, शुक्रवार को भोर अर्घ्य से होगी।

चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत का विधि विधान किसी भी अन्य व्रत की तुलना में काफी कठिन होता है। छठ व्रत रखने वाले व्रती को चार दिनों तक कड़ा उपवास रखना होता है। माना जाता है की पुरे विधि विधान से छठ पूजा करने वालों को छठी मैया मनचाहा वरदान देती है।chhath parv

छठ व्रत रखने और नहीं रखने वाले सभी व्यक्ति ये तो भली भांति जानते है की ये पूजा सूर्य देवता के लिए की जाती है। लेकिन क्या आपने कभी छठी मैया पर गौर किया है? या यह जाना है की आखिर छठी मैया है कौन? शायद नहीं! इसीलिए आज हम आपको छठी मैया और छठ की कथा के बारे में बताने जा रहे है।

इसके बाद निश्चित रूप से आप जान जायेंगे की सूर्य देवता के साथ पूजी जाने वाली छठी मैया हैं कौन? और क्या हैं छठ के पीछे की कथा?

कौन हैं छठी मैया?

निश्चित रूप से तो हम भी नहीं कह सकते लेकिन मान्यता हैं की छठी मैया भगवान सूर्य की बहन हैं और उन्ही को प्रसन्न करने के लिए इन्हे साक्षी मानकर भगवान सूर्य की आराधना करते हुए गंगा-यमुना या किसी अन्य नदी या पोखर के किनारे ये पूजा की जाती है।

माना जाता है, छठी मैया बच्चो की रक्षा करती है इसीलिए जी भी व्रती इस व्रत को करता है उसकी संतान की आयु लंबी होती है। मार्कण्डय पुराण में भी इस बात का जिक्र किया है की सृष्टि के अधिष्ठात्री देवी प्रकृति ने खुद को 6 भागों में बांटा हुआ है और इसके छठे अंश को मातृ देवी के रूप में पूजा जाता है जो भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री है। बच्चे के जन्म के 6 दिन बाद भी छठी मैया की पूजा की जाती है और उनसे प्रार्थना की जाती है की वो बच्चे को स्वस्थ, सफलता और दीर्घ आयु का वरदान दें।

छठ की कथा :-chhat puja ki kahani

छठ व्रत की कथा के अनुसार प्रियव्रत नाम के एक राजा थे जिनकी पत्नी का नाम मालिनी थी। राजा की कोई संतान नहीं थी जिसकी वजह से राजा और रानी दोनों ही बहुत दुखी रहते थे। पुत्र प्राप्ति के लिए राजा ने महर्षि कश्यप से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया। इस यज्ञ के फलस्वरूप रानी गर्भवती हो गयी लेकिन 9 महीने के पश्चात् रानी को मरा हुआ बच्चा पैदा हुआ। जब यह खबर राजा तक पहुंची तो वे बहुत दुखी हुए और उन्होंने आत्महत्या का मन बना लिया।

जैसे ही राजा आत्महत्या के लिए आगे बड़े वैसे ही उनके सामने एक देवी प्रकट हुई। देवी ने राजा से कहा मैं षष्ठी देवी हूँ और मैं लोगों को पुत्र का सौभाग्य प्रदान करती हूँ। देवी ने राजा से कहा की अगर तुम सच्चे मन से मेरी पूजा करोगे तो मैं तुम्हारी सभी मनोकामनमायें पूरी करूंगी और तुम्हे पुत्र रत्न दूंगी।

राजा ने देवी के कहे अनुसार उनकी पूजा की। राजा और उनकी पत्नी ने कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पुरे विधि विधान के साथ देवी षष्ठी की पूजा की और उसके फलस्वरूप उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई। तभी से छठ पर्व मनाया जाने लगा।

छठ पर्व को लेकर एक और कथा कही जाती है जिसके अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए थे तो द्रौपदी ने छठ व्रत रखा था। इस व्रत के प्रभाव से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण हुई और पांडवों को उनका राजपाट और वैभव वापस मिल गया।