दूसरे बच्चे की प्रेगनेंसी में कितना अंतर होना चाहिए और क्यों

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दूसरे बच्चे की प्रेगनेंसी में कितना अंतर होना चाहिए और क्यों, पहले और दूसरे बच्चे में कितना अंतर होना चाहिए, महिला की पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में कितना फ़र्क़ होना चाहिए

माँ बाप बनना हर कपल की लाइफ का सबसे प्यारा और यादागार पल होता है। तो आज हम इसी विषय से जुडी कुछ बातें आपसे करने जा रहे हैं जैसे की पहले और दूसरे बच्चे के जन्म में कितना अंतर होना चाहिए और क्यों? वैसे माँ बाप बनने का निर्णय हर कपल का अपना होता है जैसे की कुछ लोग अपनी आर्थिक स्थिति को देखते हुए एक ही बच्चा प्लान करते हैं, वहीँ कुछ ऐसे भी होते हैं जो घर वालों के दबाव में आकर दो बच्चों का फैसला लेते हैं। लेकिन जब आप दूसरे बच्चे को जन्म देने का फैसला करते हैं तो आपको बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

जैसे की दोनों बच्चों के जन्म में कितना अंतर होना चाहिए, महिला की सेहत अच्छी है या नहीं, या महिला दूसरे बच्चे को अभी जन्म दे सकती है या नहीं। इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यदि आप जल्दबाज़ी में दूसरे बच्चे का निर्णय ले लेते हैं। तो कई बार महिला मानसिक व् शारीरिक रूप से तैयार नहीं होती है जिसका असर महिला के स्वास्थ्य के साथ गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है। इसका अलावा यदि बच्चों में अंतर ठीक न हो तो दोनों बच्चों के पालन पोषण में कमी आ सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की दो बच्चों के जन्म में कितना अंतर होना चाहिए।

दो बच्चों के जन्म में कितना अंतर होना चाहिए

दो बच्चों के जन्म में कम से कम अठारह महीने से चौबीस महीने के अंतर होना चाहिए। क्योंकि इससे महिला भी पहली प्रेगनेंसी के बाद अच्छे से रिकवर हो जाती है, और शारीरिक के साथ महिला मानसिक रूप से भी आराम महसूस करती है। और साथ ही पहला शिशु भी थोड़ा संभल जाता है, जिसके कारण महिला को इतनी परेशानी नहीं होती है। और यदि महिला पहले बच्चे को जन्म देने के बाद एक साल में ही दूसरे बच्चे का फैसला लेती है तो इससे केवल महिला को ही परेशानी नहीं होती है बल्कि बच्चे के प्रीमेच्योर होने के चांस भी अधिक होते हैं। और दूसरे शिशु को जन्म देने से पहले महिला को अपनी अच्छे से जांच भी करवानी चाहिए की क्या उसकी बॉडी दूसरे शिशु को जन्म देने के लिए फिट है या नहीं।

क्यों होना चाहिए दो बच्चों के जन्म में गैप

दो बच्चों के जन्म में गैप इसीलिए होना चाहिए क्योंकि यदि दोनों बच्चे एक के बाद एक जन्म ले लेते हैं तो इससे न केवल महिला मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित होती है बल्कि दोनों शिशु की परवरिश पर भी असर पड़ता है। आइये जानते हैं दो बच्चों के जन्म में गैप क्यों होना चाहिए।

महिला को फिट रखने के लिए

पहले शिशु के जन्म के बाद महिला को संभलने में समय लगता है क्योंकि शिशु के साथ यह उसका पहला अनुभव होता है। और साथ ही महिला के बॉडी में शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत से बदलाव होते हैं। ऐसे में यदि महिला के पूरी तरह से शारीरिक व् मानसिक रूप से फिट न होने पर आप दूसरे बच्चे को जन्म देने का फैसला लेते हैं तो इससे महिला का शरीर बुरी तरह प्रभावित होता है।

शिशु को स्वस्थ रखने के लिए

स्टडी के अनुसार यदि महिला पहले बच्चे के जन्म के बाद बहुत जल्दी प्रेग्नेंट हो जाती है तो इसके कारण शिशु के प्रीमेच्योर होने के चांस बढ़ जाते हैं। और साथ ही जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है तो बच्चे के वजन के बढ़ने की बजाय घटने के चांस बढ़ जाते हैं। इसीलिए यदि आप चाहती हैं की आपका दूसरा बच्चा हष्ट पुष्ट, तंदरुस्त, स्वस्थ हो तो इसके लिए आपको अपनी पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में गैप रखना चाहिए।

बच्चों की बेहतर केयर के लिए

एक साथ दो बच्चों को स्तनपान करवाना, और एक साथ दोनों को सही केयर देना काई बार मुश्किल हो जाता है। ऐसे में यदि दोनों बच्चों के जन्म में कम गैप हो तो इसके कारण दोनों की सही केयर नहीं हो पाती है। इसीलिए बच्चों के जन्म में दो साल का गैप होना चाहिए ताकि महिला दूसरे बच्चे की सही केयर के लिए तैयार हो सके।

इसीलिए यदि आप भी दो बच्चों को जन्म देना चाहते हैं तो कम से कम अठारह महीने से दो साल का गैप उनमे जरूर रखना चाहिए। ताकि किसी को भी दिक्कत न हो महिला के साथ बच्चों की सेहत पर भी किसी तरह का कोई बुरा प्रभाव न पड़े।

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