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मनोज वाजपयी की फिल्म रुख का रिव्यु

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Rukh Movie Review

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मनीष मुंदरा की फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर भले ही अच्छा रिस्पांस नहीं मिला हो लेकिन उनकी फिल्मों को हर बार दर्शको की एक खास क्लास के साथ क्रिटिक्स की जमकर वाहवाही मिलती है। अगर मनीष की पिछली फिल्म “न्यूटन” की बात करें तो उस फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर अच्छी खासी कमाई की बल्कि खुद को ऑस्कर के लिए नॉमिनेटेड फिल्मों में से भी एक पाया।

वहीं उनकी “आंखों देखी” और “मसान” ने भी दर्शकों की एक ख़ास क्लास में अपनी पहचान छोड़ी। लेकिन इस बार मनीष अपनी नई फिल्म के साथ ए है जिसमे उन्होंने एक मर्डर मिस्ट्री को बिलकुल अलग एंगल से पेश किया है। जिसके मुताबिक, एक एक्सीडेंट में अपने पिता को खो चुके बेटे को पुलिस की जाँच पर भरोसा नहीं रहता। उसे हर बार यही लगता है की उसके पिता की मौत रोड एक्सीडेंट में नहीं बल्कि उन्हें पूरी प्लानिंग के साथ मारा गया है।

फिल्म की पूरी कहानी इसी प्लाट पर घूमती है। फिल्म के निर्देशक अतानु का दावा है की उनकी यह फिल्म एक सच्ची घटना पर बेस्ड है, परन्तु वास्तविक घटना के बारे में उन्हें ज्यादा कुछ नहीं पता।

फिल्म रुख की स्टोरी :

दिवाकर माथुर (मनोज वाजपेयी) एक चमड़ा यानि लेदर के कारोबारी है, उनकी अपनी एक फैक्ट्री है। लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वह इसे ठीक ढंग से नहीं चला पा रहे है। दिवाकर की पत्नी नंदिनी माथुर (स्मिता तांबे) को अपने पति से शिकायत रहती है की वह अपनी फैक्ट्री में ही उलझे रहते है और न तो अपने इकलौते बेटे ध्रुव माथुर (आदर्श गौरव) को समय दें पाते है और न ही अपनी फैमिली के लिए वक्त निकाल पाते है।

इसी दौरान दिवाकर का दोस्त रोबिन (कुमुद मिश्रा) उनकी मदद करता है और फैक्ट्री चलाने के लिए मोटी रकम देकर दिवाकर के साथ फैक्ट्री में पार्टनर बन जाता है। वहीं स्कूल में पढ़ रहे ध्रुव को यही बात सताती रहती है की उसके पापा के पास उसके लिए वक्त नहीं है। ऐसे में ध्रुव गुस्सैल बन जाता है। और स्कूल में एक बच्चे के साथ मारपीट कर देता है जिसके बाद उसे स्कूल से निकाल दिया जाता है। इस वजह से दिवाकर उसे बोर्डिंग स्कूल भेज देता है। फिर एक दिन ध्रुव को यह खबर मिलती है की उसके पिता दिवाकर की मौत एक रोड एक्सीडेंट में हो गयी है।

ध्रुव बोर्डिंग छोड़ के अपने घर लौट आता है, लेकिन ध्रुव को यही लगता है की उसके पिता की मौत एक्सीडेंट ने नहीं हुई बल्कि एक सोची समझी प्लानिंग के साथ उनका मर्डर किया गया है।

रुख फिल्म का रिव्यु :

भले ही फिल्म एक मर्डर मिस्ट्री है लेकिन डायरेक्टर ने फिल्म को सिंगल ट्रैक पर ही पेश किया है। किरदारों के हिसाब से तो कहानी बहुत अच्छी है लेकिन स्क्रिप्ट पर उन्होंने ज्यादा काम नहीं किया। शायद यही वजह है की फिल्म की गति बहुत धीमी है।

अलीगढ़ जैसी कई फिल्मों में अपनी एक्टिंग से लोगों के बीच प्रसिद्ध होने वाले मनोज वाजपेयी पूरी फिल्म में अपने किरदार में जीते नजर आएं वहीं स्मिता तांबे की ख़ामोशी के बीच उनके फेस एक्सप्रेशन काफी बेस्ट है। ध्रुव के किरदार में आदर्श गौरव ने अच्छा काम किया है जबकि कुमुद मिश्रा ने रोबिन के किरदार को बखूबी निभाया है।

अगर आपको कुछ नया देखने का मन है तो एक बार यह फिल्म जरूर देखें। लेकिन एंटरटेनमेंट, एक्शन और कॉमेडी के शौकीनों के लिए इस फिल्म को देखने की कोई वजह नहीं है।

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