गणेश चतुर्थी 2018 : शुभ मुहूर्त, पूजा का समय

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भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में पूरे भारत में बड़े ही उत्साह और श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान शंकर और माँ पार्वती के पुत्र गणेश भगवान का जन्म हुआ था। और उनके जन्म की ख़ुशी एक या दो दिन नहीं बल्कि ग्यारह दिन तक मनाई जाती है। इस त्यौहार की सबसे ज्यादा धूम महाराष्ट्र में दिखने को मिलती है। कई लोग अपने घर में विघ्नहर्ता की स्थापना करते हैं। और घर में दस दिन तक पूरे भक्ति भाव और श्रद्धा से पूजा करने के बाद ग्याहरवें दिन पूरे भक्तिभाव और विधिविधान से उनका विसर्जन करते हैं। इस त्यौहार की धूम बहुत ही अलग और निराली होती है तो आइये जानते हैं की इस साल गणेश चतुर्थी कब है और पूजा का शुभ समय क्या है।

गणेश चतुर्थी का महत्व

गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है ऐसा उनके भक्तो का विश्वास होता है की गणेश जी आगमन पर उनके सारे दुःखो का निवारण हो जाएगा और उनके सभी कष्ट खत्म हो जाएंगे। और लोग गणेश जी के प्रति अपनी आस्था को व्यक्त करने के लिए अपने घर में दस दिन उन्हें अपने घर में बिल्कुल घर के सदस्य की तरह प्यार और भक्ति भाव से रखते हैं। और उनके जाने के दिन पूरे गाजे बाजे और रंगो के साथ उन्हें विसर्जित करते हैं। गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर कई जगह बहुत बड़े बड़े पंडाल लगाए जाते हैं। जहां पर बहुत ही सूंदर सूंदर और मन को मोहने वाली गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है, और बहुत दूर दूर से लोग इनके दर्शन के लिए आते हैं।

गणेश चतुर्थी 2018 कब है

गणेश चतुर्थी 2018 में 13 सितम्बर दिन गुरूवार यानी वीरवार को है।

गणेश चतुर्थी 2018 पूजा का समय

गणेश चतुर्थी 2018 में 13 सितंबर दिन गुरूवार को पूजा का समय

मध्याह्न गणेश पूजा – 11:04 से 13:31 तक है

गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से बचने का समय – 16:07 से 20:34 (12 सितंबर 2018)

गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से बचने का समय – 09:32 से 21:13 (13 सितंबर 2018)

चतुर्थी तिथि की शुरुआत – 16:07 (12 सितंबर 2018)

चतुर्थी तिथि समाप्त – 14:51 (13 सितंबर 2018)

गणेश चतुर्थी पूजा की विधि

  • सबसे पहले सूर्योदय से उठकर नहा धोकर स्नान कर लें, और साफ व् स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • उसके बाद अपने मुँह को पूर्व या उत्तर दिशा में रखकर गणेश पूजा करें, और उससे पहले गणेश मूर्ति की स्थापना करें।
  • मूर्ति स्थापना के बाद सबसे पहले संकल्प लें, और उसके बाद धूप, दीप, दूर्वा घास, मोदक, तिल के लडू, आदि अर्पित करें।
  • और गणेश मंत्रो का उच्चारण करें।
  • फिर शाम के समय संकष्टी व्रत कथा करें।

तो यह हैं गणेश चतुर्थी से जुडी कुछ बातें, हर वर्ष यह दिन किसी त्यौहार से कम नहीं होता है। और इस दिन लोग गणेश चतुर्थी का व्रत भी करते हैं, जिसकी पूजा की विधि ऊपर बताई गई है। साथ ही इस साल गणेश चतुर्थी की सारी जानकारी भी ऊपर बताई गई है।

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