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गणेश लक्ष्मी की पूजा विधि

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Lakshmi Ganesh Poojan Vidhi

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दिवाली हिन्दुओं के उन पवित्र और पावन त्योहारों में से एक है जिसे सभी समान उत्साह और हर्ष के साथ मनाते है। कोई इसे घर में लक्ष्मी जी के आगमन की स्वागत की तैयारियों के रूप में मनाता है तो कोई परिवार में सुख आने की ख़ुशी में। हिन्दू धर्म में दिवाली ही एकमात्र ऐसा त्यौहार है जिसे सभी लोग अपनी अपनी श्रद्धा और ख़ुशी से मनाते है।

भले ही लोग इसे किसी भी रूप में मनाये लेकिन दीपावली के समय सबसे अधिक महत्व लक्ष्मी पूजन का ही होता है। इस समय माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लोग क्या क्या नहीं करते? अपने घरों की साफ़ सफाई करते है, घर से सारे कबाड़ को बाहर निकालते है, घर की विशेष साज सजावट आदि करते है। परन्तु माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए केवल सजावट ही पर्याप्त नहीं है इसके लिए उनका विधिवत पूजन करना भी आवश्यक है।

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इसीलिए दिवाली के दिन माँ लक्ष्मी और गणेश जी के साथ साथ कुबेर जी की भी पूजा करें। क्योंकि वे देवताओं के खजांची है। देवी लक्ष्मी की पूजा में भगवान विष्णु न हो ऐसा हो नहीं सकता क्योंकि वे उनके पति है। इसलिए दिवाली पूजन में माता लक्ष्मी के साथ साथ भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है। इसके अतिरिक्त कुछ क्षेत्रों में इस दिन माँ काली का भी पूजन किया जाता है। यहाँ हम आपको दिवाली के दिन लक्ष्मी गणेश पूजन की सम्पूर्ण विधि बताने जा रहे है जिसकी मदद से आप भी माँ लक्ष्मी और गणेश की कृपा पा सकते है।

लक्ष्मी गणेश पूजन विधि :-

क्योंकि यह हिन्दुओं का सबसे बड़ा त्यौहार होता है तो इस दिन की पूजा भी स्पेशल होनी चाहिए। जिसके लिए आपको विशेष सामग्री की आवश्यकता होगी। जिसकी सूचि कुछ इस प्रकार है –

  • कलावा
  • रोली
  • सिंदूर
  • एक नारियल
  • अक्षत
  • लाल वस्त्र
  • फूल
  • पांच सुपारी
  • लौंग
  • पान के पत्ते
  • घी
  • कलश
  • कलश के लिए आम का पल्ल्व
  • चौकी
  • समिधा
  • हवन कुंड
  • हवन सामग्री
  • कमल गट्टे
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल)
  • फल
  • बताशे
  • मिठाइयां
  • पूजन में बैठने के लिए आसन
  • हल्दी
  • अगरबत्ती
  • कुमकुम
  • इत्र
  • दीपक
  • रुई
  • आरती की थाली
  • कुशा
  • रक्त चंदन
  • श्रीखंड चंदन।

पूजा शुरू करने से पूर्व ये करें :-

लक्ष्मी गणेश पूजन शुरू करने से पूर्व चौकी को अच्छी तरह धोकर उस पर रंगोली बनाएं। चौकी के चारों कोनो पर एक एक दीपक जलाएं। अब जिस स्थान पर गणेश व् लक्ष्मी जी की प्रतिमा स्थापित करनी हो वहां कुछ चावल रखें। अब इस स्थान पर गणेश और लक्ष्मी जी की प्रतिमा को रखें। ध्यान रखें लक्ष्मी जी की प्रतिमा उलटे हाथ की तरफ और गणेश जी की प्रतिमा सीधे हाथ की तरफ रखें।

आप चाहे तो कुबेर, सरस्वती एवं माँ काली की मूर्ति भी स्थापित कर सकते है। माँ लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए आप भगवान विष्णु की मूर्ति माँ लक्ष्मी की बायीं ओर पूजा करनी चाहिए। अब आसान बिछाकर सामने बैठ जाएं। अब अपनी और अपने आसान की शुद्धि करें जिसका मंत्र ये है – “ऊं अपवित्र : पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोऽपिवा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि :॥” इन मन्त्रों को अपने ऊपर तथा आसान पर 3-3 बार कुशा से छींटे लगाएं फिर आचमन करें – ऊं केशवाय नम: ऊं माधवाय नम:, ऊं नारायणाय नम:, फिर हाथ धोएं, पुन: आसन शुद्धि मंत्र बोलें- ऊं पृथ्वी त्वयाधृता लोका देवि त्यवं विष्णुनाधृता। त्वं च धारयमां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥

शुद्धि के बाद चंदन लगाएं। अनामिका उंगली से श्री खंड चंदन लगाते हुए यह मंत्र बोले चन्‍दनस्‍य महत्‍पुण्‍यम् पवित्रं पापनाशनम्, आपदां हरते नित्‍यम् लक्ष्‍मी तिष्‍ठतु सर्वदा।

पूजन हेतु संकल्प :-

इसके बाद बारी आती है संकल्प की। जिसके लिए पुष्प, फल, सुपारी, पान, चांदी का सिक्का, नारियल (पानी वाला), मिठाई, मेवा, आदि सभी सामग्री थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर संकल्प मंत्र बोलें- ऊं विष्णुर्विष्णुर्विष्णु:, ऊं तत्सदद्य श्री पुराणपुरुषोत्तमस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय पराद्र्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे सप्तमे वैवस्वतमन्वन्तरे, अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलिप्रथम चरणे जम्बुद्वीपे भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर्गत ब्रह्मवर्तैकदेशे पुण्य (अपने नगर/गांव का नाम लें) क्षेत्रे बौद्धावतारे वीर विक्रमादित्यनृपते : 2070, तमेऽब्दे शोभन नाम संवत्सरे दक्षिणायने/उत्तरायणे हेमंत ऋतो महामंगल्यप्रदे मासानां मासोत्तमे कार्तिक मासे कृष्ण पक्षे अमावस तिथौ (जो वार हो) रवि वासरे स्वाति नक्षत्रे आयुष्मान योग चतुष्पाद करणादिसत्सुशुभे योग (गोत्र का नाम लें) गोत्रोत्पन्नोऽहं अमुकनामा (अपना नाम लें) सकलपापक्षयपूर्वकं सर्वारिष्ट शांतिनिमित्तं सर्वमंगलकामनया– श्रुतिस्मृत्यो- क्तफलप्राप्तर्थं— निमित्त महागणपति नवग्रहप्रणव सहितं कुलदेवतानां पूजनसहितं स्थिर लक्ष्मी महालक्ष्मी देवी पूजन निमित्तं एतत्सर्वं शुभ-पूजोपचारविधि सम्पादयिष्ये।

गणपति पूजन :-ganesh

जैसा की आप सभी जानते है की किसी भी पूजन की शुरुआत में सर्वप्रथम श्री गणेश को पूजा जाता है। इसलिए सबसे पहले श्री गणेश जी की पूजा करें। इसके लिए हाथ में पुष्प लेकर गणेश जी का ध्यान करें। मंत्र पढ़े – गजाननम्भूतगणादिसेवितं कपित्थ जम्बू फलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्।आवाहन: ऊं गं गणपतये इहागच्छ इह तिष्ठ।। इतना कहने के बाद पात्र में अक्षत छोड़ दे।

अर्घा में जल लेकर बोलें- एतानि पाद्याद्याचमनीय-स्नानीयं, पुनराचमनीयम् ऊं गं गणपतये नम:। रक्त चंदन लगाएं: इदम रक्त चंदनम् लेपनम् ऊं गं गणपतये नम:, इसी प्रकार श्रीखंड चंदन बोलकर श्रीखंड चंदन लगाएं। इसके पश्चात सिन्दूर चढ़ाएं “इदं सिन्दूराभरणं लेपनम् ऊं गं गणपतये नम:। दूर्वा और विल्बपत्र भी गणेश जी को अर्पित करें। उन्हें वस्त्र पहनाएं और कहें – इदं रक्त वस्त्रं ऊं गं गणपतये समर्पयामि।

पूजन के बाद श्री गणेश को प्रसाद अर्पित करें और बोले – इदं नानाविधि नैवेद्यानि ऊं गं गणपतये समर्पयामि:। मिष्टान अर्पित करने के लिए मंत्र: इदं शर्करा घृत युक्त नैवेद्यं ऊं गं गणपतये समर्पयामि:। प्रसाद अर्पित करने के बाद आचमन करायें। इदं आचमनयं ऊं गं गणपतये नम:। इसके बाद पान सुपारी चढ़ायें: इदं ताम्बूल पुगीफल समायुक्तं ऊं गं गणपतये समर्पयामि:। अब एक फूल लेकर गणपति पर चढ़ाएं और बोलें: एष: पुष्पान्जलि ऊं गं गणपतये नम:

इसी प्रकार अन्य देवताओं का भी पूजन करें बस जिस देवता की पूजा करनी हो गणेश जी के स्थान पर उस देवता का नाम लें।

कलश पूजन :-Kalash Sthapna

इसके लिए लोटे या घड़े पर मोली बांधकर कलश के ऊपर आम के पत्ते रखें। कलश के अंदर सुपारी, दूर्वा, अक्षत व् मुद्रा रखें। कलश के गले में मोली लपेटे। नारियल पर वस्त्र लपेट कर कलश पर रखें। अब हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर वरुण देव का कलश में आह्वान करें। ओ३म् त्तत्वायामि ब्रह्मणा वन्दमानस्तदाशास्ते यजमानो हविभि:। अहेडमानो वरुणेह बोध्युरुशंस मान आयु: प्रमोषी:। (अस्मिन कलशे वरुणं सांगं सपरिवारं सायुध सशक्तिकमावाहयामि, ओ३म्भूर्भुव: स्व:भो वरुण इहागच्छ इहतिष्ठ। स्थापयामि पूजयामि॥)

इसके बाद इस प्रकार श्री गणेश जी की पूजन की है उसी प्रकार वरुण देव की भी पूजा करें। इसके बाद देवतार इंद्र और फिर कुबेर जी की पूजा करें।

लक्ष्मी पूजन :-

सर्वप्रथम निम्न मंत्र कहते हुए माँ लक्ष्मी का ध्यान करें।

ॐ या सा पद्मासनस्था, विपुल-कटि-तटी, पद्म-दलायताक्षी।
गम्भीरावर्त-नाभिः, स्तन-भर-नमिता, शुभ्र-वस्त्रोत्तरीया।।
लक्ष्मी दिव्यैर्गजेन्द्रैः। मणि-गज-खचितैः, स्नापिता हेम-कुम्भैः।
नित्यं सा पद्म-हस्ता, मम वसतु गृहे, सर्व-मांगल्य-युक्ता।।

अब माँ लक्ष्मी की प्रतिष्ठा करें। हाथ में अक्षत लेकर मंत्र कहें – “ॐ भूर्भुवः स्वः महालक्ष्मी, इहागच्छ इह तिष्ठ, एतानि पाद्याद्याचमनीय-स्नानीयं, पुनराचमनीयम्।”

प्रतिष्ठा के बाद स्नान कराएं और मंत्र बोलें – ॐ मन्दाकिन्या समानीतैः, हेमाम्भोरुह-वासितैः स्नानं कुरुष्व देवेशि, सलिलं च सुगन्धिभिः।। ॐ लक्ष्म्यै नमः।। इदं रक्त चंदनम् लेपनम् से रक्त चंदन लगाएं। इदं सिन्दूराभरणं से सिन्दूर लगाएं। ‘ॐ मन्दार-पारिजाताद्यैः, अनेकैः कुसुमैः शुभैः। पूजयामि शिवे, भक्तया, कमलायै नमो नमः।। ॐ लक्ष्म्यै नमः, पुष्पाणि समर्पयामि।’इस मंत्र से पुष्प चढ़ाएं फिर माला पहनाएं। अब लक्ष्मी देवी को इदं रक्त वस्त्र समर्पयामि कहकर लाल वस्त्र पहनाएं।

माँ लक्ष्मी की अंग पूजा :-

बाएं हाथ में अक्षत लेकर दाएं हाथ से थोड़े थोड़े छोड़ते जाए और मंत्र कहें – ऊं चपलायै नम: पादौ पूजयामि ऊं चंचलायै नम: जानूं पूजयामि, ऊं कमलायै नम: कटि पूजयामि, ऊं कात्यायिन्यै नम: नाभि पूजयामि, ऊं जगन्मातरे नम: जठरं पूजयामि, ऊं विश्ववल्लभायै नम: वक्षस्थल पूजयामि, ऊं कमलवासिन्यै नम: भुजौ पूजयामि, ऊं कमल पत्राक्ष्य नम: नेत्रत्रयं पूजयामि, ऊं श्रियै नम: शिरं: पूजयामि।

अष्टसिद्धि पूजा :-

अंग पूजन की ही तरह हाथ में अक्षत लेकर मंतोच्चारण करते रहे। मंत्र इस प्रकर है – ऊं अणिम्ने नम:, ओं महिम्ने नम:, ऊं गरिम्णे नम:, ओं लघिम्ने नम:, ऊं प्राप्त्यै नम: ऊं प्राकाम्यै नम:, ऊं ईशितायै नम: ओं वशितायै नम:।

अष्टलक्ष्मी पूजन :-Diwali Lakshmi pujan

अंग पूजन एवं अष्टसिद्धि पूजा की ही तरह हाथ में अक्षत लेकर मंत्रोच्चारण करें। ऊं आद्ये लक्ष्म्यै नम:, ओं विद्यालक्ष्म्यै नम:, ऊं सौभाग्य लक्ष्म्यै नम:, ओं अमृत लक्ष्म्यै नम:, ऊं लक्ष्म्यै नम:, ऊं सत्य लक्ष्म्यै नम:, ऊं भोगलक्ष्म्यै नम:, ऊं योग लक्ष्म्यै नम:

नैवैद्य अर्पण :-

पूजन के बाद देवी को “इदं नानाविधि नैवेद्यानि ऊं महालक्ष्मियै समर्पयामि” मंत्र से नैवैद्य अर्पित करें। मिष्टान अर्पित करने के लिए मंत्र: “इदं शर्करा घृत समायुक्तं नैवेद्यं ऊं महालक्ष्मियै समर्पयामि” बालें। प्रसाद अर्पित करने के बाद आचमन करायें। इदं आचमनयं ऊं महालक्ष्मियै नम:। इसके बाद पान सुपारी चढ़ायें: इदं ताम्बूल पुगीफल समायुक्तं ऊं महालक्ष्मियै समर्पयामि। अब एक फूल लेकर लक्ष्मी देवी पर चढ़ाएं और बोलें: एष: पुष्पान्जलि ऊं महालक्ष्मियै नम:।

लक्ष्मी देवी की पूजा के बाद भगवान विष्णु जी की पूजा करनी चाहिए फिर गल्ले की पूजा करें। पूजन के पश्चात सपरिवार आरती और क्षमा प्रार्थना करें।