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गणेश चतुर्थी 2017 मुहूर्त तिथि स्थापना का शुभ मुहूर्त

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महाराष्ट्र में गणपति बाप्पा मौर्य के नारे को गूंज अभी से सुनाई देने लगी है। क्योंकि बस कुछ ही पलों के बाद बाप्पा सबके घर मेहमान बनके विराजमान होने वाले है। 25 अगस्त 2017, शुक्रवार को गणेश चतुर्थी है। इस दिन सभी के घर गणपति महाराज पधरेंगे और 10 दिनों तक मेहमान बनके विराजमान होंगे। पुरे हर्षोउल्लास और धूम धाम से मनाए जाने वाले इस पर्व सबसे खास बात गणपति स्थापना की होती है।

माना जाता है शुभ मुहूर्त में की गयी गणपति स्थापना परिवार के सदस्यों और उनके भविष्य के लिए बहुत मंगलकारी होती है। मान्यता ये भी है जो व्यक्ति पुरे श्रद्धा और विश्वास के साथ पुरे विधि विधान से गणपति की स्थापना करता है विघ्नहर्ता उसके सभी दुःख हर लेते है और उसे सुखी जीवन का आशीर्वाद देते है।

इसीलिए हम आपको 2017 में गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त बताने जा रहे है।

प्रातः काल में होगा सर्वोत्तम शुभ मुहूर्तganesh-chaturthi

ज्योतिषियों के अनुसार इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना का शुभ समय प्रातः काल 8:24 मिनट से पहले का है। क्योंकि इसके बाद भद्रा शुरू हो जाएगी। जो रात तक रहेगी। जानकारी के लिए बता दें भद्रा में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है।

इसीलिये गणपति स्थापना भद्रा से पहले ही कर लेंप्रातः 5:20 मिनट से लेकर 7:36 मिनट तक स्थिर लग्न है जिसे स्थापना के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त बताया जा रहा है। अगर किसी कारणवश इस लग्न में स्थापना न कर पाए तो 8:24 मिनट से पहले ही स्थापना कर लें।

संकल्प है आवश्यक :

भगवान् के किसी भी कार्य को प्रारंभ करने से पूर्व संकल्प लेना अति आवश्यक होता है। गणपति स्थापना से पूर्व भी आपको यह करना होगा। इसके लिए हाथ में पान के पत्ते पर पुष्प, अक्षत (चावल), और सिक्का लें और भगवान् को याद करें। उसके बाद अपना नाम, पिता का नाम, पता और गोत्र आदि बोलकर गणपति से अपने घर पधारने का निवेदन करें। और उनकी सेवा सत्कार करने का संकल्प लें।

ये भी है जरुरी :

  • गणपति की मिटटी की मूर्ति ही घर लाए जो जल में आसानी से घुल जाए। इससे किसी भी जीव को नुकसान न पहुंचें।
  • मूर्ति को घर की उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान कोण दिशा में स्थापित करें। जिससे गणपति का मुख दक्षिण में रहे।
  • स्थापना करने से पूर्व उस स्थान पर स्वास्तिक बनाए और पीले चावल बिछाएं।
  • कलश को ईशानकोण में स्थापित करें और दीपक को अग्निकोण में।
  • नवग्रह बनाए और सभी देवी, देवताओ, नदियों, पितरों और नवग्रह आदि का आवाहन कर पूजन करें।
  • गणपति को पान के पत्ते पर बूंदी या बेसन के लड्डू और दुब घास रखकर भोग लगाएं। अंत में आरती गाकर उनका स्वागत करें।

हमारी ओर से आप सभी को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाये!

।।गणपति बाप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया।।