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गर्भ के अंतिम दो महीनो में ये नहीं करें

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वैसे तो गर्भावस्था का पूरा समय ही महिलाओ को अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, ताकि गर्भवती महिला और उसके होने वाले बच्चे को कोई नुकसान न हो, परन्तु गर्भावस्था के आखिरी दो महीनों में प्रेग्नेंट महिला को अपना ज्यादा ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इस दौरान बच्चे का वजन सबसे ज्यादा बढ़ता है, व् महिला के पेट का आकार भी बढ़ने के कारण कोई भी असावधानी माँ और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए हानिकारक हो सकती है, इसके अलावा महिला को अपनी नियमित जांच भी करवाते रहना चाहिए, और थोड़ी सी भी परेशानी का अनुभव होने पर तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।

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गर्भावस्था का आठवां और नौवां महीना माँ के लिए काफी अहम होता है, क्योंकि इस दौरान गर्भ में पल रहे शिशु की गतिविधियां भी तेजी से शुरू हो जाती है, कई महिलायों का मानना है, की आठवां महीना खत्म होते ही महिला को हर काम को तेजी से करना चाहिए, इसके कारण नार्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते है, परन्तु महिला को इस समय भी सावधानी बरतनी चाहिए, और आपको जो समय डॉक्टर ने दिया है यदि उस समय तक गर्भ में पल रहा शिशु अपने आप भी बाहर आने की कोशिश करता है, तो वो स्वस्थ होता है, इसके अतिरिक्त और भी बहुत सी बातें है जिनका ध्यान महिला को गर्भावस्था के दौरान रखना चाहिए, जिसके कारण माँ और बच्चे दोनों को ही फायदा होता है, तो आइये हम आपको बताते है की प्रेगनेंसी के अंतिम दो महीनों में महिलाओ को कौन कौन से काम नहीं करने चाहिए।

ज्यादा देर खड़े न हो:-

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन बढ़ने और गर्भ में पल रहे शिशु के कारण महिला के पेट के निचले हिस्से पर जोर पड़ने लगता है, जिसके कारण महिला को पीठ में दर्द की समस्या हो जाती है, इसीलिए महिला को ज्यादा देर तक खड़े नहीं होना चाहिए, और जैसे ही थकान का अनुभव हो तब आराम करना चाहिए। साथ ही महिला को ज्यादा देर तक पैरों के भार भी नहीं बैठना चाहिए इसके कारण भी महिला को परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।

पेट के भार न सोएं:-

गर्भावस्था के दौरान महिला को कभी भी अपने पेट के भार नहीं सोना चाहिए, परन्तु आखिरी दो महीनो में महिला के पेट का आकार पूरी तरह से बढ़ जाता है, जिसके कारण महिला को उठने बैठने यहां तक की सोने में भी परेशानी का अनुभव करना पड़ता है, परन्तु महिला को सोते समय ध्यान रखना चाहिए की अपने पेट के भार न सोएं, क्योंकि इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु को परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।

अपने शरीर के हर संकेत को समझे उन्हें इग्नोर न करें:-

प्रेगनेंसी के आखिरी तीन महीनों में महिला को ध्यान रखना चाहिए की यदि उन्हें थकान का नुभव हो रहा हैं तो उन्हें आराम करना चाहिए, इसके अलावा यदि उनके प्यास का अनुभव हो तो पानी पीना चाहिए, भूख लगे तो स्नैक्स खाएं, संतुलित आहार लें, क्योंकि इस समय महिला को अपने साथ बिलकुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इस समय महिला के शरीर के साथ होने वाली थोड़ी सी लापरवाही आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।

नींद के प्रति लापवाही न करें:-

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वैसे तो हर व्यक्ति को दिन में कम से कम आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए, इसके कारण व्यक्ति को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, परन्तु गर्भावस्था के आखिरी महीनो में शरीर में होने वाले तेजी से बदलाव के कारण महिला को परेशानी का अनुभव होने लगता है, जिसके कारण महिला अपनी नींद के साथ लापवाही बरतने लगती है, लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए महिला को आठ घंटे की नींद के साथ दोपहर में भी यदि थोड़ी देर सो कर आराम करना चाहे तो कर सकती है, ऐसा करने से महिला को आराम महसूस होता है, और साथ ही बच्चा भी स्वस्थ रहता है।

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तनाव न लें:-

तनाव होने के कारण महिला को प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है, इसके कारण बच्चे के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है, उसके विकास में कमी आ सकती है, इसीलिए महिला को प्रेगनेंसी के समय खास कर आखिरी महीनो में बलकुल भी तनाव नहीं लेना चाहिए, इसके कारण उन्हें डिलीवरी में आने वाली परेशानियों का भी अनुभव करना पड़ सकता है।

खान पान के प्रति न बरते लापरवाही:-

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गर्भावस्था के आखिरी दो या तीन महीनों में बच्चे का सम्पूर्ण विकास होता है, और उसका मेटाबोलिज्म भी बढ़ता है, इसीलिए महिला को अपने आहार का सेवन अच्छे से करना चाहिए ताकि बच्चे को अच्छे से पोषण मिल सकें, इस दौरान महिला को सभी मिनरल्स युक्त आहार का सेवन करना चाहिए, और थोड़े थोड़े समय बाद कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए, महिला को डेरी प्रोडक्ट, प्रोटीन, स्टार्च युक्त भोजन, विटामिन सप्लीमेंट, साबुत अनाज, अंडा मछली, आदि पदार्थो का सेवन करना चाहिए इसके कारण महिला को डिलीवरी के समय होने वाली परेशानियों से भी राहत पाने में मदद मिलती है।

ज्यादा कड़ा व्यायाम न करें:-

महिला को अंतिम महीनों में ज्यादा कड़ा व्यायाम नहीं करना चाहिए, इसके कारण महिला को परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है, यदि महिला चाहे तो महिला हल्का फुल्का व्यायाम कर सकती है, इसके कारण महिला को पीठ आदि के दर्द से राहत पाने में मदद मिलती है, साथ ही आप चाहे तो योगा कर सकती हैं, इसके कारण आपको मानसिक रूप से भी आराम पाने में मदद मिलती है।

सम्बन्ध बनाने में तेजी न बरते:-

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प्रेगनेंसी के आखिरी समय में महिला के पेट का आकार बढ़ने के कारण सम्बन्ध बनाने में परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है, इसके लिए आपको इस समय सावधानी बरतनी चाहिए, यदि आप सम्बन्ध बना भी रहे है तो बिलकुल भी तेजी न बरतें, और यदि महिला को प्रेगनेंसी के समय किसी तरह की परेशानी है, तो जितना हो सकें आपको सम्बन्ध बनाने से परहेज करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के आखिरी महीनों में किन बातों का ध्यान रखें:-

  • यदि आपके प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद पानी अधिक मात्रा में निकलने लगे तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
  • यदि आपको हल्का फुल्का दर्द होता है तो ठीक है, परन्तु यदि दर्द पहले से ज्यादा तेजी से होने लगे तो आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
  • बुखार की समस्या हो या अचानक से ब्लड प्रैशर कम या ज्यादा होने लगे तो आपको लापवाही नहीं बरतनी चाहिए।
  • यदि आप शुगर से परेशान है, और आपकी शुगर अचानक से कम या ज्यादा हो गयी है तो भी आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • डॉक्टर ने जो डेट दी है उसके आस पास आपको डॉक्टर से जाकर एक बार जरूर मिलना चाहिए।
  • कई महिलाएं घरेलू नुस्खे आजमाकर नार्मल डिलीवरी या बच्चे को समय से पहले लाने की कोशिश करती है तो ऐसा नहीं करना चाहिए।

तो ये कुछ बातें है जिनका ध्यान आपको प्रेगनेंसी के आखिरी दो महीनों में रखना चाहिए, क्योंकि इस समय यदि आपको कोई परेशानी होती है, तो इसका बुरा असर आपके गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है, और साथ ही आपको डिलीवरी में होने वाली परेशानी का अनुभव भी करना पड़ सकता है, इसके अलावा आखिरी दिनों में आपको डॉक्टर से संपर्क बनाएं रखना चाहिए, और थोड़ी सी भी परेशानी का अनुभव होने पर आपको डॉक्टर से यूरनट जांच भी करवानी चाहिए।

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