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हरिद्वार की कावड़ यात्रा

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हरिद्वार की कावड़ यात्रा:-सावन मास में होने वाली कावड़ यात्रा का लोग बहुत ही बेसबरी से इंतज़ार करते हैं. इन दिनों हर जगह होने वाले कावड़ मेले का लोगो में बहुत ही उत्साह देखा जाता हैं. हर जगह भोले बाबा के नाम के जयकारे लग रहे होते हैं.लोग अलग-अलग जगह से भोले बाबा को मानाने के लिए निकलते हैं.कुछ लोग अपने खुद के साधन का इस्तेमाल करते हैं तो कुछ लोग बस में भोले बाबा की धूम का आनंद उठते हैं. इन दिनों में हरिद्वार में जगह-जगह पर भंडारे व् शिविर लगाए जाते हैं.रात्रि के समय कावड़ यात्री कावड़ मेले का खूब आनंद उठाते हैं.लोग अलग-अलग जगह से आकर इस मेले की धूम उठाते हैं.और बड़े ही उत्साह के साथ इसमें सम्मिलित होते हैं.कुछ लोग नंगे पाव इस यात्रा में अपनी श्रद्धा भोले बाबा के प्रति व्यक्त करते हैं.आइये अब जानते हैं कैसे शुरू करते हैं लोग ये यात्रा और किस तरह भोले बाबा पर जल चढ़ाकर मनाते हैं भोले बाबा को.

कैसे आरम्भ होती हैं कावड़ यात्रा:-वैसे तो पुरे साल ही सोमवार को भोले बाबा की पूजा अर्चना व् व्रत किये जाते हैं. परन्तु सावन मास में की गई भोले बाबा की पूजा का एक अलग ही महत्व हैं.पूरा सावन मास भोले बाबा के त्यौहार के रूप में मनाया जाता हैं.कावड़ यात्रिओ के साथ-साथ और लोगो में भी इसका उत्साह देखा जाता हैं.सबसे पहले कावड़ यात्री भगवन शंकर की पूजा अर्चना करके इस यात्रा को शुरू करते हैं. और भोले बाबा को मानाने के लिए जगह-जगह से इस यात्रा में समिल्लित होने के लिए आते हैं.फिर सब हरिद्वार में पहुंच कर गंगा में स्नान करते हैं.और घूम फिर कर भगवन भोले की कावड़ को अपने कंधो पर विराजमान करके वह से प्रस्थान करते हैं.इस समय में लोग महादेव को खुश करने की हर संभव कोशिश करते हैं.और फिर उत्साह के साथ नाचते गाते हुए अपने-अपने मार्ग की तरफ निकलते हैं. अंत में वह अपनी मंजिल पर पहुंच कर शिवरात्रि के महापर्व वाले दिन गंगाजल से भोले बाबा का अभिषेक करते हैं.

विभिन्न तरह की कावड़:-इसमें लोग अलग-अलग तरह से भोले बाबा की कावड़ बनते हा कुछ लोग एक ही दिन में हरिद्वार से दौड़ कर अपनी मंजिल पर पहुंचते हा ऐसी कावड़ को डाक कावड़ कहते हैं. यह कावड़ एक समूह में होती हैं. इसमें एक से ज्यादा व्यक्ति सम्मिलित होते हैं.कुछ लोग इसे अपने साधन पर लेकर आते हैं. जैसे बाइक,साइकिल आदि.कुछ लोग इससे पैदल यात्रा करके ही संपन्न करते हैं.हर व्यक्ति अपने मन से तन से भोले बाबा को प्रसन्न करने की कोशिश करता हैं.और भगवान् शिव के जयकारे ओम नमः शिवाय के साथ धूम मचाते हैं.

kawadकावड़ यात्रिओ के लिए प्रसाशन व्यवस्था:-इन् दिनों कावड़ यात्रिओ के लिए खाने-पिने की व्यवस्था हर जगह की जाती हैं. हर जगह उनके रहने के लिए शिविर लगाए जाते हैं. कई जगह पर उनके लिए भोले बाबा की झाकिया भी दिखाई जाती हैं. और व् आराम के साथ साथ भोले बाबा के भजन संध्या का भी आनंद लेते हैं. जगह जगह भोले बाबा के नाम के भंडारे लगाए जाते हैं.लोग मस्ती में झूमते हैं.प्रशासन हर तरह से इस कावड़ यात्रा को सफल बंनने का प्रयतन करते हैं.और हर जगह भोले बाबा का नाम ही गूंजता हैं.

इस कावड़ यात्रा की समाप्ति सावन मास में आने वाली शिवरात्रि को भोले बाबा के गंगाजल से जलाभिषेक के साथ किया जाता हैं.इस यात्रा में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी समिल्लित होती हैं.उनका उत्साह भी किसी से कम नहीं होता हैं.पुराणी मान्यता के अनुसार सावन मास में आने वाले सभी सोमवार का व्रत करने से पुरे वर्ष का फल मिलता हैं.हर सावन मास में बस एक ही नाम हर जगह गूंजता हैं.ओम नमः शिवाय.

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