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हॉबी क्लासेज : बच्चों की मनपसंद हॉबी क्लास जरुर करवाएं!

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बच्चों को हॉबी क्लास ज्वाइन करना बहूत ही अच्छा लगता है, क्यों की वह उनके पसंद की चीजें करवाई जाती है, पढ़ाई और स्कूल से छुटकारा पाने और जी भर के खेलने के लिए सब बेताब होंगे। पर उनका ये उत्साह ज़्यादा दिन नहीं चलेगा,  क्यूँकि एक जैसी रूटीन से जल्दी ही वे बोर होना शुरू हो जाते हैं। ज़्यादातर अभिभावक गर्मी की छुट्टियों में अपने बच्चों के साथ कहीं बाहर घूमने नहीं जा पाते। छुट्टियों में कहीं घूमने न जा पाने की वजह चाहे जो भी हो पर इससे होने वाली दिक्कतें बच्चों को ही झेलनी पड़ती हैं। टीवी पर कार्टून देख-देखकर जब उनका जी भर जाता है, तो अपनी बोरियत दूर करने के लिए वे दिन भर घर में धमाचौकड़ी मचाते हैं। और जब माँ उन्हें डाँटती है तो उनका एक ही जवाब होता कि क्या करे, हम घर में बैठे-बैठे बोर हो रहे है? आप बाहर भी तो नहीं जाने देतीं।

बच्चे ऊर्जा से भरे होते हैं। इस वजह से जब भी वे खाली होते हैं तो अपनी इस असीमित ऊर्जा को खर्च करने के लिए वे तरह-तरह की शरारतें करते हैं। इसलिए गर्मी की छुट्टियों में बच्चों की ऊर्जा का सही इस्तेमाल करना जरूरी हो जाता है। यही वह समय है, जब आपके बच्चे की क्षमता का सही इस्तेमाल हो सकता है। अगर आप अपने बच्चे को हॉबी क्लासेज या समर कैंप ज्वाइन करवाते हैं तो आपका बच्चा बहुत कुछ नया सीख सकता है। इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसी हॉबी क्लास के बारे बताएँगे, जिनमें आपका बच्चा खेल खेल में बहुत कुछ सीख सकता है।

हॉबी क्लासेज

हॉबी बच्चों के मेंटल डेवलपमेंट और उनकी पर्सनालिटी को आकार देने में बहुत महत्वपूर्ण रोल निभाती है। हर बच्चे की कम से कम एक हॉबी होना बहुत जरूरी है। अगर आपके बच्चे की कोई हॉबी नहीं है तो आप उसे हॉबी चुनने और उसे सीखने में सहायता करें। आप अपने बच्चे को डांस, सिंगिंग, म्यूजिकल इंस्ट्रमेंट्स बजाना, पेंटिंग करना या राइटिंग में से किसी हॉबी अपनाने के लिए इंस्पायर कर सकती हैं। आइए जानते हैं कि कौन-सी हॉबी से, किस तरह के फायदे बच्चों को हो सकते हैं –

नृत्य (dance)  –  

डाँस बच्चों के लिए एक अच्छी हॉबी है। डाँस करने से बच्चों में पॉजिटिविटी बढ़ती है। उनमें कॉन्फिडेंस , डिसिप्लीन की फीलिंग डेवलप होती है। जिन बच्चों की डाँस में रुचि है, उन्हें चार-पांच साल की उम्र में डाँस क्लास ज्वाइन करा देना चाहिए, क्योंकि इस उम्र में शरीर बहुत लचीला होता है, इससे डाँस सीखने में आसानी होती है। अगर आपके बच्चे को डाँस में रुचि है, लेकिन अभी तक उसने इसे हॉबी के तौर पर नहीं अपनाया है तो आप उसे जल्दी से जल्दी अपने घर के पास स्थित किसी डाँस क्लास में भेजना शुरू करें।

डाँस क्लास ना सिर्फ़ आपके बच्चे को एक नई कला सीखने में मदद करेगा, बल्कि आपके बच्चे को स्वस्थ रखने में भी मदद करेगा। जी हाँ, डाँस अपने आप में एक बहुत ही बढ़िया व्यायाम है। आजकल बच्चों में मोटापा बहुत बढ़ रहा है, डाँस उन्हें शारीरिक रूप से फिट रखता है। डाँस शरीर और मस्तिष्क को सक्रिय रखता है। इससे हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। बड़े होकर कोरियोग्राफर, एक्टर, डाँसर के रूप में करियर बनाने में मदद मिलती सकती है।

गायन (singing)  – 

संगीत को एक बहुत उच्चकोटि की कला माना जाता है।

गायन के लिए सुर और ताल की समझ होना जरूरी है। इसके लिए रोज रियाज़ करना पड़ता है। यह रियाज़ किसी गुरु की देख-रेख में करना बहुत जरूरी है। अगर आपके बच्चे को सिंगिंग में रुचि है तो आप उसके लिए अच्छे गुरु की तलाश शुरू कर दें। जब आपका बच्चा सुर-ताल को समझने लगे, तब आप उसे स्कूल और फैमिली के फंक्शंस में परफॉर्म करने के लिए इंस्पायर करें, इससे उसका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और आगे चलकर उसे बड़े प्लेटफॉर्म पर भी परफॉर्म करने में आसानी होगी। गाना गाने से फेफड़ों को मज़बूती मिलती है और तनाव कम होता है।

लेखन (writing) – 

राइटिंग एक बेहतरीन हॉबी है। लिखते समय लेखक की कल्पना कहीं भी जा सकती है। आप यह बिल्कुल न सोचें कि लिखने के लिए आपके बच्चे की उम्र कम है। अगर आपके बच्चे को लिखने का शौक है तो उसे एक सुंदर सी डायरी खरीदकर दें और उसे इंस्पयार करें कि जो भी उसके मन में आए, उसे वैसा ही कागज पर उतार दे। बच्चे को कविता, कहानी इत्यादि लिखने के लिए प्रोत्साहित करें। आजकल राइटिंग की भी हॉबी क्लास होती है, वहाँ बच्चे को कविता, कहानी इत्यादि लिखना सिखाया जाता है।

चित्रकारी (painting) –

कई बच्चों को पेंटिंग करना पसंद होता है। अगर आपके बच्चे को भी पेंटिंग पसंद है तो उसे पेंटिंग करने के लिए प्रोत्साहित करें। बच्चे को प्रोत्साहित करें कि वो जो महसूस करता है, उसे कागज पर उतारे। बच्चे को स्केचिंग/पेंटिंग क्लास भी ज्वॉइन करवा सकते हो। पेंटिंग से रचनात्मकता बढ़ती है। निरंतर प्रयास करने से, धैर्य रखने का ये गुण विकसित होता है और चित्रकारी अच्छी होती जाती है।

खेल (games) – 

अगर आपके बच्चे को खेलना पसंद है तो उसे खेलने के लिए प्रोत्साहित करें। आज कल शहरों में लगभग हर खेल के लिए अलग अलग अकैडमी होती है। तो इन छुट्टियों में आप अपने बच्चे को किसी अकैडमी में भेज सकते हैं, जहाँ वो अपने पसंदीदा खेल के बारे में ठेक से जान पाएगा और उसे सीख पाएगा। अगर आपका बच्चा कोई खेल अच्छा खेलता है तो बड़ा होकर उसे अपना करियर भी बना सकता है।

  • हॉबी के हैं कई फायदे – 

– पढ़ाई के बाद बचे समय का सही इस्तेमाल कर पाओगे।

– बड़े होने पर करियर बनाने में मदद मिलेगी।

– एक्टिव रहोगे, दूसरे बच्चों से घुलोगे-मिलोगे, क्रिएटिविटी बढ़ेगी।

– यह आत्मविश्वास बढ़ाती है।

– हॉबी से रचनात्मकता बढ़ती है, कुछ नया जानने-करने की प्रेरणा मिलती है।

  • अभिभावकों के लिए सलाह – 

बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जिन बच्चों की कोई हॉबी नहीं होती, उनमें आत्मविश्वास की कमी होती है। माता-पिता को भी अपने बच्चों को कोई हॉबी विकसित करने में सहायता करनी चाहिए। बच्चा जिस भी चीज को मन से करे, उसे वह करने की प्रेरणा देनी चाहिए।

और माता-पिता का यह समझना भी बहुत जरूरी है कि बच्चे की रुचि और योग्यता किस तरफ है। बच्चों तक यह संदेशा पहुंचाना कि माता-पिता उनसे चाहते क्या है बहुत आवश्यक है। यह सब बातचीत व व्यवहार से संभव है। बच्चों को कहीं भी यह लगना नहीं चाहिए कि माता-पिता की इच्छाओं को उन पर थोपा जा रहा है। ऐसी स्थिति में बच्चे काम से जी चुराने लगेंगे या उनकी रचनात्मक कार्यो से उनकी रुचि समाप्त हो जाएगी।

आपकी जिम्मेदारी

अभिभावकों को यह समझना पड़ेगा कि बच्चे अपनी रुचि और मेहनत के बिना कुछ नहीं सीख पाएंगे। खाली समय या छुट्टियां ही ऐसा समय है जब बच्चे अपनी रचनात्मकता से कुछ सीख सकते है। माता-पिता का यह क‌र्त्तव्य है कि वे छुट्टियों में भी बच्चे को बहुत ज्यादा मनमानी न करने दें। अनुशासन बहुत जरूरी है। बच्चे के लिए कुछ नियम कायदे भी जरूर बनाएं ताकि वे सही रास्ते पर चलें।