जन्म से लेकर एक साल तक बच्चे में होने वाले बदलाव

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शिशु के जन्म की ख़ुशी जितनी होती है, उतनी ही ख़ुशी तब भी होती है जब जन्म के बाद शिशु कोई न कोई नई हरकत करता है। चाहे फिर शिशु बैठना शुरू करता है, या बैड पर पलटी मारना है, उसका मम्मा पापा बोलना हो, या उसके दाँत निकलने वाले हो, आदि। ऐसी बहुत सी हरकरते है जो शिशु जन्म के एक साल तक करता है। शिशु की हर नई हरकत घर के हर व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कराहट लाती है। साथ ही जन्म के पहले साल में शिशु बहुत सी नई चीजे करता भी है।

क्योंकि पहले तीन साल तक बच्चे का विकास बहुत तेजी से होता है। ऐसे में बच्चे के विकास के लिए आपको उसका अच्छे से ध्यान देना चाहिए, चाहे फिर वो उसका स्तनपान करना हो, या फिर उसकी भरपूर नींद, और अच्छे से मालिश करना, और उसके लिए अच्छे से साफ़ सफाई का ध्यान रखना आदि। क्या आप भी गर्भवती है या अभी अभी आपका शिशु हुआ है, तो यह टॉपिक आपको आपके शिशु की हरकतों के बारे में बताएगा जो की आपका शिशु जन्म से एक साल तक करता है।

जन्म से लेकर एक साल तक बच्चे में होने वाले बदलाव:-

पलटी मारने लगता है:-

जन्म से लेकर तीन साल तक बच्चे का विकास तेजी से होता है ऐसे में आप अपने बच्चे में हर दिन कोई न कोई नया बदलाव देखते है। शुरुआत में जैसे बच्चे दो से तीन महीने का होता है तो वो अपने आप पलटी मारना शुरू कर देता है। कई बच्चे तो और भी पहले इसे कर लेते है, ऐसे मैं आपको बच्चे के चारों और सिरहाने रखने चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से बच्चे के गिरने का डर भी लगा रहता है।

crawling यानी बच्चा पैरों के भार रिडने लग जाता है:-

तीन से चार महीने के बच्चे पैरों के भर रिडने लग जाते है। कई बच्चे शुरुआत में पैरों के भार नहीं बल्कि पेट के भार रिडने की कोशिश करते है। लेकिन बाद में पैरों के भार रिडने लग जाते है, जिन बच्चों का वजन ज्यादा होता है वो थोड़ा लेट भी कर सकते है क्योंकि उन्हें पैरों के भार रिडने में परेशानी होती है।

बैठने लगता है:-

चार से पांच महीने के बच्चे बैठने भी लग जाते है, कई बार बच्चे छह महीने में भी बैठने लगते है। जब बच्चा बैठने लगता है, तो आप उसके हाथ में खिलौने दे सकते है जिससे बच्चा खुद खेलने की कोशिश करता है। और ऐसे में आप बच्चे को और एक्टिव करने के लिए खिलौने अपने आप रखकर अपने पास बुला सकते है। इससे बच्चे खुश भी होते है साथ ही उनके एक्टिव बनाने में भी मदद मिलती है।

खाना शुरू करते है:-

छह महीने के बाद शिशु को आप ठोस आहार दे सकते है, ऐसे में जब आप शिशु के हाथ में बिस्कुट आदि देते है तो शिशु इसे खाने की कोशिश करता है। लेकिन आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए आप उसे सॉफ्ट और ऐसी चीज दे जो की उसके गले में न फंसे। साथ ही शिशु इस समय दाल का पानी, खिचड़ी आदि भी खाने के लिए दे सकते है।

दाँत निकलते है:-

ज्यादातर बच्चों के पांच से छह महीने के बीच दाँत निकलने शुरू हो जाते है। इस दौरान बच्चे काफी परेशान हो जाते है, साथ ही बच्चे को उल्टी दस्त जैसी परेशानी का सामना भी करना पड़ता है। कई बच्चों को इससे थोड़ी लेट भी दाँत निकलते है, ऐसे में परेशान होने की बात नहीं होती है। साथ ही बच्चों को दाँत निकलने से होने वाली परेशानी से बचाने के लिए साफा सफाई, और उसके आहार का खास ध्यान रखना चाहिए, ताकि उसके विकास में कोई कमी न आ सके।

चलने लगते है:-

बच्चे के नन्हे कदम जब आगे बढ़ने लगते है तो माँ बाप के लिए बहुत ही खुशी का लम्हा होता है। ऐसे में हर कोई उनके आगे बाहें फैलाकर उसे अपनी तरफ बुलाते है। लेकिन ऐसा भी जरुरी नहीं है की बच्चे एक साल के होने से पहले चलने लग जाते है कुछ बच्चे थोड़ा लेट भी चलने लगते है। ऐसा उन बच्चों के साथ होता है जो की शारीरिक रूप से कमजोर हो या बहुत ज्यादा वजन वाले होते है। बाकी बच्चे एक साल के अंदर ही चलना शुरू कर देते है।

तुतलाकर बोलने लगते है:-

तोतली आवाज़ में बोलते हुए बच्चे हर किसी को अपनी और आकर्षित करते है। और सभी बच्चे एक साल के अंदर मम्मा और पापा बोलना शुरू कर देते है, कुछ बच्चे और भी छोटे छोटे शब्द बोलने लग जाते है। लेकिन पूरी तरह से बोलना बच्चे धीरे धीरे सीख जाते है। ऐसे में आपको बच्चों के साथ बातें करनी चाहिए ताकि वो जल्दी बोलने लग जाए।

समझने लगते है:-

बच्चे आपकी बातों को भी थोड़ा थोड़ा समझने लगते है जैसे की आप लोगो की उसे पहचान हो जाती है, यदि वो कुछ चाहते है और आप उन्हें नहीं देते है तो वो रोना शुरू कर देते है। इसके अलावा आप उनसे कुछ कहते है तो वो आपसे बातें करने की कोशिश करते है। आपको जवाब देने की कोशिश करते है।

तो ये है कुछ हरकते जो शिशु जन्म के एक साल तक करता है। ऐसे में आपको इस बात का ध्यान भी रखना चाहिए की शिशु के अच्छे से विकास के लिए उसे भरपूर आहार मिलें, जिससे उसके विकास में कोई कमी न आए। और ऐसा भी जरुरी नहीं होता है की हर एक शिशु में एक जैसा परिवर्तन आता है हो सकता है कोई हरकत बच्चा पहले तो कोई बच्चा बाद में करता है।

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