जितिया 2018 : कब है जितिया और क्या है जितिया पर्व का महत्व जानिए

0

Jivitputrika (Sanskrit: जीवित्पुत्रिका) (Hindi: जिउतिया , Jiutiya) (Nepaliजितिया , Jitiya) : जीवित्पुत्रिका व्रत तिथि, जितिया तिथि 2018 Jivitputrika Vrat, Jitiya Vrat Date, Jitiya Vrat Vidhi, Jitiya Puja Vidhi, Tips for Jitiya Festival 2018, When is Jitiya जानिए जितिया की तारीख कब है जितिया 2018 में, जितिया की मान्यता और पूजा विधि हिंदी में


जितिया को जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहते हैं  माँ अपने संतान की लम्बी आयु के लिए ये व्रत करती है।  इस पर्व को अधिकतर भारत के पूर्वी हिस्सों और उत्तर के कुछ हिस्सों में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन निर्जला उपवास किया जाता है। यहाँ तक की पानी तक का भी सेवन नहीं किया जाता है। बोलचाल की भाषा में भी भी जितिया का महत्व बताया गया है। जब कोई इंसान किसी दिक्कत से किसी दुर्घटना से बचता है तो लोग कहते हैं “तुम्हारी माँ तुम्हारे लिए खर जितिया की होगी ” यहाँ खर का मतलब है बिना जल के।

आइये जानते हैं कब है जितिया व्रत (जीवित्पुत्रिका व्रत)

कब है जितिया पर्व 2018 (जीवित्पुत्रिका व्रत)

वर्ष 2018 में जीवित्पुत्रिका व्रत 2 अक्टूबर 2018, मंगलवार को है ।

जितिया पर्व का मुख्य दिन अष्टमी का दिन होता है। जिस दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। इससे एक दिन पहले यानी सप्तमी तिथि को नहाय खाय होता है। जबकि अष्टमी के अगले दिन नवमी तिथि को जितिया व्रत का पारण किया जाता है।


जितिया 2018 : जितिया पर्व करने की विधि

व्रत का पहला दिन

जितिया व्रत के पहले दिन को नहाई खाई कहा जाता है, इस दिन महिलाएं प्रातःकाल जल्दी जागकर पूजा पाठ करती है। और एक बार भोजन करती है। उसके बाद महिलाएं दिन भर कुछ भी नहीं खातीं।

जितिया व्रत का दूसरा दिन

व्रत के दूसरे दिन को खर जितिया कहा जाता है। यह जितिया व्रत का मुख्य दिन होता है। इस पुरे दिन महिलाएं जल ग्रहण नहीं करती। और पुरे दिन निर्जला उपवास रखती है।

व्रत का तीसरा दिन

यह व्रत का आखिरी दिन होता है। इस दिन व्रत का पारण किया जाता है। वैसे तो इस दिन सभी खाया जाता है लेकिन मुख्य रूप से झोर भात, नोनी का साग, मड़ुआ की रोटी और मरुवा का रोटी सबसे पहले भोजन के रूप में ली जाती है।

जितिया व्रत कब होता है कौन से तिथि में ?

जितिया आश्विन माह की कृष्ण अष्टमी को प्रदोषकाल में महिलाएं जीमूतवाहन की पूजा करती है। माना जाता है जो महिलाएं जीमूतवाहन की पुरे श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करती है उनके पुत्र को लंबी आयु व् सभी सुखो की प्राप्ति होती है। पूजन के लिए जीमूतवाहन की कुशा से निर्मित प्रतिमा को धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि अर्पित किया जाता है और फिर पूजा करती है। इसके साथ ही मिट्टी तथा गाय के गोबर से चील व सियारिन की प्रतिमा बनाई जाती है। जिसके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया जाता है। पूजन समाप्त होने के बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनी जाती है। पुत्र की लंबी आयु, आरोग्य तथा कल्याण की कामना से स्त्रियां इस व्रत को करती है। कहते है जो महिलाएं पुरे विधि-विधान से निष्ठापूर्वक कथा सुनकर ब्राह्माण को दान-दक्षिणा देती है, उन्हें पुत्र सुख व उनकी समृद्धि प्राप्त होती है।

जितिया पर्व की कथा

इस पर्व से एक विशेष कथा जुडी हुई है जिसके मुताबिक एक बार एक जंगले में चील और लोमड़ी घूम रहे थे। वहीं कुछ लोग इस व्रत और कथा के बारे में बातें कर रहे थे। चील ने सभी की बातों को बहुत ध्यान से सुना जबकि लोमड़ी चुप-चाप वहां से चली गई। जबकि चील में इस व्रत को ध्यान दे सुना और पूरी श्रद्धा से रखा। जिसके फलस्वरूप उसकी संताने सही सलामत रहीं जबकि लोमड़ी की एक भी संतान जीवित नहीं बची।

क्या क्या नियम किया जाता है जितिया व्रत में ?

  • जितिया व्रत को करते समय केवल सूर्योदय से पहले ही खाया पिया जाता है। सूर्योदय के बाद आपको कुछ भी खाने-पीने की सख्त मनाही होती है।
  • इस व्रत से पहले केवल मीठा भोजन ही किया जाता है तीखा भोजन करना अच्छा नहीं होता।
  • जितिया व्रत में कुछ भी खाया या पिया नहीं जाता। इसलिए यह निर्जला व्रत होता है। व्रत का पारण अगले दिन प्रातःकाल किया जाता है जिसके बाद आप कैसा भी भोजन कर सकते है।

जितिया व्रत ज्यादातर पूर्वोत्तर भारत में किया जाता है।  बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में ये व्रत किया जाता है। नेपाल में भी इस व्रत को किया जाता है।

[Total: 4    Average: 2.5/5]