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Kaila Devi Temple Karauli, कैला देवी मंदिर करौली

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कैला देवी मंदिर एक हिन्दू मंदिर है जो कैला देवी को समर्पित है। ये मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के करौली जिले के कैला देवी गांव में स्थित है। इस मंदिर के निकट निम्न शहर मौजूद है जिनमे करौली (23km), गंगापुर शहर (34km), हिंडौन शहर (58km) सम्मिलित है। ये मंदिर कालीसिल नदी के तट पर स्थित है, जो अरावली पहाड़ी में बनास नदी की सहायक नदी है। कहा जाता है की इस मंदिर में डकैत भी आकर माँ काली की साधना करते है। कैला देवी मंदिर एक प्राचीन मंदिर है। कैला देवी मंदिर में चांदी की चौकी पर स्वर्ण छतरियों के नीचे दो प्रतिमाएं हैं। इनमें बाईं ओर वाली मूर्ति का मुख कुछ टेढ़ा है, वो ही कैला मइया है। दाहिनी ओर की प्रतिमा माता चामुंडा देवी की है। कैला देवी की आठ भुजाएं हैं। इस मंदिर को उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

इतिहास :

ये मंदिर यहाँ की संरक्षक देवी, देवी कैला देवी को समर्पित है। कैला देवी करौली राज्य के जादोन राजपूत शासकों के साम्राज्य की रक्षक थी। ये एक संगमरमर संरचना है जिसमे एक चेकर फर्श वाल विशाल आँगन है। मंदिर परिसर में एक स्थान है जहां कई सारे लाला झंडे है जिन्हे भक्तो द्वारा लगाया गया है।

Kaila Devi Temple 5कैला देवी मंदिर में मौजूद लाल झंडे भक्तो द्वारा रखे गए है। भक्त एक वर्ष के प्रत्येक दिन कैला देवी मंदिर में आते है और इन झंडो के साथ भोग अर्पित करते है। मंदिर में भगत जी द्वारा किया जाने वाला जागरण हर रात 09:00 PM IST आयोजित किया जाता है जो यहाँ का सबसे प्रमुख आकर्षण है। चैत्र के महीने में भक्त राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और देश के अन्य क्षेत्र से इस मंदिर में चल कर आते है और माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करते है। त्रिकूट पहाड़ियों की तलहटी में स्थित इस मंदिर का निर्माण राजा भोमपाल ने 1600 ई. में करवाया था। इस मंदिर से जुड़ी अनेक कथाएं यहाँ प्रचलित है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण के पिता वासुदेव और देवकी की जिस कन्या योगमाया का वध कंस ने करना चाहा था, वह योगमाया कैला देवी के रूप में इस मंदिर में विराजमान है।
अन्य मान्यता के अनुसार पुरातन काल में त्रिकूट पर्वत के आसपास का क्षेत्र घने वन से घिरा हुआ था। इस इलाके में नरकासुर नामक एक राक्षस रहता था। नरकासुर का आतंक आस पास के क्षेत्रों में बढ़ता ही जा रहा था। उसके अत्याचारों और दुष्कर्मो से आम जनता दु:खी थी। उसके अत्याचारों के अति होने पर यहाँ की निवासियों में माँ दुर्गा की पूजा की और उन्हें यहाँ अवतरित होकर उनकी रक्षा करने की प्रार्थना की। कहा जाता है कि आम जनता के दुःख निवारण हेतु माँ कैला देवी इस स्थान पर अवतरित हुई और नरकासुर का वध कर अपने भक्तों को उससे भयमुक्त किया। तभी से भक्तगण उन्हें माँ दुर्गा का अवतार मानकर उनकी पूजा करते है। कैला देवी का मंदिर सफ़ेद संगमरमर और लाल पत्थरों से निर्मित है, जो वास्तुकला शैली का बेमिसाल उदाहरण है।

मेला :

कैला देवी का वार्षिक मेला चैत्र (मार्च-अप्रैल) के महीने में कैला देवी गांव में आयोजित किया जाता है। मंदिर परिसर में एक छोटा मंदिर है जो भैरों को समर्पित है, ये मंदिर आँगन में स्थित है जिसका मुख लांगुरिया मंदिर के ठीक सामने स्थित है। चैत्र के महीने में लगे जाने वाले मेले के दौरान उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान से लगभग 2000000 भक्त इस मंदिर में दर्शन करने आते है। यहाँ मनाई जाने वाली कनक-दण्डौती की रस्म माँ के कट्टर भक्तो द्वारा निभाई जाती है। ये भक्त मंदिर से 15km से 20km की दुरी पैदल नहीं अपितु लेट कर तय करते है। इस दौरान वे अपने हाथो की मदद से एक लकीर बनाते है और फिर खड़े होकर इस लकीर के आगे लेट क्र रक अन्य लकीर बनाते है। इस प्रक्रिया को तब तक दोहराया जाता है जब तक वे मंदिर तक नहीं पहुंच जाते।

Kaila Devi Temple 6स्थान :

कैला देवी के निकट गंगापुर शहर पश्चिमी रेलवे का सबसे निकट मुख्य रेलवे स्टेशन है। इसके अलावा हिंडौन और महावीर जी इस स्थल के छोटे स्टेशन है। इस स्थल तक करौली, हिंडौन शहर, गंगापुर शहर और श्री महावीर जी से अच्छी तरह निर्मित रोड मार्गो द्वारा आसानी से पंहुचा जा सकता है। मेले के दौरान, राज्य परिवहन निगम कई निजी बस सेवाएं और अन्य वाहन आने वाले भक्तो के लिए उपलब्ध करवाता है।

कटारे हिन्दुओ के सबसे सम्मानित समुदाय है। ये भगवन राम के गुरु महर्षि वशिष्ठ के वंशज है। कैला देवी को इनकी कुल देवी के रूप में सम्मानित किया जाता है। उत्तर भारत और पकिस्तान में पाये जाने वाले गुप्ता, माथुर, वैश्य कैला देवी को अपनी कुलदेवी मानते है।

Kaila Devi Temple 3इस मंदिर में दो प्रतिमाएं है एक कैला देवी की और दूसरी चामुंडा देवी की जो एक दूसरे के साथ बैठी है। इनमे से बड़ी प्रतिमा देवी कैला की है जिनकी प्रतिमा का सर थोड़ा सा झुक हुआ है। नवरात्र के दौरान इस मंदिर में अने वाले भक्तो का ताँता लगा रहता है।
माना जाता है मंदिर में स्थापित मूर्ति पूर्व में नगरकोट में स्थापित थी। विधर्मी शासकों के मूर्ति तोड़ो अभियान से आशंकित उस मंदिर के पुजारी योगिराज, मूर्ति को मुकुंददास खींची के यहां ले आए थे। केदार गिरि बाबा की गुफा के निकट रात्रि हो जाने से उन्होंने मूर्ति बैलगाड़ी से उतारकर नीचे रख दिया और बाबा से मिलने चले गए। दूसरे दिन सुबह जब योगिराज ने मूर्ति उठाने की चेष्टा की तो वह उस मूर्ति हिला भी नहीं सके। इसे माता भगवती की इच्छा मानकर योगिराज ने मूर्ति को उसी स्थान पर स्थापित कर दिया और मूर्ति की सेवा करने की जिम्मेदारी बाबा केदारगिरी को सौंप कर वापस नगरकोट चले गए।
माता कैला देवी का एक भक्त दर्शन करने के बाद यह बोलते हुए मंदिर से बाहर गया था कि मैं जल्दी ही लौटकर वापस आउंगा। और वह आज तक नहीं आया है। माना जाता है कि माँ आज भी उस भक्त का इंतजार कर रही है और उसी दिशा में देख रही है जिस दिशा में वो गया था।

इस मंदिर के पीछे महाराजा का महल स्थित है। बड़े उत्सव और प्रत्येक अष्टमी पर महाराजा श्री कृष्ण चन्द्र पाल और उनका परिवार इस मंदिर में आते है और ठहरने के लिए इस महल का प्रयोग करते है।

Kaila Devi Temple 2पहुंच :

वायु मार्ग :- कैला देवी के के सबसे निकटतम जयपुर एयरपोर्ट है जो मंदिर से 170km की दुरी पर स्थित है।

रेल मार्ग :- कैला देवी दिल्ली-बॉम्बे मार्ग की पश्चिमी मध्य रेलवे लाइन के निकट स्थित है। कैलादेवी तक गंगापुर शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन से द्वारा आसानी से पंहुचा जा सकता है जहां देश के कई विभिन्न भागो से कई ट्रेनों की सुविधा उपलब्ध है।

रोड़ मार्ग :- ये स्थान कई प्रमुख शहरों और क्षेत्रों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। RSRTC जयपुर और दिल्ली के लिए रोडवेज बसे संचालित करवाती है। हिंडौन शहर बस स्टैंड, करौली और गंगापुर शहर से पुरे दिन दैनिक बसे उपलब्ध रहती है। RSRTC जयपुर के लिए गांधी रथ बसे भी संचालित करवाती है। इस स्थान की विभिन्न शहरों से दुरी निम्न है : हिंडौन शहर (53 km), जयपुर (170 km), भरतपुर (90 km), मथुरा (220 km), आगरा (225 km), दिल्ली (325 km), गंगापुर शहर (34 km) और करौली (23 km)।

Kaila Devi Temple 1केदार नाथ गुफा और मंदिर :

इस स्थान पर कैला देवी का मूल मंदिर है। इस स्थान को रणथंभौर के जंगली जानवरों से खतरा होने के कारण असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। ये कसबे से 3km की दुरी पर स्थित है। भक्त यह माँ से प्रार्थना करने पैदल चल कर आते है।

नक्काश की देवी- गोमती धाम :

नक्काश की देवी व् गोमती धाम हिंडौन शहर का दिल मंदिर है। नक्काश की देवी मंदिर में दुर्गा माँ प्राथमिक देवी है जैसे कैला देवी मंदिर में कैला देवी है। ये मंदिर शहर से 53km की दुरी पर स्थित है।

श्री महावीर जी मंदिर :

ये एक प्रसिद्ध जैन मंदिर है जो शहर से 45km की दूरी पर स्थित है।

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर :

ये मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है जो यहां से लगभग 95km की दूरी पर स्थित है।

बर्बासिन मंदिर :

ये बर्बासिन देवी मंदिर है जो शहर से 13km कि दूरी पर स्थित है। ये मंदिर कालीसिल नदी के किनारे स्थित है।
Title : Kaila Devi Temple Karauli