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Kanchi Kailasanathar Temple, कांची कैलाशनाथार मंदिर कांचीपुरम

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कांची कैलाशनाथार मंदिर व् कैलाशनाथ मंदिर कांचीपुरम की सबसे पुरानी संरचना है, जो भारत के तमिलनाडु में स्थित है। ये एक हिन्दू मंदिर है जिसका निर्माण द्रविड़ वास्तुकला शैली के अनुसार किया गया है। ये मंदिर भगवान् शिव को समर्पित है और अपनी ऐतिहासिक महत्वता के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर का निर्माण 685-705AD के दौरान पल्लव साम्राज्य के राजसिंह शासकों ने करवाया था। बलुआ पत्थर से बने बाड़े में कई सारी नक्काशियां की गयी है जिनमे से ज्यादातर आधे-पशु देवताओ की है जो द्रविड़ वास्तुकला अवधि के दौरान बहुत मशहूर थी। इनका निर्माण आलो में परिसर की ऊंची दीवार के घुमावदार मार्ग पर किया गया है। ये मंदिर शहर के सबसे प्रमुख पर्यटक आकर्षणों में से एक है।

इतिहास :

कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण शिव, विष्णु, देवी, सूर्य, गणपति और कार्तिके की हिन्दू धर्म में समर्थ पूजा के परंपरा में किया गया था, ये एक अभ्यास था जिसे बौद्ध धर्म के स्थान पर बनाया गया था।

Kanchi Kailasanathar Temple 1मंदिर का निर्माण पल्लव साम्राज्य ने करवाया था, जिन्होंने कांचीपुरम को अपनी राजधानी बनाकर अपना साम्राज्य स्थापित किया था। इस शहर को हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र माने जाने वाले सात शहरों में एक माना जाता है। एक अंतराल आया जब चालुक्य शासकों में पल्लवो को परास्त कर कांचीपुरम पर कब्ज़ा कर लिया था। हालाँकि इसके पश्चात पल्लवो ने अपने क्षेत्र पर पुनः कब्ज़ा कर लिया और अपने राजधानी शहर का विस्तार करना प्रारंभ कर दिया। उस दौरान उन्होंने महान भव्यता वाले कई मंदिरों का निर्माण भी करवाया। कैलाशनाथ मंदिर उस अवधि का एकमात्र ऐसा मंदिर है जो वर्तमान में मौजूद है।

Kanchi Kailasanathar Temple4इस मंदिर का निर्माण 685-705AD के दौरान हुआ था। ये दक्षिण भारत की पहली संरचना थी जिसका निर्माण नरसिंहवरम II (राजसिंह) में करवाया था, इन्हे राजसिंह पल्लवेस्वरम भी कहा जाता है। इनके पुत्र, महेंद्रवर्मन् III ने मंदिर के मुख और गोपुरम (टावर) का निर्माण करवाया था। पूर्व मंदिरों का निर्माण महाबलीपुरम में पाये जाने वाले मदिरो की तरह या तो लकड़ी से किया गया था या गुफयो बके पत्थरो को खोदकर किया जाता था। कैलाशनाथार मंदिर दक्षिण भारत के अन्य मंदिरों के लिए एक प्रवृति सेटर बन गया था। स्थानीय मान्यतायों के मुताबिक, युद्ध के दौरान शासकों के लिए एक सुरक्षित शरणस्थान था। राजाओं ने इस मंदिर में एक ख़ुफ़िया गुफा का निर्माण करवाया था जिसका प्रयोग आक्रमण के दौरान बचने के लिए किया जा सके। इस गुफा को आज ही देखा जा सकता है।

इस मंदिर को एक अन्य नाम Kachipettu Periya Thirukatrali (जिसका अर्थ है कांचीपुरम (पूर्व में Kachipettu) का पत्थर से बना मंदिर) के नाम से भी जाना जाता था जब चोला साम्राज्य के राजराजा चोला I इस मंदिर में दौरा करने आये थे। इस मंदिर की वास्तुकला से प्रसन्न होकर उन्होंने थंजावुर में बृहदीश्वरार मंदिर का निर्माण करवाया था। कुछ समय पूर्व, कांची कैलाशनाथ मंदिर की देखभाल की जिम्मेदारी भारत पुरातत्व सर्वेक्षण को सौपी गयी थी।

Kanchi Kailasanathar Temple3वास्तुकला :

इस मंदिर ने चोला साम्राज्य और विजयनगर साम्राज्य द्वारा किये गए बदलावों के प्रभाव से पल्लव वास्तुकला को इसकी मूल शैलियों में बरकरार रखा है। इस मंदिर का निर्माण पत्थरो से किया गया है जबकि महाबलीपुरम में पवित्र गुफाओं की चट्टानों को काटकर मंदिर का निर्माण किया जाता है। मंदिर का ऊंचा गोपुरम इसके बायीं ओर है जबकि मंदिर परिसर दाई ओर है। मंदिर की नीव का निर्माण ग्रेनाइट से किया गया है जो मंदिर की विशाल संरचना का भार सहन कर सकती है। इस मंदिर की संरचना में बलुआ पत्थर की नक्काशियां मौजूद है। प्रारंभ में इस मंदिर में केवल एक मुख्य कक्ष था।
मंदिर परिसर में सभी विषयों में पूर्ण है जैसे इसमें गर्भगृह, अंतराल (भीतरी बाड़ा), मंडप, एक ऊंची परिसर दीवार और एक प्रवेश द्वार जिसे गोपुरम भी कहते है समिल्लित है। शुरआत में मंडप को मंदिर से लग कर दिया गया था, जिसे अब अर्धमंडप के द्वारा मुख्य मंदिर का एक हिस्सा बना दिया गया है। मंडप के स्तंभों में पौराणिक सिंह पर्वतो की दोहराव विशेषता है।

Kanchi Kailasanathar Temple5इस संरचना की योजना बहुत ही सरल तरीके से बनायीं गई थी जिसके मुताबिक परिसर के केंद्र में एक शिखर का निर्माण किया गया था। मंदिर के शिखर का निर्माण मुख्य स्थान (गर्भ गृह) के ऊपर किया गया है जो एक वर्गाकार संरचना है और एक पिरामिड के आकार में बढ़ता जाता है। इस शिखर के शीर्ष पर एक छोटी सी छत है जिसका आकार गुबंद जैसा है। मंदिर के स्तंभों में पौराणिक जानवरों (आधार पर शेर) की आकृतिया है जिनका निर्माण पल्लव शैली के अनुसार किया गया है। प्रवेश द्वार पर, गोपुरम को प्लास्टर किया गया है। परिसर की प्रवेश दीवार में आठ छोटे छोटे मंदिर और एक गोपुर है, जो मुख्य गोपुर का अग्रदूत है। मंदिर के मंडप को एक मध्यवर्ती कक्ष से जोड़ दिया गया है जिसे अर्धमंडप कहा जाता है। मंदिर को चारो ओर से एक दीवार ने घेर रखा है जो एक आयातकार योजना थी।

Kanchi Kailasanathar Temple6मुख्य मंदिर में 16 पक्षीय शिवलिंग है जिसका निर्माण काले ग्रेनाइट से किया गया है और गर्भगृह में स्थापित किया गया है। मुख्य मंदिर की दीवारों के भीतर मुख्य मूर्तितल है जिसपर बहुत ही सुन्दर ढंग से देवो, नंदी बैल की मूर्तियों की नक्काशी की गयी है। मुख्य मंदिर की बाहरी दीवार के प्रत्येक पक्ष पर देवी और देवताओं की मूर्तियों की नक्काशी की गयी है। दखिन की ओर मुख वाली दीवार पर शिव जी की उमामहेश्वर की विष्णु जी के वाराह अवतार की मूर्तिकला की गयी है जिसको ब्रह्मा और विष्णु ने घेरा हुआ है और जिसके निचले स्तर पर आमरस उड़ रहा है। पश्चिम की ओर मुख वाली दीवार पर शिव जी की संध्या तांडवमूर्ति और उरधावा तांडवमूर्ति की मूर्तिकला की गयी है। जिनके साथ नाचने वाली मुद्रा में गणो, ब्रह्मा, विष्णु, नंदी और पार्वती की मूर्तियों की नक्काशी की गयी है।
मंदिर की प्रवेश दीवार पर आठ छोटे मंदिर है जो उसे अलंकृत करते है। मंदिर परिसर की दीवार पर 58 मंदिर है जिनपर शिव के सोमस्कंद और उनकी पत्नी देवी पार्वती की नृत्य मुद्राओं की मुर्तिया है।
Title : Kanchi Kailasanathar Temple