Ultimate magazine theme for WordPress.

Karni Mata Temple Bikaner, करणी माता मंदिर बीकानेर

0

करणी माता मंदिर एक प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है जो करणी माता को समर्पित है। ये मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के बीकानेर शहर से 30km दूर देशनोक में स्थित है। इस मंदिर को चूहों का मंदिर भी कहा जाता है।

यदि हमारे घर में हम एक भी चूहा देख लेले है तो परेशां हो उठते है। हम उसको अपने घर से भगाने के हर संभव प्रयास करते है क्योकि चूहों को प्लेग जैसी कई खतरनाक बीमारियों का कारण माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते है की भारत में माता का एक ऐसा मंदिर भी है जहाँ पर 20000 जीवित चूहे रहते है और मंदिर में आने वालो भक्तो को चूहों का झूठा किया हुआ प्रसाद दिया जाता है। इन पवित्र चूहों को काबा भी कहा जाता है और देश के कई क्षेत्रों से भक्त इस मंदिर में इनके दर्शन करने आते है। आश्चर्यजनक बात यह है की इतने चूहे होने के बाद भी मंदिर में बिल्कुल भी बदबू नहीं आती, और आज तक इनसे कोई भी बीमारी नहीं फैली है यहाँ तक की चूहों का झूठा प्रसाद खाने से भी कोई भक्त बीमार नहीं हुआ। आज से कुछ दशको पूर्व जिस दौरान पुरे भारत में प्लेग फैला था उस दौरान भी इस मंदिर में भक्तो का मेला लगा रहता था और वो चूहों का झूठा किया हुआ प्रसाद ही खाते थे। इस मंदिर की इष्ट देव यानि करणी मात को चूहों वाली माता, चूहों वाला मंदिर और मूषक मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

कथा :

कहा जाता है की करणी माता के सौतेले पुत्र (उनकी बहन गुलाब और उनके पति का पुत्र), लक्ष्मण, कोलायत में स्थित कपिल सरोवर में पानी पीने के लिए गया था लेकिन प्रयास के दौरान वे सरोवर में डूब गया। जब इस घटना की खबर करणी माता को लगी तो उन्होंने यम, मृत्यु के देवता से प्रार्थना की और उनके पुत्र को पुनर्जीवित करने के लिए कहा। सबसे पहले तो यम जी ने उनकी बात पर इंकार कर दिया परन्तु फिर बाद में वे मान गए, और लक्ष्मण और करणी माता के सभी पुत्रों को चूहों न अवतार ग्रहण करने की अनुमति प्रदान कर दी। कुछ स्थानीय लोककथाओं के अनुसार मंदिर में मौजूद चूहों की कहानी भिन्न है। इस संस्करण के मुताबिक, 20000 सैनिकों की एक सशक्त सेना ने पास में हो रहे एक युद्ध को छोड़ कर देशनोक की ओर भाग आये थे। करणी माता ने उनके पापो जे लिए उन्हें मृत्यु दण्ड न देकर उन्हें मुश्को में परिवर्तित कर दिया और हमेशा हमशा के लिए उन्हें अपनी सेवा में रख लिया।

वास्तुकला :

करणी माता बीकानेर की राजघराने की कुलदेवी है। वर्तमान मंदिर संरचना का निर्माण 20 वीं शताब्दी में बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने मुग़ल शैली के अनुसार करवाया था। मंदिर के फ्रंट में एक खूबसूरत संगमरमर का मुख है जिसमे ठोस चांदी के द्वार है जिसका निर्माण महाराजा गंगा सिंह जी ने करवाया था। इस मंदिर में संगमरमर के मुख्य द्वार पर की गई उत्कृष्ट कारीगरी, मुख्य द्वार पर लगे चांदी के बड़े बड़े किवाड़, माता के सोने के छत्र और चूहों के प्रसाद के लिए रखी चांदी की बहुत बड़ी परात भी मुख्य आकर्षण है। ऐसा माना जाता है की उनके ही आशीर्वाद से बीकानेर और जोधपुर रियासत की स्थापना हुई थी। मंदिर के भीतरी गर्भगृह में देवी की अलौकिक मूर्ति है। सं 1999 में हैदराबाद के करणी सुनार कुंदनलाल वर्मा ने इस मंदिर में कुछ संरचनाएं बनवाई। मंदिर के चांदी द्वार और संगमरमर की नक्काशी उन्ही के द्वारा दान की गयी थी।

सफ़ेद चूहे :

कई हज़ार चूहों में कुछ कुछ सफ़ेद भी है, जिन्हे सबसे जयदा पवित्र माना जाता है। इन्हे करणी माता के अभिव्यक्ति और उनके चार पुत्र माना जाता है। यदि हम चूहों की बात करे तो मंदिर के अंदर चूहों का एक छत्र राज है। मंदिर के प्रवेश करते ही हर स्थान पर चूहे ही चूहे नज़र आते है। चूहों की अधिकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की मंदिर के अंदर रखी मुख्य प्रतिमा तक पहुंचने के लिए आपको अपने पैर घसीटते हुए जाना पड़ता है। क्योकि यदि आप पैर उठाकर चलते है तो उसके नीचे आकर चूहे घायल हो सकते है जिसे अशुभ माना जाता है। इस मंदिर में करीब बीस हज़ार काले चूहों है जिनमे कुछ सफ़ेद चूहे भी है। मान्यता है की यदि आपको मंदिर परिसर में सफ़ेद चूहा दिखाई दे गया तो आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी।

इस मंदिरो के चूहों की एक विशेषता है की मंदिर में सुबह 5 बजे होने वाली मंगला आरती और शाम को 7 बजे होने वाली संध्या आरती के वक़्त अधिकांश चूहे अपने बिलो से बाहर आ जाते है। इन दो वक़्त चूहों का सबसे ज्यादा उधम देखने को मिलता है। माँ को चढ़ाये जाने वाले प्रसाद को पहले चूहे खाते है फिर उसे भक्तो में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। चील, गिद्ध और दूसरे जानवरो से इन चूहों की रक्षा के लिए मंदिर में खुले स्थानो पर बारीक जालिया लगायी गयी है।
मंदिर के पट प्रातः 4:00 बजे खोल दिए जाते है जिसके पश्चात मंगला आरती की जाती है । मंगला आरती समाप्त होने के पश्चात माँ को भोग चढ़ाया जाता है जिसे बाद में चूहों को अर्पित कर भक्तो में वितरित कर दिया जाता है।


Title : Karni Mata Temple Bikaner