करवाचौथ करने की विधि और टिप्स क्या हैं

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हिन्दू धर्म में हर एक त्यौहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है, ऐसे ही हर एक व्रत की भी बहुत मान्यता होती है। आज हम ऐसे ही व्रत के बारे में बात करने जा रहे है जिसे करवाचौथ कहा जाता है। हर साल यह व्रत कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के चौथे दिन आता है। इस दिन को पत्नी और पत्नी के प्रेम का प्रतीक भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन महिलाएं पूरा दिन निर्जला उपवास रखती है, और अन्न का भी सेवन नहीं करती है, और यह सब वो अपने पति की लम्बी उम्र के लिए करती हैं। साथ ही रात को चन्द्रमा को अर्क देने के बाद इस व्रत को महिलाएं खोलती है।

इस दिन महिलाएं पूरे सोलह श्रृंगार करती हैं, और इस दिन की तैयारी की शुरुआत बहुत दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। तभी करवाचौथ आने से पहले बाज़ारों में खूब रौनक देखने को मिलती है। क्योंकि हर महिला को इस दिन सबसे सूंदर दिखने की चाह भी होती है। इस दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सरगी करती है, जिसमे वो कुछ खाना खा सकती है और जितना पानी पीना चाहती है पी सकती है। उसके बाद अच्छे से तैयार होकर शाम को महिलाएं कथा सुनने के लिए जाती हैं। इसके अलावा और भी बहुत सी चीजें करवाचौथ के इस दिन को खास बनाती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं करवाचौथ से जुडी कुछ महतवपूर्ण बातें।

करवाचौथ 2018

इस साल  2018 में करवाचौथ 28 अक्टूबर दिन रविवार को है।

करवाचौथ का महत्व

करवाचौथ व्रत का महत्व सुहागन स्त्रियों के लिए बहुत अधिक होता है, क्योंकि इस व्रत को शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र की कामना के लिए करती है। आपने सावित्री की कहानी तो सुनी ही होगी की वो किस तरह अपने पति के प्राण यमराज से छीन लाइ थी, उसी तरह पति पर आने वाली मुसीबतों को दूर करने के लिए और उनकी लम्बी उम्र की कामना करने के लिए महिला इस दिन पूरा दिन निर्जला उपवास रखकर करवा माता से प्रार्थना करती है।

करवाचौथ व्रत करने की विधि

करवाचौथ का व्रत रखना ही अहम नहीं होता है बल्कि इसे सही विधि से करने पर ही इसका फल आपको मिलता है। शादीशुदा महिलाएं इस व्रत को पूरे विधि विधान से रखती है, और उन्हें इसे करने की जानकारी उनके घर के बुजुर्गो से मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की करवाचौथ व्रत करने की सही विधि क्या होती है।

  • सबसे पहले इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर नहा धोकर सरगी करनी चाहिए, हर सास अपनी बहु को सरगी देती है, जिसमे खाने पीने के सामान के साथ साज श्रृंगार का सामान भी होता है। इसके अलावा उन्हें सरगी में प्याज व् लहसुन नहीं खाना चाहिए और थोड़ा मीठा या फलाहार का सेवन जरूर करना चाहिए।
  • जैसे ही आप सरगी कर लेते हैं तो सूर्योदय के बाद आपका यह व्रत शुरू हो जाता है।
  • उसके बाद आपको पूरा दिन गौरी मैया, व् अन्य शिव परिवार का ध्यान पूरा दिन मन में करते रहना चाहिए।
  • उसके बाद करवा धरना किया जाता है, यह बहुत ही पुरानी परम्परा है, जिसमें दीवार पर गेरू से फलक बना कर पिसे हुए चावलों के घोल से करवा चित्रित किया जाता है, लेकिन आज कल लोग बने बनाएं चित्र इस्तेमाल करते हैं।
  • फिर पीली मिट्टी से माँ गौरी और गणेश का स्वरुप बनाया जाता है, और गणेश को माँ गौरी की गोद में विराजमान किया जाता है।
  • उसके बाद माँ गौरी को लकड़ी का सिंहासन बनाकर उस पर स्थापित करें और मैया को लाल चुनरी ओढ़ाकर बाकी श्रृंगार का सामान चढ़ाएं।
  • उसके बाद जल से भरा कलश रखें।
  • उसके बाद अपने घर के बड़े को बायना देने के लिए मिट्टी का करवा लें, उसके बाद करवे पर मोली और रोली लगाएं, उसके बाद उसमे गेहूं और उसके ढक्कन में भूरा भर दें।
  • उसके बाद करवाचौथ की कथा सुने, और अपने घर में या जो भी आपके पास हो सभी बड़ों लोगो के पैर छूने चाहिए।
  • और रात को चाँद निकलने के बाद उसे अर्क देकर पूजा करें, और पति के पैर छूने उसके बाद पति के हाथों से जल ग्रहण करें।

करवाचौथ के लिए कुछ खास टिप्स

  • सुबह सरगी के समय ज्यादा मीठे भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे भूख और प्यास दोनों ही अधिक लगती हैं।
  • ड्राई फ्रूट का सेवन सरगी के समय करें इससे आपको कमजोरी महसूस नहीं होती है।
  • पूरा दिन खाली पेट होने के बाद रात को आपको अपने खान पान का ध्यान रखना चाहिए, ज्यादा तेलीय भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे आपको परेशानी का अनुभव हो सकता है।
  • करवाचौथ के दिन महिलाओं को अपनी ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए मेकअप का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।
  • व्रत खोलने के बाद पानी और फलाहार का सेवन सबसे उत्तम होता है।
  • और पति को भी इस दिन अपनी पत्नी को कुछ खास उपहार देना चाहिए, या फिर घर पर उनके लिए अपने हाथों से खाना बनाना चाहिए, और आप चाहे तो बाहर भी जा सकते हैं।

तो यह हैं करवाचौथ से जुडी कुछ महत्वपूर्ण बातें, इसके अलावा इस दिन कुँवारी लडकियां भी व्रत रखती है। और इस व्रत को रखने से उन्हें मनचाहा वर पाने का फल मिलता है। लेकिन शादीशुदा महिलाएं इस व्रत को जरूर रखती हैं, और इस दिन पति को भी अपनी पत्नी को गिफ्ट देना चाहिए, और कई पति तो अपनी पत्नी का साथ देने के लिए इस व्रत को भी रखते हैं। ऐसा करने से उनके बीच प्यार को बढ़ाने में मदद मिलती है।

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