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करवाचौथ की कथा, पूजा, सरगी, बया, और व्रत कैसे खोले

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पहला करवाचौथ हैं? अपनाये ये टिप्स:-

शादी के बाद जिंदगी में बहुत से बदलाव आते हैं| और अपनी नई जिंदगी के बारे में लड़कियां नए सपने सजती हैं| और कई महिलाओ को तो सजने सवारने का बहुत ज्यादा शौक होता हैं| शादी के बाद बहुत सी ऐसी रस्मे होती हैं| जो पहली बार होती हैं| उसी में से एक हैं करवाचौथ का उपवास, करवाचौथ का उपवास साल में एक ही बार आता हैं| हिंदू धर्म में करवा चौथ नारी के जीवन का सबसे अहम दिन होता है| इस दिन हर महिला को पूरा दिन भूख और प्यासा रहना पड़ता हैं| इस दिन चंद्रमा को अ‌र्घ्य अर्पित करके भोजन करना होता हैं|

इस दिन महिलाये अपने पति की सलामती और लंबी उम्र के लिए करवाचौथ का व्रत रखती हैं| और इस दिन वो पूरा दिन उपवास करती हैं| और शाम के समय चाँद देखने के बाद अपने पति के हाथ से पानी का पहला घूंट पानी का पीती हैं| और फिर पानी पीने से पहले चाँद को छलनी में से देखती हैं| और फिर अपने पति को देखती हैं| इसके बाद अपने पति की लंबी आयु व् उनके खुशहाल जीवन की कामना करती हैं| इसीलिए ये दिन किसी भी कपल के लिए बहुत खास होता हैं| और उनके बीच में प्यार और भी गहरा हो जाता हैं|

भारत धार्मिक परंपराओं का देश है, जहां हर रिश्ता एक परंपरा में बंधा होता है| परिवार समाज का आधार है और इससे जुड़ी कई परंपराएं समाज में देखने को मिलती हैं| जिनमे से करवाचौथ भी एक हैं, करवाचौथ के दिन महिलाये पुरे सोलह श्रृंगार करके अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं| करवाचौथ हर साल कार्तिक मास की कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन मनाया जाता है| इस दिन सभी औरते शाम के समय तैयार होकर पूजा के लिए, और कथा सुनने के लिए मंदिर या फिर जहाँ भी कथा का आयोजन होता हैं वह जाती हैं| बिना कथा सुने व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता|

इस व्रत का सभी औरतो को बहुत बेसब्री से इंतज़ार होता हैं| और सबसे ज्यादा उन महिलाओ को जिनके लिए ये पहली बार होता हैं| पहली बार व्रत करने वाली महिलाये इस व्रत को लेकर बड़ी उत्त्साहित होती हैं| क्योंकि इस दिन उन्हें अपनी जिंदगी का सबसे खास और प्यारा अनुभव होने वाला होता हैं| सभी उन्हें छेड़ते हैं , भूख तो नहीं लगेगी, प्यास तो नहीं लगेगी व्रत कर लोगों ना| ऐसा कहकर उन्हें परेशान करते हैं| इस दिन हर जगह महिलाओ की ही धूम देखने को मिलती हैं| महिलाओ के लिए ये पुरे साल का सबसे खास दिन होता हैं| क्योकि इस दिन वो अपने पति से जो चाहे वो करवा सकती हैं|

karva chauth 1इस दिन के आने से पहले ही महिलाओ में इसका उत्साह देखने को मिलता हैं| करवा चौथ से पहले महिलाओ का सजना सवरना शुरू हो जाता हैं| इस दिन महिलाये अपने हाथो में मेहँदी लगाती हैं, सजती हैं| और फिर आज के दिन महिलाओ को केवल अपने पति को रिझाना होता हैं| और वो भगवान से दुआ करते हैं, की उनके साथी और उनका साथ हमेशा बना रहे| इस दिन करवाचौथ की कथा को बहुत महत्व होता हैं| करवा चूत हर साल आता हैं| और जो पहली बार इस व्रत को रखती हैं| उनके लिए इसका अलग ही अनुभव होता हैं| कई लड़कियां जिनकी सगाई हो जाती हैं वो भी शादी से पहले उपवास करती हैं|

करवाचौथ की कथा:-

इस दिन यदि कोई महिला करवा माता की कथा को नहीं सुनती, तो उसके व्रत को सम्पूर्ण नहीं माना जाता| करवाचौथ की कथा में बताया गया हैं की, शाकप्रस्थपुर के ब्राह्मण की शादीशुदा पुत्री वीरवती ने करवाचौथ का व्रत पहली बार किया | व्रत के नियमानुसार चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अ‌र्घ्य अर्पित करके भोजन करना था| लेकिन उससे भूख सही ही नहीं जा रही थी| वह व्याकुल और बहुत ज्यादा भूख से परेशान हो रही थी|वो सात भाइयो की एकलौती बहन थी| और उसके भाई उसे बिलकुल भी परेशान नहीं देख सकते थे|जब भी वो परेशान होती थी तो उसके भी बहुत चिंतित हो जाते थे|

करवाचौथ के दिन उसे भूख से परेशान देख उसके भाई ने पीपल की आड़ में प्रकाश फैलाकर चाँद दिखा दिया| और अपनी बहन वीरवती से खा की चाँद निकल गया हैं की वो पूजा कर ले| और वीरवती को भोजन करवा दिया| परिणाम यह हुआ कि उसका पति लुप्त हो गया| और वीरवती का व्रत टूट गया| वीरवती ने बारह महीने तक प्रत्येक व्रत किया तब फिर उसे अपने पति की प्राप्ति हुई|और उसने करवाचौथ माता से माफ़ी मांगी और फिर वो हर साल पूरी निष्ठा और मन से व्रत करके , अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती थी|

करवाचौथ व्रत की विधि इस प्रकार हैं:-

  • करवा चौथ की पूजा के लिए आवश्यक पूजन सामग्री को इक्कठा करें|
  • व्रत के दिन प्रात: जल्दी उठ कर स्नान करके उसके बाद आप, यह ” मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये” संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत को शुरू करे|
  • पूरे दिन निर्जला (बिना पानी पिए रहे) रहें|
  • दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करें| नहीं तो आज कल मार्किट से भी चित्र मिल जाते हैं| इसे वर कहते हैं। चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है|
  • आठ पूरियों की अठावरी बनाएं| मीठा और साथ में अलग-अलग तरह के पकवान बनाये|
  • karva 1गौरी को लकड़ी के आसन पर बिठाएं, बिंदी आदि सुहाग सामग्री से गौरी मैया का श्रृंगार करें|
  • जल से भरा हुआ लोटा रखें|
  • करवा में गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें|
  • रोली से करवा पर स्वस्तिक बनाएं|
  • गौरी-गणेश और चित्रित करवा की विधि अनुसार पूजा करें| पति की लंबी आयु की कामना करें| और इस मंत्र का जाप करे”ऊॅ नम: शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥”
  • करवा पर 13 बिंदी रखें और गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कहें या सुनें|
  • कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपने सभी बड़ो का आशीर्वाद ले| और करवा उन्हें दे दे|
  • तेरह दाने गेहूं के और पानी का लोटा अलग रख लें|
  • रात्रि में चन्द्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखें और चन्द्रमा को अ‌र्घ्य दें| यानि उन्हें जल चढ़ाये| और उनकी लंबी आयु की कामना करे| और जिंदगी भर आपका साथ बना रहे इसकी कामना करे|
  • इसके बाद पति के पैरों को छुए और उन से आशीर्वाद लें| और उनके हाथ से जल पीएं| उन्हें भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन कर लें|

सरगी क्या होती हैं:-

वैसे तो करवाचौथ की तैयारियॉ औरते बहुत दिन पहले से ही शुरू कर देती हैं| परंतु ये व्रत सरगी के बिना अधूरा होता हैं| इसमें फल, सूखे मेवे और मिठाई हुआ करती है, जिसे व्रत करने वाली स्त्री करवाचौथ की सुबह सूरज निकलने से पहले खाती हैं, ताकि दिन भर ऊर्जा बनी रहे| और ये सरगी उसे उन के घर में कोई भी बड़ा हो दे सकता हैं| जब तक सास होती हैं तो वो अपनी बहु को सरगी देती हैं| और यदि कोई शादी से पहले उपवास कर रही लड़की हो तो उसके ससुराल वाले एक शाम पहले ही उसे सरगी दे आते हैं|

बया क्या होता हैं:-

बया लड़की की मां की तरफ से लड़की के ससुराल भेजे जाने वाली सामान होता हैं| इसमें पैसे, कपड़े, मिठाई और फल के साथ गहने भी होते हैं| इसमें लड़की के ससुराल के सदस्यों के लिए सामान व् कपड़ो के साथ-साथ खुद लड़की के लिए भी कपड़े और गहने हुआ करते हैं, जो करवाचौथ की पूजा पर वो पहनती हैं| और ये खास कर पहले करवाचौथ पर जरूर होता हैं|

पूजा कैसे करे:-

karvachauth 11पूजा करवाचौथ का अहम हिस्सा हुआ करता है| करवाचौथ करने वाली आस-पास की महिलाएं और लड़कियां साथ-साथ करती हैं| इसका आयोजन मंदिर में या फिर किसी के घर में भी किया जाता हैं| इसके लिए पूजा-स्थल को खड़िया मिट्टी से सजाया जाता है |और पार्वती माता की प्रतिमा की भी स्थापना की जाती है| पारंपरिक तौर पर पूजा की जाती है, और करवाचौथ की कथा सुनाई जाती है| जिन्हें यदि कोई औरत न सुइने तो उसका करवाचौथ का व्रत सम्पूर्ण नहीं माना जाता हैं|

व्रत कैसे खोले:-

करवाचौथ का व्रत चांद देखकर खोला जाता है| उस मौके पर आपके पति भी साथ होते है| दीए को जलाकर पूजा की शुरुआत की जाती है| थाली को सजाकर चांद को अ‌र्घ्य दिया जाता है| चाँद को अ‌र्घ्य इसीलिए दिया जाता हैं क्योकि ये भगवान् शिव के माथे पर विराजमान हैं| फिर पति के हाथों से पानी पीकर दिन भर का व्रत खोला जाता है| उसके बाद आप खाना खा सकती हैं| असल में चाहे करवा चौथ पति के दीर्घायु होने की कामना के साथ किया जाए लेकिन इसके साथ ही इसका संबंध परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मनाने वाला उत्सव हैं| कई जगह पर तो इसका भव्य आयोजन किया जाता हैं|

इस साल करवा चौथ 19 अक्टूबर को हैं| तो ये कुछ बाते हैं जो करवाचौथ को पूरा करती हैं|

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