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करवा चौथ 2016 शुभ मुहूर्त समय पहली करवा चौथ पर क्या करें क्या न करें?

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Karwa Chauth 2016 ka shubh muhurt:- त्यौहारों का मौसम दस्तक दे चुका है नवरात्री प्रारंभ हो चुकी है और कुछ ही दिनों में दुर्गा माँ विदा लेने वाली है। इसके साथ ही लोगों ने दिवाली की तैयारी भी शुरू कर दी है। लोग अपने घरो की साफ़-सफाई में जुट गए है शॉपिंग कर रहे है और न जाने क्या-क्या। लेकिन कुछ है जिसे हम भूल रहे है। अरे हां, करवा चौथ को तो हम भूल ही गए। हिंदुओं के पवित्र त्यौहारों में से एक करवा चौथ जो हर हिन्दू धर्म की सुहागन स्त्री का पर्व होता है बस आने ही वाला है। इस त्यौहार को भारत के पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बड़ी लोकप्रियता से मनाया जाता है।

करवा चौथ का त्यौहार कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस पर्व का सुहागन स्त्रियों के लिए बड़ा महत्त्व है। माना जाता है जो स्त्री पूरी श्रद्धा से इस व्रत को सम्पूर्ण करती है उसके पति की आयु में वृद्धि होती है और उसे जन्मो तक सुखी जीवन का आशीर्वाद मिलता है। करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से पूर्व प्रारंभ होकर चन्द्रमा के दर्शन के पश्चात सम्पूर्ण होता है।

गांव हो या शहर सभी की सुहागन स्त्रियां करवा चौथ के व्रत को बड़े उत्साह के साथ रखती है। कहते है इस दिन भालचंद्र गणेश की अर्चना करने से पति को दीर्घायु और अखण्ड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। हिन्दू धर्म में इस दिन सभी सुहागन स्त्रियां निर्जला व्रत रखती है अर्थात खाना तो दूर उस दिन उन्हें पानी की बून्द तक पीने को नही दी जाती।

कुछ  महिलाएं चंद्रमा को अर्क और प्रसाद अर्पण करने के बाद ही भोजन करती है और अपना व्रत खोलती है। जबकि कुछ सूर्य अर्क के बाद ही चाय आदि पी लेती है। धर्मानुसार देखा जाये तो इस व्रत को अपने परिवार में चली आ रही परंपरा के अनुसार ही रखना चाहिए। अर्थात जिस प्रकार आपके बड़े इस व्रत को करते आये है उसी प्रकार आप भी करिये।karwa chauth

हिन्दू धर्म में मनाये जाने वाले इस त्यौहार की विशेषता ये है की इसे केवल सुहागन स्त्रियां ही मनाती है। वैसे तो अधिकतर स्त्रियां इस व्रत के बारे में जानती है लेकिन कुछ है जिनके इसके बारे में सम्पूर्ण जानकरी नहीं है क्योकि ये उनका पहला करवा चौथ है। इसीलिए आज हम आपको करवा चौथ की जानकारी, शुभ मुहूर्त और तैयारी सभी की जानकारी देने जा रहे है। हमें उम्मीद है ये जानकारी आपके लिए सहायक सिद्ध होगी।

2016 में करवा चौथ का शुभ मुहूर्त (Karwa Chauth 2016 shubh muhurt) :- 

वर्ष 2016 में करवा चौथ का त्यौहार 19 अक्टूबर 2016, बुधवार के दिन मनाया जायेगा।  इस वर्ष करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त सायं 05:43 से सायं 06:59 बजे तक का है।

करवा चौथ के दिन चाँद निकलने का समय = रात्रि 08:51 बजे।

2016 में कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि दिनांक 18 अक्टूबर 2016, मंगलवार रात्रि 10:47 बजे से प्रारंभ होकर दिनांक 19 अक्टूबर 2016, बुधवार सायं 07:32 बजे समाप्त होगी।

करवा चौथ का अर्थ :-

करवा चौथ का व्रत सुहागन स्त्रियों द्वारा किया जाता है। jisme करवा का अर्थ है “मिटटी का घड़ा” और चौथ का अर्थ है “चतुर्थी”। करवा चौथ के दौरान प्रयोग किये जाने वाला मिटटी का घड़ा कुशल सौभाग्य का प्रतीक होता है। जिस कारन इस दिन को करवा चौथ के नाम से जाना जाता है।

व्रत के दौरान कर्वे का विशेष महत्त्व होता है। नीचे करवा चौथ में की जाने वाली रस्मो की जानकारी दी गयी है। इसके द्वारा आप भी करवा चौथ का व्रत आसानी से कर सकती है।

कैसे मनाये करवा चौथ ?Karwa Chauth 2016 puja

करवा चौथ के दिन सभी सुहागन स्त्रियां पुरे दिन निर्जला उपवास रखती है और अपने होने वाले पति या पति की दीर्घायु की कामना करती है। इस दिन महिलाये अपने घर की सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मांगती है। करवा चौथ का पारंपरिक त्यौहार उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, गुजरात और राजस्थान में बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है।

इस व्रत को केवल सुहागिन स्त्रियां ही करती है। इस दिन महिलाएं भगवन शिव और देवी पार्वती की पूजा करती है। इसके अलावा वे अपने हाथो में मेहंदी लगाती है और चंद्र देव की भी पूजा करती है।

अपनी पहली करवा चौथ पर क्या करे?

पहला करवा चौथ हर सुहागन/विवाहिता स्त्री के लिए महत्वपूर्ण होता है। करवा चौथ के दिन नवविवाहित अपना शादी का जोड़ा, गहने और विशेष मेकअप करती है। नवविवाहित स्त्री की सास उसके साथ उसके पहले करवा चौथ की तैयारियां करवाती है और उसके लिए विशेष व्यंजन बनाती है। सरगी करवा चौथ का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है। इसमें फेनी (दूध और सूजी से बनी मिठाई), परांठा और विभिन्न तरह के फल और मिठाईया होती है।

इसके बाद सास अपनी बहु को उपहार देती है जो गहने, कपडे या कुछ भी हो सकता है। पहले सरगी की ही तरह एक और परंपरा है जिसे बाया कहा जाता है। बाया एक उपहार होता है जो बहु के परिवारवाले उसकी सास को देते है। इन सभी में सबसे महत्वपूर्ण होता है पति द्वारा दिया गया उपहार। पुरे दिन व्रत-उपवास करने के बाद, परंपरा अनुसार सभी करवा चौथ की कथा सुनती है। उसके बाद रात्रि में चन्द्रमा को अर्क देने के बाद ही भोजन-पानी ग्रहण करती है।

करवा चौथ की पूर्ण विधि और व्रत खोलने के बारे में अन्य जानकारी के लिए यह पढ़े : करवा चौथ व्रत विधि, सरगी और बाया

Karwa Chauth 2016 पर क्या करें ?Karwa Chauth 2016 shubh muhurt

करवा चौथ सरगी और करवा चौथ कथा की तरह और भी कई रस्मे की जाती है। लेकिन सभी लोग अपनी-अपनी परंपरा अनुसार करवा चौथ का व्रत की रस्मे करते है।

यदि 2016 में आने वाली करवा चौथ आपकी पहली करवा चौथ है तो निम्न परंपराओं को न भूलें। Karwa Chauth 2016

  • सबसे पहली और महत्वपूर्ण रस्म अपने दोनों हाथो में मेहंदी की होती है। ये सुख और khushi का प्रतीक होती है। कहते है मेहंदी का रंग जितना गाढ़ा होता है उस दम्पति के मध्य भी उतना ही गहरा होता है।
  • करवा चौथ के दिन महिलाओं को बड़ी बिंदी लगाना बहुत जरुरी होता है। इस बिंदी का रंग लाल, मेहरून या पिंक होना चाहिए।
  • व्रत रखने वाली स्त्री को heavy work वाली साड़ी, घाघरा चोली या लहंगा पहनना चाहिए।
  • शाम के समय सभी महिलाओं को पूरी तरह सज संवरकर परंपरा अनुसार करवा चौथ व्रत कथा के साथ सभी रस्म करनी चाहिए।
  • करवा चौथ की पूजा के दौरान, सभी ग्रुप में बैठकर अपनी-अपनी थालिया बदलकर गीत गाती है। ये रिवाज पंजाबियो में विशेष महत्त्व रखता है। ग्रुप की सबसे बड़ी उम्र की स्त्री करवा चौथ की कथा सुनाती है।

एक बात और यदि आपके घर में भी ऊपर बताई गयी विधि अपनायी जाती है तो इसे अपनाये। अन्यथा अपने रस्मो-रिवाज अनुसार करवा चौथ का व्रत करें। क्योकि ये आपके जीवन में बहुत महत्त्व रखता है। इसी व्रत के प्रभाव से आपके पति को दीर्घायु का आशीर्वाद मिलेगा। इसके अलावा आपको ये आर्टिकल कैसा लगा हमें जरूर बताएं क्योकि आपकी राय हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है और हां, फेसबुक पर इसे शेयर करना न भूलें।

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