क्या आप भी अपने बच्चे की परवरिश ऐसे करते हैं? क्या सिखाते हैं अपने लाडले को?

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दोस्तों आज मैं आपको एक कडवी हकीकत से रूबरू कराने जा रहीं हूँ, आज आप भी सोचने के लिए मजबूर हो जायेंगे और हो सकता है आज आपकी आँखें खुलेगी, पर आपको कोई चीज समझने के लिए आपको थोड़ी धैर्य की जरुरत होगी। चाहे आप लड़के के माँ बाप हों या किसी लड़की के, आप दोनों के लिए ये आर्टिकल्स बहुत जरुरी है। और इससे भी ज्यादा जरुरी है आप इस आर्टिकल्स को समझने की।

कई बार ऐसा होता है की हम किसी चीज को समझने की कोशिश नहीं करते है, क्यों की गलती मेरी होती है और बीज बोया हुआ भी खुद का होता है।

बच्चों के पालन पोषण में माँ की सबसे ज्यादा भूमिका होती है। माँ ही बच्चों की प्रथम पाठशाला होती है, शायद उनको नहीं पता आपकी एक एक चीज को बच्चा सीखता है और आपके मार्गदर्शन पे ही वो चलता है। आज जो भी आप अपने बच्चे को सिखायेंगे वो सिर्फ आज कल या एक महीने के लिए नहीं होता है बल्कि हो सकता है वो उसका संस्कार बन जाये और आगे उस बच्चे की व्यक्तिव में वो दिखे। पर क्या आपने कभी सोचा है की ऐसा भी हो सकता है?बच्चों की परवरिश

बच्चो को सही शिक्षा देना हरेक पेरेंट्स का कर्तव्य होता है। बच्चों को सही शिक्षा देनी चाहिए ताकि वो एक अच्छा इंसान बने, परिवार में, मोहल्ले में, गांव में, सोसाइटी में, उसकी एक अलग पहचान हो और एक अच्छा इंसान के रूप में जाना जाये।

आजकल चीजें अव्यवस्थित हो गई है, लोगो के बीच प्यार नहीं है, लोग एक दुसरे को सता रहें हैं, एक दुसरे को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, गरीबो पर असहाय पर जुल्म हो रहा है पर आवाज उठाने वाला कोई नहीं है, सही राय देने वाला कोई नहीं है।

आजकल आप सुनते होंगे की अच्छा इंसान ही अब नहीं है। कोई किसी की मदद नहीं करता गलत चीजों पर भी आवाज नहीं उठाता।

क्या सच में समाज में अच्छे इंसान की कमी हो गई है? क्या ये गलती हमारी तो नहीं है? शायद हमने एक अच्छे इंसान को नहीं बनाया है। अच्छी शिक्षा नहीं दी है। हमने गलत चीज सिखाई है इसलिए आज समाज में अच्छे लोगों की कमी हो गई है, इसका जिम्मेवार माता पिता तो नहीं है समाज तो नहीं है।

एक बच्चा जो 10 साल के अन्दर जो सीखता है वो पूरी जिंदगी में नहीं सिख सकता है। एक बच्चा एक भाषा दो से तीन साल में सिख लेता है। पर अगर आपका बच्चा बड़ा हो गया यानी की १० साल से उसकी उम्र अधिक है तो आप फिर से कोई अलग भाषा सिखाने की कोशिश करेंगे तो बहूत मुस्किल होगी।

हो सकता है वो पूरी जिंदगी में नहीं सिख पायेगा जैसा की उसने बचपन में सिखा था। मैंने कई ऐसे बच्चो को देखा है जो तीन साल के अन्दर ही तीन-तीन भाषाओं को बोल सकता है। क्यों की उसके माता पिता ने उसको १० साल से कम उम्र ही सिखा दिया है, क्यों की उसको वैसा समाज मिला है, परिवार मिला है।

अब आप ध्यान दीजिये आप अपने बच्चे को १० साल से कम उम्र में क्या क्या सिखाते हैं? आप खुद ही सोचिये,

ऐसा भी नहीं है की सभी माँ बाप अपने बच्चे गलत ही सिखाते हैं। बहूत से माँ बाप अपने बच्चे को अच्छा संस्कार देते है। कुछ अच्छे इंसान की वजह से ही समाज और दुनियां चल रही है। मैं उन लोगों को नमन करती हूँ जो अपने बच्चे को सही दिशा निर्देश दे कर अपने कर्तव्य का पालन कर रही है ताकि एक अच्छे समाज और परिवार का निर्माण हो।

आज हम आपको ये बता रहे हैं की समाज में अच्छे लोगों की कमी क्यों हो गई है? आखिर कहा चूक होती है हमारे लालन पालन में? क्या गलतियाँ करते है बच्चों को सिखाने में? और क्या नहीं सिखानी चाहिए।

आपने अक्सर देखा होगा जब भी बच्चा रोता है तो कई माँ कुछ भी दे देती है ताकि उनका बच्चा चुप हो जाये, चाहे वो मोबाइल हो, टीवी पर कार्टून हो, या कोई ऐसा सामान जिसको लेकर बच्चा एकदम चुप हो जाता है। इसका मतलव ये हुआ की माँ आप सिर्फ अपने बच्चे से पीछा छुड़ाती है, चाहे उसकी कोई भी कीमत चुकानी पड़े।

आजकल ये चीज ट्रेंड में है जब बेबी बॉय किसी बेबी गर्ल को देखता है या मुस्कुराता है तभी से बेबी बॉय की माँ के मन में ख़ुशी की लहरें फूटने लगती है, और कहने लगती हैं, अभी से गर्ल फ्रेंड, अरे देखो देखो अभी से गर्ल फ्रेंड बनाने लगा है। पर आपने कभी ध्यान दिया है कभी भी किसी भी लड़की की माँ ये नहीं कहती, देखो देखो मेरी बेटी बॉय फ्रेंड बना रही है। इसपर गौर कीजिये, क्या आपको ये आचरण ठीक लगता हैं?

जब बेबी बॉय प्ले स्कूल जाता है वह किसी छोटी बच्ची को देखता है, तो उसकी माँ अपने घर में सहेलियों में अपने सम्बन्धियों में गर्व से कहती हैं की, अरे!!! इसका दोस्त सिर्फ लड़की है, अभी से ये हाल है तो बड़ा होकर क्या करेगा? ऐसे ही लड़के की माँ को आपने कहते सूना होगा की देखो देखो वो लड़की पसदं है, उसी से तेरी शादी करेंगे, उसी को बहु बनायेंगे।

आप अपने बच्चे को वो सारी चीजें या खिलौना ला कर देते हैं, जिसकी असल जिंदगी में इस्तेमाल करने से लोग डरते हैं। आप अपने बच्चे को बड़ा से बड़ा बन्दूक का खिलौना ला कर देते हैं, पिस्तौल ला कर देते हैं। आप अपने बच्चे को मुखौटा ला कर देते हैं। आप यहाँ तक की होली में पिचकारी भी बन्दूक का ला कर देते हैं। तलवार और तीर कमान ला कर देते हैं। इसलिए बच्चे आजकल हनुमान कम रावण बनना ज्यादा पसंद करते हैं। आप सोचते हैं अभी तो बच्चा है। किसी को मार दिया अपने बस ये कह दिया अभी तो बच्चा हो।

आपने किसी भी बच्चे को ब्रम्हा या विष्णु या कृष्ण या राम के रूप में कम देखते होंगे, आजकल बच्चे सिर्फ रावण बनना पसंद करते हैं।

माँ अपने बच्चे को बचपन में ही सिखाती हैं, मारो पापा जी को, मारो दादा जी को, बन्दूक से मारो, मार दे गोली, और पापा जी भी एक्टिंग करने से नहीं चुकते हैं, दादा जी भी फर्श पर पड़े होते हैं मरने का नाटक कर के क्यों की पोता ने गोली मारा है। क्या सिखा रहे हैं अपने बच्चों को? आपके पास सिर्फ एक ही बात होती है, अभी तो बच्चा है।baby boy as ravan

आप खुद ही सोचिये लोग पहले से ही गुंडा बना रहे हैं अपने बच्चे को। वो भला समाज में बन्दूक नहीं दिखायेगा तो क्या दिखाएगा, वो दिन रात लड़कियों के पीछे नहीं पडा रहेगा तो क्या करेगा। वह वही करेगा जो आपने सिखाया है। वो अपने ही परिवार पे गोलियां चलाएगा और असल असल जिंदगी में कुछ होगा और अन्दर से कुछ होगा।

इसलिए कभी भी ये मत सोचिये की वो बच्चा है और उसके आड़ में दिन रात उसके दिमाग में गलत चीजें भरते रहें। आप हमेशा अच्छी चीज सिखाएं, अपनी ममता और प्यार भरपूर दें, पर गलत तरीके से नहीं, सही तरीके से, सही बात बोलकर, सही खिलौना दे कर।

आपका बच्चे का व्यक्तित्व अच्छा हो, अच्छा बने, आपके काम आये, समाज के काम, और समाज और परिवार को नेतृत्व करें, और अच्छे समाज और परिवार की नींव रखे, तभी आपका नाम होगा।

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