माँ का पहला दूध फायदेमंद होता है! जाने कैसे

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माँ के दूध को नवजात शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार कहा गया है, और नवजात शिशु के जन्म के बाद महिला के स्तनों से निकलने वाला पहला गाढ़ा दूध बच्चे के लिए सबसे उपयोगी होता है, इसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है, और डॉक्टर्स के अनुसार बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर ही बच्चे को इस दूध का सेवन करवा देना चाहिए, क्योंकि इसमें सभी पोषक तत्व और एंटीबॉडिज़ भरपूर मात्रा में होते है, जो की बच्चे को सभी पोषक तत्व देते है और साथ ही ये बच्चे के विकास में और उन्हें हर बिमारी और संक्रमण से बचाने में मदद करते है।

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महिलाओ में प्रेगनेंसी के समय तीसरे या चौथे महिला ये दूध स्तनों में बनना शुरू हो जाता है, और कई महिलाओ के स्तनों से तो आखिरी महीनो में दूध रिसने भी लगता है, कोलोस्ट्रम भले ही बहुत कम मात्रा में होता है, परन्तु यह नवजात शिशु के लिए किसी अमृत से कम नहीं होता है, कोलोस्ट्रम में प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स, फैट, कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में होते है, और यहां तक की गाय के दूध से सौ गुना ज्यादा एंटीबॉडी मौजूद होते है, और यह नवजात शिशु की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है,

बच्चे के जन्म के पहले साल बच्चों में संक्रमण फैलने का सबसे ज्यादा भय होता है, जिससे बचाने के लिए माँ का पहला गाढ़ा दूध बहुत मदद करता है, शिशु के जन्म के 48 से 72 घंटो के भीतर महिलाएं 50 ml दूध का उत्पादन करती है, जो की नवजात शिशुओं के लिए उपयुक्त होता है, और जससे जैसे बच्चे की भूख बढ़ती है, वैसे वैसे कोलोस्ट्रम की जगह परिपक्व दूध का उत्पादन महिला के स्तनों में होने लगता है, तो आइये अब विस्तार से जानते है की माँ के पहले दूध के नवजात शिशु के लिए कौन कौन से फायदे होते है।

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पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है:-

माँ का पहला दूध बच्चा आसानी से पचा लेता है, साथ ही नवजात शिशु की पाचन क्रिया को बेहतर करने में भी ये मदद करता है, साथ ही ये बच्चों की पाचन क्रिया को सामान्य दूध को पचाने के लिए भी तैयार करता है, जिससे बच्चों को पेट से सम्बंधित समस्या से बचाया जा सकें।

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है:-

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बच्चों में जन्म के बाद एक साल तक संक्रमण की चपेट में आने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है, परन्तु यदि आप बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर भी बच्चे को माँ का पहले दूध पिला देते है, तो इसके कारण बच्चे को हर प्रकार के संक्रमण से बचाने में मदद करता है, साथ ही शिशु को रोगो से लड़ने के लिए भी सक्षम बनाता है।

बच्चों को सभी तरह के पोषक तत्व मिलते है:-

माँ के पहले दूध में सभी मिनरल्स उपयुक्त मात्रा में होते है, जिसके कारण बच्चे के विकास में मदद मिलती है, क्योंकि इसके कारण उसके शरीर में वो सभा पोषक तत्व जाते है जो की बच्चे के विकास के लिए उपयोगी होते है, इसीलिए महिला को बच्चे के विकास के लिए कभी भी स्तनपान से परहेज नहीं करना चाहिए, और बच्चे को कम से कम जा तक बच्चा स्तनपान करता है तब तक करवाना चाहिए।

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स्तनपान कराने वाली महिला को क्या फायदा होता है:-

स्तनपान कराने से केवल शिशु को ही नहीं बल्कि महिला को भी बहुत फायदा होता है, और ऐसा करने से उसे भी बहुत सी बीमारियों से बचने में मदद मिलती है, जैसे की महिला को डिप्रेशन, डिंबग्रंथि कैंसर, ब्रैस्ट कैंसर, दिल से सम्बंधित रोगो से बचाने में मदद करती है, साथ ही ज्यादातर महिलाओ का डिलीवरी के बाद वजन बढ़ जाता है, स्तनपान कराने से इस समस्या का भी हल होता है, इसीलिए किसी भी महिला को स्तनपान से परहेज नहीं करना चाहिए, बच्चे को स्तनपान जरूर करवाना चाहिए ताकि शिशु और माँ दोनो को इसका फायदा मिल सकें।

स्तनपान बच्चे को कब तक करवाना चाहिए:-

कम से कम छह महीने तक बच्चे को केवल स्तनपान ही करवाना चाहिए इसके अलावा पानी भी नहीं देना चाहिए, उसके बाद बच्चे को हर दो से तीन घंटे के बीच स्तनपान करवाते रहना चाहिए, छह महीने बाद बच्चे का पेट केवल माँ के दूध से नहीं भरता है, इसीलिए बच्चे को माँ के दूध के साथ हल्का फुल्का आहार देना शुरू करना चाहिए और साथ ही इस बारे में अपने डॉक्टर से राय जरूर लेना चाहिए।

नोट:-

कई महिलायें ऐसी होती है जिनके स्तनों में दूध नहीं आता है, या थोड़ा आता है ऐसे में महिलाओ को को कोशिश करनी चाहिए वो ऐसा आहार लें जिसके कारण उनके स्तनों में दूध की वृद्धि होती है, जैसे की धनिये, जीरे, डेरी प्रोडक्ट्स आदि का सेवन करना चाहिए इन तरीको का इस्तेमाल करने से महिला के स्तनों में दूध की वृद्धि होती है, साथ ही इसके लिए आप किसी महिला नर्स आदि से भी राय ले सकती है।

तो ये कुछ फायदे है माँ के पहले दूध के, इन फायदों को बच्चे को देने और बच्चे के विकास के लिए ऐसा जरूर करना चाहिए, साथ ही महिला को अपनी सेहत का भी खास ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि यदि महिला अपने खान पान पर ध्यान नहीं देती है, तो इसके कारण महिला के शरीर में कमजोरी आती है, साथ ही इसका असर बच्चे के पोषण पर भी पड़ता है, इसीलिए माँ को अपने आहार को ऐसा लेना चाहिए जिसमे सारे पोषक तत्व होते है, जिसके कारण बच्चे की भी जरुरत को पूरा करने में मदद मिलें।

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