Maha Shivratri : शिवरात्रि २०१८, शिवरात्रि का महत्व

Maha Shivratri : शिवरात्रि २०१८, शिवरात्रि का महत्व

महा शिवरात्रि का पौराणिक महत्व?

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिङ्ग ( जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है ) के उदय से हुआ। अधिक तर लोग यह मान्यता रखते है कि इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवि पार्वति के साथ हुआ था। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

2018 महा शिवरात्रि कब है?

इस वर्ष महाशिवरात्रि 13 और 14 फरवरी 2018 दोंनो दिन मनाई जाएगी, ये आपके भौगोलिक स्थिति के अनुसार होगा, आप अपने शहर/गाँव (भौगोलिक स्थिति) के अनुसार भारत के कुछ भाग में ये एक दिन आगे अथवा एक दिन पीछे मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि 13 फरवरी 2018, मंगवलार 22:36 (यानी रात्री के दस बजकर छतीस मिनट) से  प्रारंभ होगी जो 15 फरवरी 2018, 00:48 बजे खत्म होगी।

शिवरात्रि की कथा

श्रीमद् भागवत में एक प्रसंग है कि एक बार देवताओं और दैत्यों ने मिल कर भगवान के निर्देशानुसार समुद्र मंथन की योजना बनाई ताकि अमृत प्राप्त किया जा सके। परंतु उस समुद्र मंथन के समय सबसे पहले हलाहल विष (कालकूट नामक विष) निकला था। वह विष इतना विषैला था कि उससे समस्त जगत भीषण ताप से पीड़ित हो गया था। देव-दैत्य बिना पिए उसको सूंघते ही बेसुध से हो गए। देवताओं की प्रार्थना पर और मानव के कल्याण के लिए उस हलाहल विष को भगवान् शंकर ने पिने  का निर्णय लिया।

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उसके बाद अपने हाथों  में उस विष को लिया व पी गए। किंतु उसको निगला नहीं और विष अपने गले में ही रोक लिया। जिसके प्रभाव से आपका गला नीला हो गया और  नीलकंठ कहलाए। भगवान्अ की इसी अलौकिक चेष्टा की याद में  श्री शिवरात्री मनाई जाती है।

महाशिवरात्रि अनुष्ठान

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का अभिषेक अनेकों प्रकार से किया जाता है। जलाभिषेक : जल से और दुग्‍धाभिषेक : दूध से। भक्त शिव के मंदिरों में पारंपरिक शिवलिंग पूजा करने के लिए आते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं। और शिवलिंग पर चढाने के लिए धतूरे का फल, बेलपत्र, भांग, बेल, आंक का फूल, धतूरे का फूल लाते है, इसके अलावा इस दिन पुरानी मान्यता और शास्त्र के अनुसार, महाशिवरात्रि पूजा में छह वस्तुओं को अवश्य शामिल करना चाहिए:

  • शिव लिंग का पानी, दूध और शहद के साथ अभिषेक। बेर या बेल के पत्ते जो आत्मा की शुद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं;
  • सिंदूर का पेस्ट स्नान के बाद शिव लिंग को लगाया जाता है। यह पुण्य का प्रतिनिधित्व करता है;
  • फल, जो दीर्घायु और इच्छाओं की संतुष्टि को दर्शाते हैं;
  • जलती धूप, धन, उपज (अनाज);
  • दीपक जो ज्ञान की प्राप्ति के लिए अनुकूल है;
  • और पान के पत्ते जो सांसारिक सुखों के साथ संतोष अंकन करते हैं।

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