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नौ देवियों की नौ दिनों की पूजा और उनके मंत्र

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नवरात्री हिन्दुओं के पवित्र त्योहारों में से एक है जिसे पुरे देश में बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। माना जाता है इस पर्व पर पूरी श्रद्धा और विश्वास से माँ भगवती की आराधना करने से मनोवांछित फल मिलता है। ऐसे तो वर्ष में चार बार नवरात्री आती है। जिनमे से दो गुप्त नवरात्र और दो विशेष नवरात्र होते है। इन दो विशेष नवरात्रों में एक चैत्र मान में आता है और दूसरा आश्विन में।

वर्ष 2017 के आश्विन नवरात्री प्रारम्भ होने वाली है। जो की आश्विन माह के शुल्क पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तिथि तक चलेगी। यूँ तो हर साल नवरात्री में एक दिन घटता या एक दिन बढ़ता रहता है। लेकिन इस बार यह 21 सितंबर, गुरुवार से प्रारंभ होकर 29 सितंबर, शुक्रवार (महानवमी) तक चलेंगे।

इस वर्ष नवरात्र में पुरे नौ दिन देवी की आराधना की जाएगी। लेकिन तारीखों की फेर बदल से प्रतिपदा केवल सुबह 9:57 बजे तक ही मिल रही है। ऐसे में कलश स्थापना और ध्वजारोपण इस समय तक करना अनिवार्य होगा। क्योंकि इसके बाद प्रातः 9:58 बजे से द्वितीय तिथि लग जाएगी और अभिजीत मुहूर्त भी इसी तिथि में चला जाएगा।

नवरात्री 2017 पूजा मुहूर्त :

2017 में शारदीय नवरात्री आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानी 21 सितंबर, गुरुवार को कलश स्थापना और ध्वजारोपण के लिए शुभ समय स्थिर लग्न सिंह प्रातः 5:38 बजे से पहले करना श्रेयस्कर होगा। जो लोग इस समय तक कलश स्थापना न कर पाए वे किसी भी परिस्थिति में सुबह 9:57 से पहले अवश्य कर लें।navratri kalash sthapna

इसके अतिरिक्त महानिशा पूजा 27 सितंबर, बुधवार को निशीथ काल में बलि इत्यादि देना और महाष्टमी व्रत 28 सितंबर, बृहस्पतिवार को करना होगा। 29 सितंबर, शुक्रवार को नवमी पर होम, चण्डा देवी की पूजा और बलिदान आदि करना होगा।

पारण के है दो विकल्प :

नवरात्री व्रत का पारण 30 सितंबर, शनिवार विजय दशमी को प्रातः किया जाएगा। इसके अलावा 29 सितंबर, शुक्रवार की रात्रि 9:22 बजे के बाद भी किया जा सकता है। महाष्टमी व्रत पारण 29 सितंबर या 28 सितंबर, बृहस्पतिवार को रात 7:27 बजे के बाद भी किया जा सकता है। सम्पूर्ण नवरात्र व्रत करने वालो का पारण 30 सितंबर, शनिवार को प्रातः या 29 सितंबर, शुक्रवार को रात्रि 9:22 बजे के बाद किया जा सकता है।

वर्ष 2017 में नवरात्री व्रत दर्शन कुछ इस प्रकार है :-

तिथि और वार
देवी आराधना
पूजा का समय 
देवी का बीज मंत्र
21 सितंबर, वीरवार शैलपुत्री दर्शन सुबह 9:57 बजे तक प्रतिपदा ह्रीं शिवायै नम:।
22 सितंबर, शुक्रवार ब्रह्मचारिणी देवी दर्शन सुबह 10:05 बजे तक द्वितीय ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।
23 सितंबर, शनिवार चंद्रघंटा देवी दर्शन सुबह 10:46 बजे तक तृतीया ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
24 सितंबर, रविवार कुष्मांडा सुबह 11:51 बजे तक चतुर्थी ऐं ह्री देव्यै नम:।
25 सितंबर, सोमवार स्कंदमाता देवी दर्शन दोपहर 1:26 बजे तक पंचमी ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।
26 सितंबर, मंगलवार कात्यायनी देवी दर्शन दोपहर 3:18 बजे तक षष्ठी क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:।
27 सितंबर, बुधवार कालरात्रि दर्शन शाम 5:23 बजे तक सप्तमी क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
28 सितंबर, गुरुवार महागौरी शाम 7:27 बजे तक अष्टमी श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।
29 सितंबर, शुक्रवार सिद्धिदात्री देवी दर्शन रात 9:22 बजे तक महानवमी ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।
30 सितंबर, शनिवार विजयदशमी———————-———————-