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ओपन से पढ़ाई कैसे की जाती है? जानें

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पत्राचार से पढाई 

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क्या आप भी जॉब या किसी अन्य कारण की वजह से अपनी रेगुलर स्टडीज नहीं कर पा रहे है तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि ओपन लर्निंग एक ऐसा माध्यम है जिसकी मदद से आप अपनी जॉब के साथ साथ अपनी पढाई के शौक को भी पूरा कर सकते है। इस लर्निंग की खास बात ये है की इससे पढाई करने के बाद मिलने वाली डिग्री अधिकृत यूनिवर्सिटी की रेगुलर डिग्री के बराबर ही मान्य होती है और इस डिग्री के जरिए भी आप आसानी से जॉब में प्रोमोशन या जॉब पा सकते है।

कौन ले सकता है ओपन में दाखिला?

वर्तमान में ऐसे बहुत से विद्यार्थी है जो अपनी मज़बूरी या शौक के कारण 10 वीं या 12 वीं के बाद ही जॉब करने लगते है। जिसके कारण वे रेगुलर पढाई नहीं कर पाते। ऐसे में उनकी पढाई का काफी नुकसान हो जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए ही दिल्ली यूनिवर्सिटी और कई कॉलेज संस्थानों ने डिस्टेंस लर्निंग / ओपन लर्निंग प्रोग्राम शुरू किया है।ओपन से पढाई कैसे की

जिसमे उन विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाता है जो या तो जॉब के कारण रेगुलर कॉलेज में दाखिला नहीं ले पाते या किसी अन्य पढाई के चलते रेगुलर पढाई नहीं कर पाते। जानकारी के लिए बता दें रेगुलर और ओपन लर्निंग की पढाई में ज्यादा फर्क नहीं होता। जहां रेगुलर में कोर्स को सेमिस्टर में बांटा गया है वहीं ओपन में पूरा कोर्स एक ही साथ कराया जाता है।

ओपन स्कूल में पढाई कैसे कराई जाती है?

इतना ही नहीं ओपन की पढाई में विद्यार्थियों को सप्ताह में 2 या 3 दिन की क्लासेज दी जाती है जिसमे बड़े बड़े प्रोफ्फेर्स उन्हें कोर्स की पढ़ाई करवाते है। कोर्स खत्म होने के बाद May / June में ओपन के एनुअल एक्साम्स होते है। जिसके कुछ महीनों के बाद रिजल्ट Declare होता है और विधार्थियों को आगे के लीये प्रोमोट कर दिया जाता है।

जो बच्चे किसी विशेष सब्जेक्ट में फ़ैल हो जाते है या उनकी compartment आ जाती है उन्हें अगले साल उस पेपर को पुनः देना होता है। जबकि सभी सब्जेक्ट्स में फ़ैल हुए स्टूडेंट को पूरा साल ही दोबारा करना होता है। Compartment वाले पेपर को दोबारा देने के लिए विशेष चार्जेज लगाए जाते है जो शिक्षण संस्थान द्वारा निर्धारित किये होते है। ये सभी चार्जेज अलग अलग संस्थान की अपनी-अपनी नीति के अनुसार लगाएं जाते है। कोई इसके लिए बहुत काम चार्ज करते है तो कोई इसके लिए थोड़ी ज्यादा फीस चार्ज करते है।

एडमिशन प्रोसीजर :

ओपन में एडमिशन लेने के लिए विद्यार्थी के पास 10 वीं या 12 वीं कक्षा की मार्क शीट होना आवश्यक है। इसके बिना ओपन स्कूलिंग में एडमिशन नहीं मिलता। इसके एडमिशन का पूरा प्रोसीजर ऑनलाइन मोड के द्वारा ही किया जाता है। जिसमे फॉर्म भरने से लेकर फीस जमा करने तक सभी प्रक्रिया सम्मिलित है। ऑनलाइन फॉर्म सबमिशन के बाद फीस भरी जाती है जिसके बाद आपको एक फी रिसिप्ट दी जाती है जिसका प्रयोग पुरे साल में अलग अलग जगहों पर किया जाता है। साथ में एक ID कार्ड भी दिया जाता है।
जिसका एक्साम्स के दौरान काफी प्रयोग होता है।

कौन-कौन से संस्थान कराते है ओपन से पढाई?

1. इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) – www.ignou.ac.in

2.दिल्ली स्कूल ऑफ ओपन लर्रि्नग – www.sol.du.ac.in

3. राजर्षि टंडन ओपन यूनिवर्सिटी – www.admission.onlineuprtou.in

4. सिम्बॉयोसिस ओपन यूनिवर्सिटी – www.scdl.net

5. अन्नामलाई ओपन यूनिवर्सिटी – www.annamalaiuniversity.ac.in/dde

6. सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी – www.smude.edu.in

7. डॉ. बी आर अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी हैदराबाद – www.braou.ac.in

8. कृष्णकांत हांडिक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी, गुवाहाटी – www.kkhsou.in/web

9. नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी, पटना – www.nalandaopenuniversity.com

10. वर्धमान महावीर ओपन यूनिवर्सिटी, कोटा, राजस्थान – www.vmou.ac.in

11. यशवंत राव चव्हाण महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी, नासिक, महाराष्ट्र – www.ycmou.digitaluniversity.ac

12. मध्य प्रदेश भोज ओपन यूनिवर्सिटी, भोपाल – www.bhojvirtualuniversity.com

13. कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी, मैसूर, कर्नाटक – www.ksoumysore.edu.in

14. नेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी, कोलकाता – www.wbnsou.ac.in

15. तमिलनाडु ओपन यूनिवर्सिटी, चेन्नई, तमिलनाडु – www.tnou.ac.in

ओपन से पढाई करने के फायदे :-

  • एजुकेशन के साथ साथ दूसरी पढाई भी की जा सकती है।
  • पढाई के लिए विशेष ओपन क्लासेज।open learning
  • ग्रेजुएशन की पढाई के लिए बेस्ट।
  • समय रहने पर कर सकते है पढाई।
  • उम्र की कोई सीमा नहीं।
  • एडमिशन लेना आसान, फीस भी कम।
  • नियमों के सम्बन्ध में लचीला।
  • सभी कोर्स की फेस दूसरों की मुकाबले काफी कम होती है।
  • एकेडेमिक जानकारियों के लिए बेस्ट कोर्स।
  • वीकेंड क्लासेज की सहूलियत।
  • इ-क्लासेज के साथ साथ रेगुलर क्लासेज की सुविधा।
  • असाइनमेंट सबमिट करने की जल्दी नहीं।
  • ऑनलाइन एक्साम्स की भी सुविधा।

टेंशन फ्री पढाई :-

आज के समय में डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम काफी तेजी से लोकप्रिय हो रहे है। इसमें रेगुलर कॉलेज की तरह एडमिशन लेने के बाद क्लासेज लेना जरुरी नहीं होता। इससे स्टूडेंट्स पढाई करने के साथ साथ जॉब या दूसरे कॉम्पिटिटिव एक्साम्स की भी तैयारी कर सकते है। रेगुलर और इन प्रोग्राम्स के सिलेबस में ज्यादा अंतर नहीं होता है। ओपन से एक्साम्स पास करने के बाद मिलने वाली डिग्री हर जगह रेगुलर के मुताबिक ही मान्य होती है।

अब तो आप समझ ही गए होंगे की ओपन से पढाई करना और रेगुलर से पढाई करना लगभग एक जैसा ही होता है। फर्क केवल इतना होता है की रेगुलर में आपको रोजाना कॉलेज जाना होता है जबकि ओपन में वीकेंड या सप्ताह में 1 दिन कॉलेज जाने की आवश्यकता होती है। एक्साम्स पैटर्न भी दोनों का लगभग एक जैसा ही होता है। और फाइनल ईयर कम्पलीट करने के बाद मिलने वाली डिग्री हर जगह मान्य होती है।