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पहला नवरात्र ऐसे कलश बैठाएं!

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हिन्दू धर्म में खास महत्व रखने वाले नवरात्री पर्व को पुरे भारत और उससे सटे कुछ क्षेत्रों में बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। जिसमे माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व देवी शक्ति (देवी दुर्गा) को समर्पित है।

इन दिनों भक्त व्रत उपवास, माँ की अखंड ज्योति, जौ की खेती, और अग्यारी आदि करके माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करते है। इन्ही में से एक अनुष्ठान है कलश स्थापना जिसे घटस्थापना भी कहा जाता है।

नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत इसी अनुष्ठान से की जाती है। शास्त्रों के अनुसार एक विशेष अवधि के दौरान घटस्थापना की जाती है। जिसके लिए कुछ निर्देशों और नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।

माना जाता है घटस्थापना करके ही देवी शक्ति का आह्वान किया जाता है। ऐसे में यदि आप गलत समय और गलत विधि से घटस्थापना करते है तो देवी रुष्ट हो सकती है। धर्ग्रन्थों में इसे लेकर विशेष चेतावनी भी दी गयी है जिसके अनुसार गलत समय में घटस्थापना करना देवी को क्रोध में ला सकता है, वहीं अमावस्या और रात्रि में भी घटस्थपना को निषेध माना गया है।Navratr kalash sthapna

ज्योतिषियों की माने तो इसके लिए सबसे शुभ दिन और शुभ समय केवल एक ही दिन होता है, जो प्रतिपदा होता है। लेकिन अगर किसी कारणवश उस समय कलश स्थापना न कर पाए तो अभिजीत मुहूर्त में स्थापना की जा सकती है। माना जाता है घटस्थापना दोपहर से पहले ही कर लेनी चाहिए। आगे हम आपको कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और सही विधि बताने जा रहे है।

कलश स्थापना 2017 :

वर्ष 2017 में कलश स्थापना के लिए 21 सितम्बर 2017, बृहस्पतिवार सबसे शुभ दिन है।

इस दिन घटस्थापना का मुहूर्त प्रातः 06:18 से सुबह 08:10 मिनट तक रहेगा।
मुहूर्त की अवधि 1 घंटा 52 मिनट है।

प्रतिपदा तिथि 20 सितम्बर 2017, बुधवार सुबह 10:59 से प्रारंभ होकर अगले दिन 21 सितम्बर 2017, वीरवार सुबह 09:57 पर समाप्त होगी।

कलश स्थापना कैसे करें?

कलश स्थापना करने के लिए सबसे पहले आपको जरुरी समानों की आवश्यकता होगी। जिसकी सूचि हम नीचे दे रहे है।

कलश स्थापना के लिए जरुरी सामान :-

  • चौड़े और खुले मुंह वाला मिटटी का बर्तन।
  • अनाज बोने के लिए साफ़ मिट्टी।
  • सात अलग अलग प्रकार के अनाज के बीज।
  • शुद्ध जल से भरा हुआ सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का कलश।
  • मोली (रक्षा सूत्र)।
  • साबुत सुपारी।
  • कलश में रखने के लिए सिक्के।
  • अशोक या आम के 5 पत्ते।
  • कलश को ढकने के लिए मिट्टी का ढक्कन।
  • साबुत चावल।
  • एक पानी वाला नारियल।
  • लाल कपडा या चुनरी।
  • फूलों से बनी हुई माला।
  • गंगाजल।

नवरात्री कलश स्थपना विधि :-

शास्त्रो और पुराणों के अनुसार कलश स्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को शुद्ध करना चाहिए जिसके लिए आप गंगाजल का प्रयोग कर सकते है। इसके बाद एक लकड़ी का फट्टा रखकर उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछाना ले। इस कपड़े पर थोड़े से चावल रखे। चावल रखते समय सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करना चाहिए क्योकि किसी भी शुभ कार्य से पूर्व उनका नाम सबसे पहले लिया जाता है। एक मिट्टी के पात्र (छोटा समतल गमला) में मिटटी डाले और जौ बोएं। इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करना चाहिए। कलश पर रोली से स्वस्तिक या ऊं बनाये।

कलश के मुख पर रक्षा सूत्र बांधना चाहिए इससे कलश भी शुद्ध हो जाता है। कलश में सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखे। कलश के मुख को ढक्कन से ढंक देना चाहिए। ढक्कन पर चावल भर देना चाहिए। अब एक नारियल ले और उस पर चुनरी लपेटकर रक्षा सूत्र से बांधे। बांधते समय 11 या 1 रूपए भी चुन्नी के साथ बांधे। इस नारियल को कलश के ढक्कन पर रखते हुए सभी देवताओं का आवाहन करें। अंत में दीप जलाकर कलश की पूजा करनी चाहिए। कलश पर फूल और मिठाइयां चढ़ानी चाहिए। इसके पश्चात् विधि अनुसार देवी की पूजा करके उनका पाठ करें और उनकी आरती गाकर पूजा को सम्पन्न करें.

नोट :- नवरात्र में देवी पूजा के लिए जो कलश स्थापित किया जाता है वह सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का ही होना चाहिए। लोहे या स्टील के कलश का प्रयोग पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

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