राखी बांधने का शुभ समय रक्षाबंधन 2018 में और ऐसे बांधे अपने भाई को राखी

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Rakhi Bandhne ka shubh muhurat 2018 raksha bandhan muhurat : रक्षा बंधन भाई-बहन का त्यौहार है। बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है, जिसे राखी कहा जाता है। रक्षा बंधन सावन की पूर्णिमा को मनाया जाता है। राखी सामान्यतः भाई बहनों का त्यौहार है पर इस त्यौहार को ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता) को भी बाँधी जाती है। सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बाँधी जाती है।

बहनें राखी क्यों बांधती हैं?

रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। यह प्रथा प्राचीन समय से चली आ रही है। कहा जाता है भाई की कलाई पर राखी बांधते समय बहनें उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं। जबकि भाई उन्हें जीवनभर उनकी रक्षा करने का वचन देता है।

राखी वाले दिन बहनें सुबह जल्दी जागकर नहा धोकर भगवान की पूजा करके भाई को तिलक लगाकर राखी बांधती है और उन्हें मिठाई खिलाती है। भाई भी उन्हें उपहार देते हैं। भाई को राखी बांधने तक बहनें कुछ भी खाती-पीती नहीं हैं। भाइयों की शादी के बाद बहने अपने भाई की पत्नी को भी राखी बांधती है ताकि उन दोनों का रिश्ता हमेशा सही सलामत रहे।

2018 में राखी कब है?

राखी, सावन माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है। 2018 में राखी 26 अगस्त, रविवार को मनाई जाएगी।

राखी 2018 का शुभ टाइम कब है?

रक्षाबंधन 2018 राखी मुहूर्त

2018 में रक्षाबंधन 26 अगस्त 2018, रविवार को है

राखी बांधने का मुहूर्त

रक्षाबंधन 2018 राखी बांधने का मुहूर्त = 05:59 से 17:25 तक

मुहूर्त की अवधि = 11 घंटे 26 मिनट।

रक्षाबंधन में अपराह्न मुहूर्त = 13:39 से 16:12 तक।

मुहूर्त की अवधि = 02 घंटे 33 मिनट।

रक्षाबंधन के दिन भद्रा सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी।

सावन पूर्णिमा तिथि प्रारंभ = 25 अगस्त 2018, शनिवार 15:16 बजे
सावन पूर्णिमा तिथि समाप्त = 26 अगस्त 2018, रविवार 17:25 बजे

राखी बांधने का मंत्र :

राखी बांधते समय एक खास मंत्र का उच्चारण किया जाता है जो निम्नलिखित है (Raksha bandhan Mantra) :

मंत्र : ‘येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे! मा चल! मा चल!!’

इसका अर्थ है – जिस प्रकार राजा बलि में रक्षा सूत्र से बंधकर विचलित हुए बिना अपना सब कुछ दान कर दिया, उसी प्रकार हे रक्षा! आज मैं तुम्हें बांधता हूं, तू भी अपने उद्देश्य से विचलित न होना और दृढ़ बना रहना ॥

भद्रा का ध्यान रखें 

राखी बांधने का सबसे शुभ समय अपराह्न का होता है जो दोपहर के बाद का समय होता है। यदि अपराह्न का समय भद्रा की वजह से सही नहीं है तो प्रदोष काल का समय भी राखी बांधने के लिए उपयुक्त माना जाता है। 

भद्रा को राखी बांधने के लिए शुभ नहीं माना जाता। मान्यताओं के अनुसार, किसी भी तरह के शुभ कार्य को भद्रा में नहीं करना चाहिए। व्रतराज नामक ग्रंथ, में भी रक्षाबंधन की सभी विधियों को भद्रा समाप्त होने के पश्चात् करने की सलाह दी जाती है।