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रमज़ान रोज़े रखने के नियम

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Ramzan me roza rakhne ke niyam : रमज़ान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना होता है जिसे बहुत पाक और पवित्र माना जाता है। इस पुरे महीने में पुण्य और अच्छे काम किये जाते है। अल्लाह ने क़ुरान में, रमज़ान के पुरे महीने रोजा रखने का नियम बनाया है। रमजान में रोजा रखना इस्लाम का मुख्य स्तंभ है। इसे रखना हर उस मुलमान के लिए जरुरी होता है जो मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ हो।

रोजे रखने का मतलब होता है, आप तकवा को प्राप्त करें यानी अल्लाह से डरें। क्योंकि जिस इंसान को तकवा होता है वह अच्छे काम करना पसंद करता है और अल्लाह के डर से बुरे काम नहीं करता। इस्लाम धर्म में रोजे अल्लाह की रहमत पाने के लिए रखें जाते है।

रमज़ान में रोजे रखना हर युवा और हर उस व्यक्ति के लिए जरुरी होता है जो कोई यात्रा नहीं कर रहे है। महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान रक्त स्त्राव और प्रसव के बाद के रक्त स्त्राव के दौरान रोजे नहीं रखने चाहिए। गर्भवती स्त्री को भी रोजे रखना अनिवार्य नहीं है। इस्लाम धर्म में रमज़ान को पाक महीना माना जाता है इसलिए जो लोग इस समय रोजे रखते है उन्हें बहुत से नियमों को मानना होता है। यहाँ हम उन्ही नियमों के बारे में बता रहे है जिनका रमजान के दौरान पालन करना चाहिए। ताकि आपका रोज़ा अल्लाह से स्वीकार हो।

रमज़ान में रोज़ा रखने के नियम :-

सूरज उगने से पहले सहर (रोज़े की शुरुआत) :

रोजे की शुरुवात इसी से होती है। इस्लाम धर्म में बताया गया है की यदि आप सहर में कुछ खाए बिना ही रोज़ा रखते हैं तो आपका रोज़ा मान्य नहीं होता। सहर खाने से भी कई लाभ मिलते है। सहर का सही समय दिन उगने से पहले का आखिरी आधा घंटा होता है। या फ़जर की अजान के समय भी सहर किया जा सकता है। सहर करते समय रोज़ा रखने की दुआ भी पढ़ी जाती है। इसमें खजूर खाना बहुत जरुरी होता है। इसलिए सहर में खजूर जरुर खाएं।

दिन छुपने के साथ ही इफ्तार (रोज़ा खोले) :अहमदाबाद इफ्तार सहरी का समय

रमज़ान का रोज़ा इसी समय खोला जाता है। इस्लाम धर्म के अनुसार दिन भर के रोज़े के बाद शाम के समय दिन छुपने के बाद इफ्तार कर लेना चाहिए। इफ्तार के समय आप अपनी मनचाही खाने की चीजों का सेवन कर सकते है। इफ्तार करने का सही समय शाम को दिन छुपने के बाद का होता है। इफ्तार में भी खजूर खाना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि रोजा खजूर से ही खोला जाता है इसलिए इफ्तार में खजूर जरुर खाएं।

यदि कुछ खा-पी लें तो?

अगर कोई गलती से कुछ खा पी लेते है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि इससे आपका रोज़ा खराब नहीं होगा। अगर ऐसा हो गया है तो कोई बात नहीं आप रोज़े जारी रख सकते है। लेकिन अगर आप जान-बुझकर रोजे के दौरान कुछ खा पी लेते है तो रोज़ा अमान्य हो जाएगा।

उलटी होने पर :

अगर आपको रोज़े के कारण उल्टियां हो रही है। तो परेशान होने की जरूरत नहीं है आपका रोजा मान्य है। लेकिन अगर यह सब आप जन बुझकर कर रहे है तो आपका रोज़ा अमान्य हो जाएगा।

नहाने के लिए :

रोज़े के दौरान नहाने की पूरी इजाजत है। अधिक तापमान होने पर या अधिक प्यास लगने पर रोज़ा रखने वाले नहा सकते है।

हमबिस्तर होना :

अगर कोई मियां बीबी रोज़ा रखने के दौरान हमबिस्तर हो जाते है तो उन्हें 60 दिनों तक रोज़ा रखना पड़ता है। क्योंकि रमजान में मियां बीबी का हमबिस्तर होना दुरुस्त नहीं माना जाता। अगर कोई यह गलती करता है और 60 दिनों तक रोज़ा रखने में सक्षम नहीं है तो आपको 60 गरीब लोगों को खाना खिलाना होगा। इसे कफ्फराह कहा जाता है।

मासिक धर्म के समय रोज़ा नहीं रखें :

अगर कोई औरत रोज़ा रख रही है और इस दौरान उनका मासिक धर्म शुरू हो जाता है तो रोजा अमान्य हो जाता है। क्योंकि रमजान में रखे जाने वाले रोज़े पाक माने जाते है और यह आपको दूषित कर देता है। इसलिए औरतों को इस समय में रोजे नहीं रखने चाहिए। फिर यह चाहे सहर के बाद हो या इफ्तार से पहले। इस दिन का रोजा आप बाद में रख सकते है।

खाने को चखने के लिए :

अगर आप परिवार के लिए कुछ बना रहीं है और आप उसे चखना चाहती है तो चख सकती है लेकिन इसका स्वाद हलक के नीचे नहीं जाना चाहिए। क्योंकि आपको केवल खाने में नमक और मसाले की मात्रा को जांचना है। चखने के तुरंत बाद अपना मुंह धो लें।

किस करना या बीबी को छूना :रोज़े की हालत में हमबिस्तर

रमजान के महीने में इस्लाम मियाँ बीबी को किस करने और किसी भी तरह की यौन क्रिया करने की इजाज़त नहीं नहीं देता। इस समय में यह करना अपराध माना जाता है। इसलिए इस समय में ये कतई न करें।

बीमारी की स्थिति :

अगर कोई इंसान ठीक नहीं है या उनकी तबियत दुरुस्त नहीं है तो उन्हें रोज़ा रखने की जरूरत नहीं है। क्योंकि शारीरिक रूप से दुरुस्त नहीं होने पर, रोज़ा रखने से आपको कमजोरी हो सकती है। इसलिए इस बात का खास ध्यान रखें।

जानाबाह :

अगर कोई मियां बीबी रात में एक दुसरे के साथ हमबिस्तर होना चाहते है और सुबह घुसल नहीं लेते है तो आप जानाबाह हो जाते है। ऐसे में रोज़ा मान्य नहीं होगा।इसलिए प्यार करने के बाद सहर से पहले एक बार घुसल ले लें। इससे आप पाक हो जाएंगे और आपका रोज़ा मान्य हो जाएगा।


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