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रोज़ा रखने और खोलने की दुआ हिंदी में

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Roza Dua Hindi English Urdu

रोज़ा रखने और खोलने की दुआ हिंदी में, इंग्लिश में और उर्दू में

इस्लाम धर्म में रमज़ान को सबसे पवित्र और पाक महीना कहा जाता है। इस पुरे महीने सभी मुस्लिम अल्लाह की इबादत में रोज़े रखते है और पुरे दिनभर कुछ खाते पीते नहीं है। इस्लाम धर्म के मुताबिक शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हर व्यक्ति को रमजान में रोजा रखना चाहिए। रमज़ान का महीना अच्छे और पवित्र कामों को करने के लिए जाना जाता है। जिसमे दान देना, गरीबों की मदद करना, अच्छे काम करना आदि शामिल है।

रोजे रखने का महत्व :

इस्लाम धर्म में रमजान के दौरान रोज़े रखना बहुत पाक माना जाता है। इसलिए सभी मुस्लिम अल्लाह के लिए पुरे महीने रोज़े रखते है। रमजान को इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक माना जाता है। यह महीना 29 से 30 दिन का होता है जिसका अनुमान चाँद की मौजूदगी के हिसाब से लगाया जाता है। मुस्लिम मान्यता के अनुसार, रमजान के महीने में ही पाक क़ुरान लिखी गई थी। इसलिए इस महीने में मुस्लिम रोज़ा रखते है और अपनी रूह को पाक करके अल्लाह की इबादत करते है। क़ुरान-ए-पाक में भी सभी मुस्लिम को इस महीने में रोज़ा रखने की बात कही गई है।

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

इफ्तार दुआ, इफ्तार से पहले सूर्यास्त के समय की जाती है। क्योंकि इस समय विनीतता और विनम्रता एकत्रित होती है और वह रोज़ेदार होता है। और ये सब (तत्व) दुआ के कबूल होने के कारणों में से एक है। जहाँ तक इफ्तार के बाद दुआ का संबंध है तो उस समय दिल को आराम मिल जाता है और वह खुश हो जाता है और संभवतः वह गफलत का शिकार हो जाता है। लेकिन नबी सल्लल्लाहु अलैहि व् सल्लम से एक दुआ वर्णित है जो यदि सही है तो वह इफ्तार के बाद ही होगी और वह यह है :

ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابتَلَّتِ العُروقُ ، وَثَبَتَ الْأجْرُ إِنْ شَاءَ اللهُ

“ज़हा-बज़्ज़मा-ओ वब्ब-तल्लतिल उरूक़ो व सबा-तल अज्रो इन-शा-अल्लाह”

प्यास चली गई, रगें तर हो गईं, और अज्र व सवाब पक्का हो गया, यदि अल्लाह तआला ने चाहा।

इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है और अल्बानी ने सहीह सुनन अबू दाऊद (2066) मे हसन कहा है।
तो यह दुआ इफतार के बाद ही होगी, इसी तरह कुछ सहाबा से यह दुआ वर्णित है :

اللهم لك صمت وعلى رزقك أفطرت

“अल्लाहुम्मा लका सुम्तो व अला रिज़किक़ा अफ्तरतो”

ऐ अल्लाह ! मैं ने तेरे ही लिए रोज़ा रखा, और तेरी ही प्रदान की हुई रोज़ी पर रोज़ा खोला।


रमज़ान में रोज़ा रखने की दुआ (Roza Rakhne Ki Dua)

وَبِصَوْمِ غَدٍ نَّوَيْتَ مِنْ شَهْرِ رَمَضَانَ

(English Meaning : I intend to keep the fast for the month of Ramadan)

“Wa bisawmi ghadinn nawaiytu min shahri ramadan”


रमज़ान में रोज़ा खोलने की दुआ (Roza Kholne Ki Dua)

اللَّهُمَّ اِنِّى لَكَ صُمْتُ وَبِكَ امنْت وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَعَلَى رِزْقِكَ اَفْطَرْتُ

(English Meaning : “O Allah! fated for you and I believe in you (and i put my trust in you) and I break my fast with your sustenance”)

“Allahumma inni laka sumtu wa bika aamantu [wa ‘alayka tawakkaltu] wa ‘ala rizq-ika aftarthu”


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