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पीरियड्स में पैड लगाने का सही तरीका

सैनिटरी पैड का इस्तेमाल कैसे करें
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पीरियड्स और सैनिटरी पैड

मासिक धर्म हर महिला को होने वाली आम समस्या है जिससे सभी को 28 से 30 दिन के अंतराल के बाद झेलना पड़ता है। मासिक धर्म को पीरियड्स, एम सी यानि मेंस्ट्रुअल साइकल, माहवारी आदि के नामों से भी जाना जाता है। लोग इसे लेकर अपनी-अपनी सोच रखते हैं।

जो महिलाएं पहले से ही इस समस्या को झेल रही है वो इसे हैंडल करना जानती है। लेकिन टीनएजर्स इस पर बात करने से अभी भी कतराते हैं। आजकल का जमाना काफी मॉडर्न हो गया है। बहुत छोटी सी क्लास से ही लड़कियों को इसके बारे में बताया जाता है। लेकिन फिर भी वो इसपर बात करने से कतराती हैं। सबसे ज्यादा स्ट्रेस उन लड़कियों को होता है जिन्हे पहली बार पीरियड्स आते हैं। सामान्यतः पीरियड्स 12 से 15 वर्ष की आयु तक शुरू हो जाते हैं। ऐसे तो सभी उन्हें इन सबके के बारे में समझा देते हैं। लेकिन फिर भी उन्हें दाग लगने का डर बना रहता है। सैनिटरी नैपकीन या पैड इसी समस्या का हल है।

सैनिटरी पैड क्या है?

एक विशेष प्रकार की रुई से बना सैनिटरी पैड मासिक धर्म के दौरान इस्तेमाल किया जाने वाले सबसे बढिया ऑप्शन है। पहले यह पैड नहीं हुआ करते थे तब महिलाएं कपड़ा यूज करती थी। पर अब कपडे की जगह सैनिटरी पैड का इस्तेमाल किया जाता है। यह आपको किसी भी मेडिकल स्टोर पर मामूली सी कीमत पर मिल जाएगा। जिसे आप अपनी जरूरत के अनुसार खरीद सकती हैं।

सैनिटरी पैड का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?

मासिक धर्म के दौरान प्राइवेट पार्ट से रक्त का स्त्राव होता है। सैनिटरी पैड इसी रक्त को सोखने का काम करता है। एक पैड लगभग 4 से 6 घंटे तक इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर हैवी है तो 3 से 4 घंटे के बीच पैड बदल लेना चाहिए। अगर नार्मल है तो कुछ देर और पैड इस्तेमाल किया जा सकता है।

पहली बार पीरियड्स आने पर सैनिटरी नैपकीन

जिन लड़कियों को पहली बार पीरियड्स आते हैं उन्हें इसे इस्तेमाल करने का तरीका नहीं पता होता। ऐसे तो घरवाले इस्तेमाल के बारे में अच्छे से बता देते हैं लेकिन शुरुवात को इसे एडजस्ट करने में कुछ दिक्क्तें आती हैं। इसीलिए यहाँ हम आपको पीरियड्स में पैड कैसे लगाएं वो बता रहे हैं?

पैड का इस्तेमाल कैसे करें?

सैनिटरी पैड का इस्तेमाल करना बहुत आसान है। इसके लिए आप इन स्टेप्स को फॉलो करें –

पीरियड्स के समय आपको V-Shape पैंटी पहननी चाहिए। इसे सैनिटरी पैड लगाने में आसानी होगी। पैड लगाने के लिए सबसे पहले पैड के बैकसाइड पर लगे कागज को निकालें और पैंटी पर लगाएं। पैड जा मध्य भाग पैंटी के ठीक बीच में होना चाहिए। अब विंग्स से पेपर निकालें और उसे पैंटी के दोनों तरफ लपेट दें और अच्छे से दबा दें। ताकि पैड पैंटी से चिपक जाए।

पैड गंदा हो जाने के बाद पेंटी से निकालें और कागज में अच्छी तरह लपेट दें। और कूड़ेदान में डाल दें। ध्यान रहे पैड को बिना पेपर में लपेटे नहीं फेंके। इससे बीमारियां फैलने की संभावना हो सकती है। एक बात और पैड को कभी भी फ्लश ना करें, हमेशा कूड़ेदान में ही फेंके।

सैनिटरी पैड का चुनाव कैसे करें?

पीरियड्स में पैड का इस्तेमाल सभी करते हैं। लेकिन ये भी जानना जरुरी है की अपने लिए पैड का चुनाव कैसे करें? यहाँ हम कुछ टिप्स दे रहे हैं जिनके हिसाब से आप अपने लिए पैड का चुनाव कर सकती है।

Short Pad For Normal Flow
  • नार्मल फ्लो होने पर आप रेगुलर साइज के पैड का इस्तेमाल कर सकती हैं।
Regular Sanitary Pad
  • हैवी फ्लो होने पर लंबे आकार वाले पैड का इस्तेमाल करना उचित रहेगा।
  • हैवी फ्लो होने के कुछ घंटों बाद अगर लगता है की अब फ्लो कम हो रहा है तो आप रेगुलर पैड का इस्तेमाल कर सकती हैं।
Long Pad for Heavy Flow

कुछ लड़कियां दो अलग-अलग प्रकार के पैड्स का इस्तेमाल करती है। एक हैवी फ्लो के लिए और दूसरा हलके दिनों के लिए। रात के लिए विशेष पैड का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। ये पीछे की ओर से अधिक लंबे और चौड़े होते हैं। तो जब आप रात में करवट लेती हैं तो दाग कपड़ो पर नहीं लगता। आप चाहे तो इनका इस्तेमाल भी कर सकती हैं।

कितनी बार बदलें सैनिटरी पैड?

लड़कियों को लगता है की मासिक धर्म के दौरान बहुत ज्यादा रक्तस्राव होता है। जबकि ऐसा नहीं है, पीरियड्स के दौरान अधिकतर लड़कियों को आमतौर पर 4 से 12 चम्मच रक्तस्त्राव होता है, जो बहुत ज्यादा नहीं होता।

हाइजीन के लिए आप पैड को हर 4 घंटे में बदलें। हालाँकि शुरुवाती दिनों में आपको ज्यादा रक्तस्राव हो सकता है। ऐसे में हो सकता है 2 से 3 घंटे में भी पैड बदलने की जरुरत पड़ जाए। इसलिए आप फ्लो के हिसाब से ही पैड चेंज करें।

क्या रात में अलग पैड की जरूरत होती है?

रात में सोते समय हम करवट बदलते रहते हैं। ऐसे में रेगुलर नैपकीन का इस्तेमाल करने से दाग बेडशीट और कपड़ों पर लग सकता है। इसलिए अगर संभव हो तो रात में वो पैड इस्तेमाल करने चाहिए जो अधिक लंबे और पीछे से चौड़े हों। ताकि दाग की कोई चिंता ना रहे।