किन चीजों को खाने से शिशु का रंग काला हो जाता है?

क्या खाने से शिशु काला होता है?
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किन चीजों से शिशु का रंग डार्क हो जाता है?

गर्भधारण के बाद से ही महिलाएं अपने आने वाले शिशु के रंग को लेकर चिंतित हो जाती है। सभी के मन में यही प्रश्न उठते हैं की शिशु का रंग कैसा होगा? शिशु का रंग ज्यादा डार्क तो नहीं होगा? यही सब सोचकर वे दूसरे महीने से ही शिशु का रंग गोरा करने के उपाय करने लगती है।

दोस्तों, गर्भ में पल रहे शिशु का रंग शरीर में मौजूद मेलेनिन के स्तर पर निर्भर करता है। मेलेनिन शरीर में मौजूद एक प्रोटीन होता है जो स्किन, बाल और आँखों के कलर को निर्धारित करता है। जिसके शरीर में जितना ज्यादा मेलेनिन होगा उसका रंग उतना ही डार्क होता है। मेलेनिन कई तरह के सेल्स के समूह से बना होता है। धूप के सम्पर्क में आने पर यह सेल्स विकसित होने लगते है। इसी कारण अधिक समय तक धूप में रहने से त्वचा का रंग काला हो जाता है।

गर्भावस्था के दौरान किन कारणों से शिशु का रंग डार्क हो जाता है?

मेलेनिन के अलावा माता-पिता के जीन्स पर भी शिशु का रंग निर्भर करता है। माता पिता का जैसा रंग होगा शिशु भी उसी कॉम्प्लेक्शन का होगा। कुछ ही मामले अपवाद हो सकते हैं जब शिशु का रंग माता-पिता के कॉम्प्लेक्शन से भिन्न हो।

गर्भवती महिला का खान-पान भी शिशु के रंग को निर्धारित करता है। यानी गर्भवती महिला जैसा खाना खाएंगी शिशु का रंग भी वैसा ही होगा।

गर्भावस्था के दौरान, आयरन लेना बहुत जरुरी होता है। क्यूंकि आयरन शरीर में खून की कमी को पूरा करता है और गर्भ में शिशु के विकास में सहयोग करता है। लेकिन अगर आप आयरन की बहुत अधिक मात्रा का सेवन करती हैं तो आपके शिशु का रंग डार्क हो सकता है। जी हां, दोस्तों शरीर में मौजूद आयरन की अधिक मात्रा ही शिशु के डार्क रंग का कारण बनती है।

एक स्वस्थ और हेल्दी शिशु के लिए गर्भावस्था के दौरान विटामिन्स और मिनरल्स लेना बहुत जरुरी होता है पर कई लोगों का मानना है की ज्यादा आयरन लेने से गर्भ में शुरू के रंग में फर्क पड़ता है। जबकि गर्भावस्था के दौरान शरीर में आयरन की सही मात्रा होना बहुत जरुरी होता है। आयरन इन चीजों में पाया जाता है – अंडे का पीला भाग, सालमन मछली, पालक, गाजर, टमाटर, अखरोट, स्ट्रॉबेरी, अनार, अंगूर और कीवी।

पर इसका मतलब ये नहीं है की आप इन चीजों को खाना छोड़ दें। क्यूंकि अगर आप इन चीजों को नहीं खाएंगी तो गर्भ में आपके शिशु की ग्रोथ रुक जाएगी। और शिशु जन्म लेने के बाद भी स्वस्थ नहीं रहेगा। अगर आप आयरन का भरपूर मात्रा में सेवन नहीं करेंगी तो आपको भी गर्भावस्था के दौरान कई तरह की शारीरिक समस्यायों का सामना करना पड़ सकता है। आयरन की कमी के कारण डिलीवरी के समय में काफी दिक्क्त होती है।

इसीलिए आप आयरन जरूर खाएं। पर साथ में और भी विटामिन्स लें – आप विटामिन ऐ, विटामिन सी, नारियल पानी, दूध, केसर दूध, बादाम दूध आदि का भी भरपूर सेवन करें इससे आयरन बैलेंस रहेगा और शिशु का रंग सामान्य रहेगा।

शिशु का रंग काला होने से बचाने के लिए क्या करें?

अगर आप अपने शिशु का रंग काला होने से बचाना चाहती हैं तो आपको बैलेंस डाइट लेनी होगी। और खाने-पीने के समय का ध्यान रखना होगा। ताकि शरीर में किसी भी पोषक तत्व की कमी या अधिकता ना हो। इसके साथ-साथ आपको अपने स्वास्थ्य का भी खास ध्यान रखना होगा। अब आप अच्छी तरह जान गयी होंगी की किन कारणों से गर्भ में शिशु का रंग काला हो जाता है और उसके बचाव के क्या उपाय है।

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क्या खाने से शिशु काला होता है? शिशु का रंग डार्क होने के कारण