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शिशु के जन्म से पहले जानिए की शिशु रात में सोएगा या दिन में?

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शिशु गर्भ में क्या करता है

जन्म के बाद ही शिशु गतिविधिया नहीं करता है बल्कि गर्भ में ही शिशु की हरकते शुरू हो जाती है, लेकिन फ़र्क़ सिर्फ इतना होता है, की जन्म के बाद शिशु आपके सामने कुछ न कुछ नया सीखता है और करता है। लेकिन गर्भ में आप उसके विकास को नहीं देख पाती है, बस गर्भवती महिला को गर्भ में शिशु की हलचल से ही अंदाजा लगाना पड़ता है की शिशु पैर मार रहा है। जबकि सच तो यह है की गर्भ में भी शिशु बहुत सी ऐसी हरकते करता जो आपको जन्म के बाद देखने की मिलती है। जैसे की शिशु आपकी आवाज़ को सुनकर हलचल करता है, हिचकियाँ लेता है, डरता है, पलके झपकाता है, घूमता है, अपनी पोजीशन बदलता है, अपने हाथ पैर मारता है आदि।

लेकिन आपको इनका अहसास नहीं होता है, बस गर्भ में जब शिशु खेल रहा होता है या घूम रहा होता है, तो आपको शिशु की हलचल महसूस होती है। और जब शिशु घूम कर थक जाता है तो वह गर्भ में आराम भी करता है, यानी केवल जन्म के बाद ही शिशु के सोता या उठता नहीं है बल्कि गर्भ में भी शिशु सोता है। और शिशु की हलचल को लेकर ही महिलाएं अंदाजा लगाने लगती है की शायद शिशु दिन में सोता है और रात को जगता है, या रात को सोता है और दिन में जागता है। जबकि सच तो यह है की गर्भ में शिशु ज्यादा से ज्यादा समय तक सोता ही है, खासकर प्रेगनेंसी की पहली दो तिमाही में ज्यादा से ज्यादा समय के लिए सोता है।

गर्भ में शिशु के होने से कैसे पता चलता है की शिशु दिन में सोएगा या रात को

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला की बॉडी में होने वाले लक्षणों को देखकर घर के बड़े बुर्जुग बहुत से अंदाज़े लगाते हैं। जैसे की गर्भ में लड़का है या लड़की, वैसे ही गर्भ में शिशु की हरकतों को देखकर यह अंदाजा भी लगाया जाता है की जन्म के बाद शिशु दिन में अधिक सोएगा या रात को। जैसे की यदि शिशु दिन में अधिक एक्टिव रहता है तो इसे लेकर कहा जाता है की शिशु रात में अधिक सोएगा, जबकि यदि गर्भ में शिशु रात को ज्यादा हरकतें करता है तो इसे लेकर यह अंदाजा लगाया जाता है की शिशु दिन में सोएगा। केवल गर्भ से ही नहीं ऐसा भी कहा जाता है की जो शिशु दिन में जन्म लेते हैं वो रात को अधिक सोते हैं, जबकि जो शिशु रात के समय पैदा होते हैं वो दिन में अधिक सोते हैं।

यह बात पूरी तरह से सच हो ऐसा जरुरी नहीं है, क्योंकि शिशु जन्म के बाद किस समय अधिक सोएगा यह तो उसी समय पता चलेगा। या फिर धीरे धीरे जैसे आप उसका रूटीन बनाने लगेंगी या शिशु का विकास बढ़ेगा वैसे वैसे शिशु के सोने उठने सभी के टाइम का पता चल जाएगा।