शिशु का उल्टी और दस्त कैसे रोकें दाँत निकलते समय

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ज्यादातर बच्चों को पांच, छह, या सात महीने की उम्र में दाँत निकलने शुरू हो जाते है। कुछ बच्चों के दाँत थोड़ी और देरी से भी निकलते है तो ऐसे में चिंता करने की कोई भी बात नहीं होती है। दाँत निकलते समय बच्चे के साथ माँ बाप को भी काफी परेशानी का भी सामना करना पड़ता है। और आप यह कह सकते है की दाँत निकलना बच्चे की जिंदगी का एक बहुत बड़ा पड़ाव होता है। और हर बच्चे को इससे गुजरना पड़ता है।

दाँत निकलने पर बच्चे तकलीफ के कारण बहुत परेशान करते है, कई बार दूध भी नहीं पीते है। इसके अलावा बच्चे को बुखार उल्टी दस्त जैसी परेशानी का सामना भी करना पड़ता है। लेकिन क्या आप जानते है की बच्चे के दाँत निकलने के कारण शिशु को कभी उल्टी दस्त नहीं लगते है। बल्कि जब बच्चे के दाँत निकल रहे होते है तो मसूड़ों में सूजन, दर्द व् खारिश होना आम बात होती है। जिसके कारण बच्चे आस पास मैं राखी चीजों को मुँह मैं लेने लगते है।

क्योंकि ऐसा करने से उन्हें आराम महसूस होता है। और जब बच्चे मुँह में कोई न कोई चीज लेते है तो उसके साफ़ न होने के कारण उसपर होने वाला बैड बैक्टेरिया मुँह में जाता है। जिसके कारण संक्रमण फैलने का खतरा रहता है और शिशु का पेट प्रभावित होता है। जिससे शिशु को उल्टी व् दस्त की परेशानी का सामना करना पड़ता है। और यदि बच्चे को ज्यादा परेशानी हो तो आपको तुरंत डॉक्टर की राय भी लेनी चाहिए। तो आइये अब हम आपको बताते है की दाँत निकलते समय बच्चे को किस प्रकार उल्टी दस्त से बचाया जा सकता है।

शिशु के दाँत निकलने के लक्षण:-

  • इस दौरान शिशु के मुँह से लार टपकने लगती है।
  • हर एक चीज को मुँह में डालकर चबाने की कोशिश करना।।
  • कई बच्चों को इस समय तेजी से बुखार आने लगता है।
  • उल्टी व् दस्त की परेशानी होना।
  • बच्चे का कुछ खाने पीने का मन न करना।
  • चिड़चिड़ा होना, जिद्द करना।
  • बच्चे का नींद अच्छे से न लेना।
  • त्वचा का संवेदनशील होना।
  • मसूड़ों में सूजन व् खारिश होना।

शिशु को दस्त से बचाने के टिप्स:-

साफ़ सफाई का ध्यान रखें:-

शिशु के दाँत निकलने पर उल्टी दस्त का सबसे बड़ा कारण होता है साफ़ सफाई का ध्यान न रखना। ऐसे में शिशु को इस समस्या से बचाने के लिए आप बच्चे के आस पास, उसके खिलौने, या जो चीज भी वो मुँह में लेता है उसकी साफ़ सफाई का ध्यान रखें। ऐसा करने से शिशु को इस परेशानी से बचाने में मदद मिलती है। साथ ही बच्चे के हाथ की सफाई का भी विशेष ध्यान रखें क्योंकि बच्चा हाथ को बार बार मुँह में लेता है।

केले का सेवन:-

केला दस्त रोकने के आसान उपाय है यदि आपका शिशु छह महीने से ऊपर का है तो आप उसे थोड़ा केला मैश करके खिला सकते है। ऐसा करने से उसे दस्त से आराम मिलने के साथ कैल्शियम भी भरपूर मिलेगा। जिससे उसके दांतो को मजबूत बनाने में मदद मिलने के साथ मसूड़ों को भी आराम मिलेगा।

टीथर का इस्तेमाल करें:-

आज कल बाजार में बच्चों के लिए टीथर आराम से मिल जाता है। ऐसे में बच्चा जब भी आपको परेशान करें तो उसके हाथ में टीथर को अच्छे से साफ़ करके दे देना चाहिए। इससे शिशु भी आपको परेशान नहीं करेगा और किसी तरह के बैक्टेरिया के फैलने के खतरे को भी कम किया जा सकता है।

डॉक्टर से राय लें:-

यदि शिशु को दस्त व् उल्टी की ज्यादा परेशानी हो रही है तो ऐसे में आपको एक बार डॉक्टर से भी राय लेनी चाहिए। क्योंकि यदि बच्चा ज्यादा परेशान है तो दवाई से उसे आराम मिलेगा जिससे शिशु को इस परेशानी से बचाने में मदद मिलेगी।

दाँत निकलते समय बच्चें को उल्टी दस्त होने पर इन बातों का ध्यान रखें:-

ORS का घोल:-

बच्चे के दाँत निकलने पर बच्चे को उल्टी दस्त की परेशानी होती है ऐसे में शरीर में पानी की कमी होना आम बात होती है। ऐसे में शिशु को दस्त से बचाने और शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए बच्चे को ORS का घोल देना चाहिए। इसे बनाने की विधि इसके पैकेट पर होती है, साथ ही यह किसी भी मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल जाता है।

पानी पिलाएं:-

यदि आपके घर पर ORS का घोल का पैकेट नहीं है तो आप एक लीटर पानी में आठ छोटे चम्मच चीनी और एक छोटा चम्मच नमक का मिला सकते है। और इसे फ्रिज में रखकर हर आधे घंटे में थोड़ा थोड़ा बच्चे को देते रहना चाहिए इससे बच्चे को इस समस्या से बचाने के साथ पानी की कमी को पूरा करने में फायदा होता है।

ग्राइप वाटर:-

इस तरीके का इस्तेमाल बहुत पहले से किया जाता है दस्त व् उल्टी की समस्या होने पर दिन में तीन चार बार एक चम्मच ग्राइप वाटर बच्चे को पिलाना चाहिए। ऐसा करने से शिशु को फायदा मिलता है, साथ ही आप आर्गेनिक ग्राइप वाटर का इस्तेमाल ही शिशु लिए करें।

स्तनपान:-

माँ का दूध बच्चे के लिए किसी दवाई से कम नहीं होता है ऐसे में शिशु को आपको स्तनपान करवाते रहना चाहिए। जितना शिशु पीना चाहता है उतना ही उसे पिलाना चाहिए। इसे शिशु का पेट भी भरा रहेगा, और शिशु के शरीर में पानी की मात्रा को भी सही रखने में मदद मिलती है।

बच्चे के आहार का ध्यान रखें:-

यदि आपका शिशु छह महीने से ऊपर का है तो आपको शिशु को ठोस आहार थोड़ा थोड़ा देते रहना चाहिए, जैसे की दाल का पानी, खिचड़ी और दही, दलिया, सूप आदि। ऐसा करने से शिशु को पोषक तत्व मिलते रहते है साथ ही हलके भोजन से उसका पेट भी ठीक हो जाता है। लेकिन इस बात का ध्यान दे की शिशु का खाना बनाते समय पूरी साफ़ सफाई का ध्यान दें, और साथ ही हरी सब्जियों से बनी किसी भी चीज को शिशु को न दें।

उबला हुआ पानी:-

बच्चे को समय समय पर आप पानी पिलाते रहे, और बच्चे के लिए आप जिस पानी का इस्तेमाल करें उसे अच्छे से उबाल लें। ताकि उसमे मौजूद बैड बैक्टेरिया को खत्म किया जा सकें। इससे शिशु के पेट को आराम मिलेगा, और शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

तो यदि आपका भी शिशु छोटा है और उसके भी दाँत निकलने वाले है तो आप भी इन टिप्स का इस्तेमाल करके बच्चे को होने वाली उल्टी दस्त की परेशानी से बचा सकते है। क्योंकि उल्टी दस्त लगने के कारण शिशु काफी कमजोर हो जाता है इसीलिए इस दौरान आपको शिशु का दुगुना ध्यान रखना चाहिए, ताकि शिशु के विकास में किसी भी तरह की समस्या न आए।