जन्म से एक महीने तक शिशु की देखभाल ऐसे करें

शिशु की देखभाल

छोटे बच्चे की देखभाल करना कोई आसान बात नहीं होती है खासकर पहले महीने में तो महिला को ज्यादा दिक्कत हो सकती है। क्योंकि एक तो डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में आई कमजोरी ऊपर से पहली बार माँ बन रही महिला के लिए शिशु की केयर कैसे करनी है इसके बारे में पूरी जानकारी न होना। लेकिन फिर भी महिला को घर के बड़े, डॉक्टर आदि से एक बार इस बारे में राय जरूर लेनी चाहिए। क्योंकि इस समय शिशु बहुत छोटा, कमजोर, होने के साथ उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है ऐसे में इस दौरान यदि थोड़ी सी भी लापरवाही की जाये तो इससे शिशु के बीमार होने का डर रहता है। ऐसे में महिला को शिशु की देखभाल अच्छे से करने के लिए सभी बातों का अच्छे से ध्यान भी रखना चाहिए।

शिशु के जन्म के बाद एक महीने तक ऐसे करे शिशु की केयर

जन्म के बाद शिशु की विकास में कोई कमी न आए, शिशु स्वस्थ रहे इसके लिए शिशु की देखभाल अच्छे से करना बहुत जरुरी होता है। तो लीजिये आज हम आपको शिशु के जन्म के बाद एक महीने तक उसकी देखभाल किस तरह से करनी चाहिए इसके लिए कुछ टिप्स बताने का रहे हैं।

माँ का पहला दूध

जन्म के बाद शिशु के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा होती है माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध, ऐसे में शिशु को बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए व् शिशु को बिमारियों से सुरक्षित रखने के लिए माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध जरूर पिलाएं।

शिशु की भूख

छोटा शिशु आपको बता नहीं सकता है की उसे भूख लगी है ऐसे में आपको हर दो घंटे में उसे माँ का दूध जरूर पिलाना चाहिए। और माँ के दूध के अलावा उसे पानी तक नहीं देना चाहिए। आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की शिशु को दूध पीने से आप तब तक न हटाए जब तक शिशु अपने आप पीना बंद न कर दें, क्योंकि यदि आप उसे दूध पिलाना बंद कर देंगी तो इससे वो भूखा रह सकता है जिससे वो बार बार दूध पीने के लिए रोने लग सकता है। साथ ही शिशु जब एक जगह से दूध पीलें तभी दूसरी तरफ से दूध पिलाना चाहिए और शिशु जब अपने आप स्तन को छोड़े और दूध पीने की कोशिश करे तो दूसरी जगह से पिलाना चाहिए। और एक बार में शिशु ने यदि एक जगह से दूध पिया है तो अगली बार दूसरी जगह से दूध पिलाना चाहिए, इसके अलावा शिशु को दूध पिलाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की शिशु अच्छे से सांस ले सके और शिशु की नाक ना दबे।

डकार दिलाएं

शिशु को दूध पिलाने के बाद डकार दिलाना बहुत जरुरी होता है क्योंकि इससे शिशु का दूध आसानी से पच जाता है। और यदि आप दूध के बाद डकार नहीं दिलाते हैं तो शिशु उल्टी कर सकता है। शिशु को डकार दिलाने के लिए आप उसे अपने कंधे पर लगाकर उसकी पीठ थपथपाएं इससे शिशु आसानी से डकार ले लेगा।

मालिश

छोटे बच्चे की मालिश करना भी बहुत जरुरी होता है क्योंकि ऐसा मालिश करने से शिशु की हड्डियों को मजबूती मिलती है, शिशु आराम महसूस करता है, शिशु के अंगो का विकास बढ़ने लगता है, आदि। इसके लिए आप बेबी आयल, बादाम, नारियल आदि के तेल का इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन शिशु की मालिश करते समय एक बात का ध्यान रखें की शिशु की मालिश ज्यादा तेजी से न करें बल्कि शुरुआत में हल्के हाथों से शिशु की मालिश करें।

नहलाना

शिशु की मालिश करने के आधे घंटे बाद उसे नहलाना भी जरूर चाहिए। क्योंकि मालिश करने के बाद नहाने से से शिशु फ्रेश महसूस करता है और उसे अच्छी नींद लेने में मदद मिलती है। मौसम के अनुसार शिशु के लिए पानी का इस्तेमाल करना चाहिए, शिशु को बहुत अधिक ठन्डे या गरम पानी से नहीं नहलाना चाहिए। नहाने के लिए सभी जरुरी सामान को पहले अपने पास रखना चाहिए, घर के किसी सदस्य की मदद भी आप ले सकती है। उसके बाद अपने हाथ से शिशु पर हल्का हल्का पानी डालकर उसे नहलाना चाहिए, और शिशु को अच्छे से पकड़कर आपको रखना चाहिए। शिशु की आँख, कान, आदि पर पानी डालने से बचाना चाहिए।

नींद

एक महीने तक के बच्चे दिन में बीस से इक्कीस घंटे तक सोते हैं और सोना उनके लिए अच्छा भी होता है। इसीलिए शिशु के साथ खेलने के चक्कर में उसे उठाकर नहीं रखना चाहिए। बल्कि उसे भरपूर आराम देना चाहिए, साथ ही शिशु के लिए मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा शिशु के सोने की जगह बिल्कुल साफ़ होनी चाहिए और शिशु के लिए सोने की जगह पर इस्तेमाल किये जाने वाले कपड़ो की सफाई का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

जांच

एक महीने तक के शिशु के लिए जितनी जांच, जितने इंजेक्शन व् दवाई जरुरी होती है वो सभी उसे समय से दिलवानी चाहिए। क्योंकि शिशु के बेहतर विकास के साथ शिशु को रोगो से सुरक्षित रखने के लिए ऐसा करना बहुत जरुरी होता है।

डाइपर

आजकल डाइपर का चलन बहुत अधिक बढ़ गया है लेकिन शिशु को शुरुआत में डाइपर अधिक नहीं पहनना चाहिए हाँ यदि आपने कहीं बाहर जाना है तो अलग बात है। इसके अलावा घर में शिशु को डाइपर पहनाने से बचना चाहिए। साथ ही यदि आप डाइपर पहनाती है तो पांच से छह घंटे में शिशु का डाइपर बदल देना चाहिए।

बच्चे को उठाते समय रखे ध्यान

जन्म के बाद एक महीने का शिशु बहुत कमजोर होता है ऐसे में शिशु की गर्दन और सिर को सहारा देकर उसे उठाना चाहिए। ताकि शिशु की गर्दन को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे। साथ ही बच्चों को यदि आप उठाकर आप थोड़ी देर घुमाते हैं तो आपको ध्यान रखना चाहिए की शिशु को दबाकर न पकड़कर रखें।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान आपको शिशु के जन्म के बाद एक महीने तक तक रखना चाहिए। यदि आप इन टिप्स का ध्यान रखते तो इससे शिशु की बेहतर केयर में मदद मिलती है और शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

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