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शिशु को कब और कितना दूध पिलाना चाहिए

बच्चे को कब और कितना दूध पिलाना चाहिए
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शिशु को कब और कितना दूध पिलाना चाहिए, बच्चे को कब दूध पिलाना चाहिए, बच्चे को कितना दूध पिलाना चाहिए, बच्चे को दूध पिलाते समय इन बातों का ध्यान रखें, स्तनपान के फायदे, Feeding tips for baby

जन्म से लेकर छह महीने तक बच्चा केवल दूध पर ही निर्भर करता है इसके अलावा बच्चे को कुछ और खिलाने पिलाने की इजाजत नहीं होती है। साथ ही इस दौरान शिशु के लिए माँ का दूध ही सर्वोत्तम आहार बताया जाता है। लेकिन कई बार माँ का दूध अच्छे से न उतर पाने के कारण बच्चे को डिब्बाबंद दूध दिया जाता है। अब जन्म होने के बाद ज्यादातर महिलाएं इस बात को लेकर परेशान होती है की बच्चे को कब दूध देना चाहिए, कितना देना चाहिए। जिससे शिशु का बेहतर विकास ही सके, और उसका पेट भरा रहे।

जब बच्चे का जन्म होता है उस समय कई बार बच्चा अच्छे से ब्रेस्टफीड नहीं ले पाता जिसके कारण हो सकता है वो बार बार दूध की मांग करे और भूख का अंदाजा आप बच्चे के रोने या जब शिशु अपनी उँगलियों को चूसने लगता है इससे लगा सकती है। और जन्म के पहले हफ्ते शिशु दस से बारह बार दूध की मांग कर सकता है। यह हर बच्चे के बढ़ने की गति पर निर्भर करता है की वो कितना दूध पीता है। और ऐसा भी नहीं होता है की बच्चे को उतनी ही देर बार दुबारा भूख लग जाए, बच्चे की हर फीड का अंतराल अलग अलग हो सकता है। और बच्चे को दूध पिलाने का समय भी इस बात पर निर्भर करता है की बच्चा कितनी देर पीना चाहता है, उसके बाद वो खुद बोतल या स्तन को छोड़ देता है।

बच्चे को कब दूध पिलाएं

यदि आपका बच्चा जन्म से कमजोर होता है तो डॉक्टर्स के अनुसार बच्चे को हर दो घंटे में शिशु को ब्रेस्टफीड देना चाहिए। ताकि उसका अच्छे से विकास हो सकें, और बच्चे के बेहतर विकास के लिए उसे माँ का दूध ही देना चाहिए। और अन्य बच्चे जो जन्म से ठीक वजन के होते है ऐसा कहा जाता है की उन्हें अपनी भूख को खुद बताने दें, जी हाँ वो खुद नहीं कहेंगे, बल्कि आपको बच्चे के रोने से या यदि वो हर चीज को मुँह में लेने लगता है तो इससे अंदाजा लगाना पड़ता है की उसे भूख लगी है। और उसके बाद बच्चे को ब्रेस्टफीड देना चाहिए इससे बच्चे की हरकतों को देखकर आपको धीरे धीरे पता चल जाता है की आपका बच्चा कितने समय बाद दूध की मांग करता है।

बच्चे को कितना दूध पिलाएं

बच्चे को यदि आप स्तनपान करवाती है तो बच्चे को जब तक फीड देना चाहिए जब तक की बच्चा खुद ब्रेस्ट को न छोड़ दे। और बच्चे को जबरदस्ती स्तन नहीं छुड़वाना चाहिए, ऐसा करने से बच्चे का पेट नहीं भरता है, और वो बार दूध की मांग करता है। और यदि आप बोतल से पिलाती है और दूध के खत्म होने के बाद भी यदि बोतल को नहीं छोड़ता है तो इसका मतलब होता है की उसे और भूख लगी है। और यदि बच्चे का पेट भर जाता है तो वह खुद बोतल को छोड़ देता है।

स्तनपान के क्या फायदे होते है

  • इससे बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को तेजी से होने में मदद मिलती है।
  • प्रतिरोधक क्षमता में विकास होता है जिससे शिशु को रोगो से बचाने में मदद मिलती है।
  • शिशु के साथ माँ का गहरा बंधन बनता है।
  • महिला के ब्रेस्ट में सूजन व् दर्द की समस्या नहीं होती है साथ ही ब्रेस्ट कैंसर जैसी समस्या से बचाव करने में भी मदद मिलती है।
  • पीलिया व् अन्य रोगो के होने का खतरा कम होता है।

शिशु को दूध पिलाते समय इन बातों का ध्यान रखें

  • आरामदायक स्थान और जहां शोर न हो वहां आराम से बैठकर शिशु को स्तनपान करवाना चाहिए।
  • इस बात का ध्यान रखें की शिशु निप्पल को अच्छे से मुँह में लें, यदि शिशु ऐसा नहीं करता है तो वह अच्छे से फीड नहीं ले पाता है।
  • स्तनपान करवाते समय शिशु की नाक पर ज्यादा जोर न डालें।
  • यदि शिशु बोतल से दूध पीता है तो बोतल की साफ सफाई का ध्यान रखें, पानी में अच्छे से उबालकर बोतल को धोने के बाद ही शिशु को दूध पिलाएं।
  • बच्चे को दोनों ब्रेस्ट से दूध पालना चाहिए, यदि बच्चे को एक बार आपने एक ब्रेस्ट से पिलाया है तो दूसरी बार दूसरे ब्रेस्ट से बच्चे को दूध पिलाएं।

तो यह हैं कुछ बातें जो आपको शिशु के फीड के बारे में जानकारी देने में मदद करती है इसके अलावा आप चाहे तो इसके बारे में डॉक्टर से भी बात करें। और समय समय पर डॉक्टर से जांच करवाते रहे की शिशु का वजन अच्छे से बढ़ रहा है और कोई दिक्कत तो नहीं है। और यदि आपका दूध अचे से नहीं उतरता है तो आप बहुत से घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करके अपनी इस समस्या का समाधान करके शिशु का बेहतर विकास कर सकती है।