व्हाट्सएप की सफलता की कहानी, जाने किसने व्हाट्सएप को बनाया और कब

व्हाट्सएप की सफलता की कहानी, जाने किसने व्हाट्सएप को बनाया और कब

Whatsapp Success Story, व्हाट्सएप की सफलता की कहानी

इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं है, हम वो सब कर सकते हैं जो हम सोच सकते हैं और हम वह सब सोच सकते हैं, जो अभी तक किसी ने नही सोचा।

आज हम या हमारे जैसे करोडो लोग जब भी कोई नया मोबाइल खरीदते है, तो सबसे पहले उसमें रियल टाइम मैसेजिंग एप्स व्हाट्सएप इंस्टॉल करते है। बिना व्हाट्सएप के हमारा मोबाइल बिना आत्मा के शरीर के समान हो जाता है। इस दुनिया में शायद ही कोई ऐसे लोग होंगे, जिनके पास स्मार्टफोन तो हो लेकिन उसे स्मार्ट फोन में व्हाट्सएप मैसेजिंग एप्स ना हो।

अभी पूरी दुनिया में एक बिलियन से भी ज्यादा लोग व्हाट्सएप एप्स इस्तेमाल करते हैं, आज हम इसी के बारे में बात करेंगे कि कैसे दो लोगों से यह व्हाट्सएप एक बिलियन लोगों तक पहुंच गया।

ये कहानी आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी की अगर इरादे मजबूत हो तो मुश्किल कुछ भी नही है।

व्हाट्सएप की शुरुआत दो दोस्तों ने मिलकर की थी, एक है Jan Koum और दूसरा है Brain Acton, इन दोनों दोस्त पहली बार याहू के ऑफिस में मिले थे Jan Koum और Brain Acton ये दोनों दोस्त ने करीब 10 साल तक याहू में काम किया। इस दौरान वह बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे। और उसके बाद उन्होंने 2007 में इन दोनों ने याहू से नौकरी छोड़ दी। Yahoo से नौकरी छोड़ने के बाद इन दोनों दोस्तों ने खूब इंजॉय किया, बहुत सारी पार्टियां की घूमे फिरे कई देशो की यात्रा की।

इस सब से बाद एक दिन टेरिस पर बैठे हुए Jan Koum को अचानक एक आइडिया आया कि क्यों ना एक ऐसा ऐप्स बनाया जाए जिससे हम अपने दोस्तों को मैसेज कर सकें और वह भी बिना किसी पैसे के बिल्कुल मुफ्त में और रियल टाइम में। इसके बारे में सोचने के बाद Jan Koum  सबसे पहले अपने दोस्त Brain Acton के घर गगए और यह आइडिया  उस से शेयर किया यह सुनने के बाद Brain एक्शन का रिएक्शन था “दिस इस इंपॉसिबल” लेकिन Jhom Koun  के बहुत समझाने के बाद वह मान गए।

फिर शुरू होती है WhatsApp  बनने की कहानी। दोनों दोस्त कोडिंग में तो पहले से ही महारत हासिल की हुई थी,  फिर दोनों ने इस पर काम करना शुरू कर दिया और आखिरकार उन्होंने ऐसा एप्स बना ही लिया और उसका नाम रखा व्हाट्सएप।

Whatsapp Success Story

व्हाट्सएप बनकर तैयार तो हो गया था लेकिन इसमे बहुत सारी दिक्कतें थी। Jan Koum  के अनुसार इसमें सबसे बड़ी दिक्कत रजिस्ट्रेशन के समय आने वाले वेरिफिकेशन ओटीपी पासवर्ड की थी, क्योंकि ओटीपी पासवर्ड की जिम्मेदारी किसी दूसरी कंपनी को दी गई थी इसी वजह से जब भी कोई व्हाट्सएप पर रजिस्ट्रेशन करता तो उस रजिस्ट्रेशन के बदले नेटवर्क प्रोवाइडर को sms जाता, उस sms के चार्ज के तौर पर जो पैसा लगता वो पैसा इनके एकाउंट से पैसे कट जाता था। इसी चलते धीरे धीरे करके उनके बैंक अकाउंट में भी पैसे खत्म होने लग पड़े थे जिसके कारण व्हाट्सएप का वजूद खत्म होने की कगार पर आ गया था। ऐसी दिक्कतें आने के बाद Jan Koum  ने Brain Acton  से कहा क्यों न हम इस प्रोजेक्ट को यहीं पर बंद कर दें और कहीं पर कोई नौकरी कर ले क्योंकि हम हम शायद इस प्रोजेक्ट को आगे नहीं ले कर के जा सके क्योंकि अब हमारी आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है, और हमारे ऐप्स में जो दिक्कतें हैं वह भी ठीक नहीं हो पा रही है।

तब Brain Acton ने उसे समझाया कि अगर हम इस प्रोजेक्ट को यहां पर बंद कर देते हैं तो हमसे बड़ा बेवकूफ कोई नहीं होगा। Brain में एक आइडिया दिया कि क्यों न हम कोई जॉब कर लें और जॉब के साथ-साथ व्हाट्सएप पर भी काम करते रहें।

यह आइडिया दोनों दोस्तों को पसंद आया, फिर दोनों दोस्तो ने नॉकरी की तलाश शुरू कर दी,  दोनों लोग सबसे पहले फेसबुक के हेडक्वार्टर पर गए, लेकिन वहां से इन्हें निराशा मिली क्योंकि इन दोनों में से किसी को भी वहां पर नौकरी नहीं मिल पाई। फिर यह दोनों दोस्त ट्विटर के ऑफिस में गए लेकिन वहां से भी इन दोनों दोस्तों को निराशा ही मिली। अब यह दोनों दोस्त काफी निराश हो गए थे क्योंकि एक तो इन दोनों को कोई नौकरी नहीं मिल रही थी और दूसरी तरफ व्हाट्सएप की प्रॉब्लम भी ठीक नहीं हो रही थी।

अब इन दोनों दोस्तों को धीरे धीरे लगने लग गया था कि अब व्हाट्सएप का वजूद खतरे में आ गया है। क्योंकि अब हम इस प्रोजेक्ट पर काम नहीं कर पाएंगे।

लेकिन कहते हैं ना कि अगर एक आईडिया सही आपके दिमाग में आ जाए तो यह आपकी पूरी जिंदगी बदल सकता है। ऐसा ही हुआ इन दोनों दोस्तों के साथ।

एक दिन Brain Acton के दिमाग में एक आइडिया आया उन्होंने Jan Koum  से कहा, क्यों न हम अपने दोस्तों से मदद मांगे। इस बात पर दोनों दोस्त राजी हो गए,  फिर क्या था दोनों ने अपने अपने सारे दोस्तों को अपने घर बुलाया और इस व्हाट्सएप के प्रोजेक्ट के बारे में उन्हें बताया, और इस प्रोजेक्ट में पैसों की कमी से चल रहे दिक्कतों के बारे में भी बताया, घर पर आए हुए उनके सारे दोस्तों को उनका यह प्रोजेक्ट बहुत ही यूनिक और अच्छा लगा, फिर सभी दोस्तों ने मिलकर इन्हें 2 लाख पचास हज़ार डॉलर दिए। फिर Jan Koum  और Brain Acton  दोनों दोस्तों ने मिलकर व्हाट्सएप प्रोजेक्ट पर काम करना चालू कर दिया। और आखिरकार इन दोनों दोस्तों ने मिलकर अपने उस सपने को पूरा कर ही लिया।

अगर हम व्हाट्सएप की सफलता का की बात करें तो इस एप्लीकेशन ने 2010 से लेकर 2014 तक 60 करोड़ से भी ज्यादा यूज़र बना लिए, और एक न्यूज़ एजेंसी के अनुसार साल 2013 के बाद व्हाट्सएप पर हर रोज करीब 10 लाख नए यूजर रेजिस्ट्रेशन कर रहे है। और आज इस व्हाट्सएप पर करीब करीब 100 करोड़ से भी ज्यादा यूजर हो चुके हैं, सिर्फ भारत में ही व्हाट्सएप के 10 करोड़ यूजर हैं और यह संख्या बहुत तेजी से बढ़ भी रही है।

2014 के अगस्त के महीने में सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक ने व्हाट्सएप को 19 बिलियन यूएस डॉलर यानी एक लाख अठारह हज़ार दो सौ सेइतिष करोड़ रुपये मैं खरीद लिया। यह वही फेसबुक था जो इन दोनों को 2007 में नौकरी देने से भी इनकार कर दिया था, आज ये दोनों दोस्त दुनिया के सबसे अमीर आदमियों के लिस्ट में आते हैं, यह दोनों दोस्त वही हैं जो उन्होंने सोचा उसे कर दिखाया ऐसा नहीं है कि इन दोनों के सामने कोई परेशानी नहीं आए लेकिन उस परेशानी से कभी घबराएं नहीं, अगर एक घबराया भी तो दूसरा ने उसका हौसला बढ़ाया।

इसी लिए कहते हैं ना कि सपने जरूर देखनी चाहिए और उस सपने को पूरे करने की भी पूरे मन से कोशिश करनी चाहिए, तुम इस बात को हकीकत करके दिखाया इन दोनों दोस्तों ने। अगर आप सपने ही नहीं देखेंगे तो उस सपने को पूरा करने की कोशिश कैसे करेंगे।

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