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क्या प्रेगनेंसी में भी ब्लीडिंग होती है?

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प्रेगनेंसी के समय ब्लीडिंग का होना किसी भी महिला को डरा सकता है, और इसे देखकर महिला के दिमाग में एक ही बात आती है, की कहीं उसका गर्भपात तो नहीं हो गया है, जो की गलत होता है प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग का मतलब हमेशा गर्भपात ही नहीं होता है, बल्कि इसके कई और कारण हो सकते है, जैसे की महिला के शरीर में हॉर्मोन का असंतुलन होना, तनाव के कारण या गलत तरीके से शारीरिक सम्बन्ध बनाने पर, और सच्चाई ये भी है की प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में स्पॉटिंग होना आम बात होती है, और इस दौरान महिला को अधिक आराम की जरुरत होती है, ताकि उसके गर्भाशय पर अधिक दबाव न पड़े।

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जबकि डॉक्टर्स का भी यह कहना है की स्पॉटिंग के बाद भी महिलाये आराम और दवाइयों की मदद से स्वस्थ शिशुओं को जन्म देती है, इसके अलावा ब्लीडिंग होने के कारण गर्भ में पल रहे शिशु और गर्भवती महिला पर किसी भी तरह का कोई असर नहीं पड़ता है, लेकिन कई बार ब्लीडिंग का होना कई जटिलताओं को भी जन्म दे सकता है, जैसे की कई बार ये गर्भपात, एक्टोपिक गर्भावस्था, प्लेसेंटल एबरप्शन या प्लेसेंटा प्रीविया का भी कारण हो सकती है, इसीलिए इसे अनदेखा भी नहीं करना चाहिए, और इसे एक दम से अनदेखा भी नहीं करना चाहिए तो आइये अब जानते है की प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होने के क्या क्या कारण हो सकते है।

इंप्लांटेशन ब्लीडिंग:-

कई महिलाओ को प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में ब्लीडिंग होना आम बात होती है, क्योंकि फर्टिलाइज़्ड अंडे को फैलोपियन ट्यूब से होते हुए गर्भाशय पहुंचना होता है, और वो अंडा गर्भाशय की लाइनिंग पर इंप्लांट होता है, और जैसे ही वो गर्भशय की लाइनिंग से जुड़ जाता है, तो गर्भाशय में प्रेग्नेंट महिला की रख धमनियों पर थोड़ा प्रभाव पड़ता है, इसीलिए ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होने लगती है।

हॉर्मोन में बदलाव होने के कारण:-

प्रेगनेंसी के समय पर आपको मासिक धर्म नहीं होता है, ऐसे में मासिक धर्म को नियंत्रण करने वाले हॉर्मोन की वजह से आपको गर्भावस्था के शुरूआती समय में ब्लीडिंग हो सकती है।

योनि में संक्रमण होने के कारण:-

योनि या यौन संक्रमण ( जैसे क्लेमीडिया, गोनोरिया या हर्प्स ) के कारण भी गर्भावस्था की पहली तिमाही में आपको ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है, इसीलिए गर्भावस्था के दौरान होने वाले संक्रमणों के बारे में डॉक्टर से राय लें और उनका जल्दी इलाज करवाएं।

गर्भपात होने के कारण:-

प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में आपके द्वारा की गई लापरवाही कई बार एबॉर्शन का कारण बन सकती है, इसके अलावा कई बार गर्भ में भी शिशु का विकास सही से न होने के कारण भी आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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एक्टोपिक गर्भावस्था होने पर:-

एक्टोपिक गर्भावस्था में फर्टिलाइज़्ड भ्रूण गर्भाशय के बाहर ही इंप्लांट हो जाता है, आमतौर पर फैलोपियन ट्यूब में ही भ्रूण विकसित होने लगता है, जो की काफी परेशानी का विषय होता है, गर्भाशय की तुलना में यह काफी असामान्य होता है जो की साठ में से किसी एक महिला को ही होता है।

मोलर प्रेगनेंसी के कारण:-

ऐसा बहुत ही कम होता है की ब्लीडिंग के लिए मोलर प्रेगनेंसी जिम्मेदार हो, साथ ही मोलर प्रेगनेंसी को मोल भी कहा जाता है और इसमें भ्रूण की जगह एब्नॉर्मल टिशू विकसित हो जाता है, जो की प्रेगनेंसी ही नहीं होती है, और इसे जेस्टेशनल ट्रोफोब्लास्टिक डिजीज भी कहा जाता है।

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में ब्लीडिंग होने के कारण:-

प्लेसेंटल एबरप्शन के कारण:-

यह एक बहुत ही गंभीर स्थति होती है, जिसमें प्लेसेंटा गर्भाशय से अलग हो जाता है और उसके बाद प्लेसेंटा व गर्भाशय के बीच रक्त इकट्ठा हो जाता है, और यह केवल एक प्रतिशत महिलाओ में ही देखने को मिलती है, परन्तु यह महिला और शिशु दोनों के लिए ही हानिकारक होती है।

प्लेसेंटा प्रीविया के कारण:-

ऐसा तब होता है जब प्लेसेंटा गर्भाशय में थोड़ा नीचे रहता है और गर्भाशय के मुँह को अच्छे से ढक देता है,और इस दौरान ब्लीडिंग होते समय आपको दर्द का अनुभव भी नहीं होता है, ऐसे में और इसे अनदेखा न करते हुए आपको तुरंत ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

प्रीटर्म लेबर के कारण:-

ब्लीडिंग यदि दूसरी तिमाही में हो तो कई बार ये प्रीटर्म लेबर का भी संकेत हो सकता है, लेबर शुरू होने से कुछ हफ्ते पहले से म्यूकस प्लग निकलता है, यह आमौतर पर थोड़ा म्यूकस और खून से बना होता है, यदि आप ऐसा कुछ देखें तो समझिए आप प्रीटर्म लेबर में प्रवेश कर रहे हैंम, ऐसे में जल्द ही आपको अपने डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग होने पर रखें इन बातों का ध्यान:-

  • आपको पैड या पेंटी का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए ताकि आपको पता चल सकें की आपको कितनी ब्लीडिंग हो रही हैं, और आप पता लगा सकें की वो सामान्य है या नहीं।
  • इस दौरान शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए और न ही ऐसा कोई काम करना चाहिए जिससे आपके गर्भाशय पर दबाव पड़े।
  • यदि आप ऐसा लगता है की ब्लीडिंग होने पर आपको ज्यादा दर्द हो रहा है, या ब्लीडिंग में कुछ असामान्य दीख रहा है तो आपको डॉक्टर से भी राय लेनी चाहिए।
  • इस दौरान महिला को जितना हो सकें रेस्ट करना चाहिए।
  • पेट में मरोड़ उठना, पीठ में दर्द, अत्यधिक उलटी और स्पॉटिंग को बिलकुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • प्रेगनेंसी में आपको शारीरिक सम्बन्ध बनाते हुए भी ध्यान रखना चाहिए और जितना हो सकें इस बारे में डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।

तो प्रेगनेंसी में स्पॉटिंग को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि कई बार ये आपके लिए परेशानी भी कड़ी कर सकती है, साथ ही प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में आपको अपना अच्छे से ख्याल रखना चाहिए ताकि आपको किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो, और माँ और शिशु दोनों ही स्वस्थ रहें।

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