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गर्भावस्था की महत्वपूर्ण जानकारी व सावधानियां

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हर औरत के लिए इस दुनिया में सबसे बड़ा व अद्भुत सुख है माँ बनना। बच्चे का गर्भ में अनुभव होते ही माँ अपने बच्चे के लिए मीठे-मीठे सपने बुनने लगती है। गर्भावस्था का समय प्रत्येक स्त्री के लिए नए अनुभव का समय भी होता है। अपने इस नए अनुभव के लिए वह जितनी उत्साहित होती है वही चिंतित भी। क्योकि जब भी कोई स्त्री माँ बनती है तो वह उसका दूसरा जन्म होता। इस समय महिलाओ को बहुत से समस्याओ का सामना करना पड़ता है। लेकिन गर्भ में बच्चे की देखभाल व बहुत से बातो को लेकर चिंतित भी रहती है की वह किस प्रकार से बच्चे की देखभाल करे व उसको पूरा पोषण दे।

गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल परिवर्तन होने लगते है और शारीरिक संरचना में भी बदलाव आता है। गर्भवती महिला में होने वाला यह बदलाव गर्भ में बच्चे की विकास की ओर संकेत करता है।अतः गर्भावस्था की कुछ महत्वपूर्ण जानकारी द्वारा आप गर्भ में पल रहे शिशु का अच्छे से ख्यान रख सकेंगे और अपने खानपान व स्वास्थ्य का ध्यान रखेंगे।

गर्भावस्था के शुरुवाती लक्षण

  • माहवारी महीने का रुक जाना व गर्भ में भ्रूण का होना।
  • उलटी आना व जी घबराने की स्थिति होना।
  • हार्मोनल बदलाव के कारण किसी काम में मन न लगना।

गर्भ की स्थिति व गर्भावस्था का पहला महीना

गर्भ के अंदर निषेचित अंडा विकसित होना शुरू होता है ओर इसके चारो ओर पानी से भरी एक थैली उभरने लगती है। आहार नाल विकसित होने लगती है जिससे बच्चा पोषक तत्व लेना शुरू करता है।

निषेचित अंडा – धीरे- धीरे विकसित होने लगता है। चेहरा ,पैर ओर दो बड़े काले धब्बे होते है जो आगे चलकर आँखों का रूप लेते है। रक्त कोशिकाएं आकर लेने लगती है ताकि रक्त का संचरण हो सके। पहले महीने के आखिर दिनों तक बच्चे का आकर चावल के दाने की तरह होता है।

गर्भावस्था का दूसरा महीना

आपके गर्भ में एक जान पल रही है ऐसा महसूस कर आप उसके के लिए तैयारियां करती है। कई महिलाओ को गर्भावस्था में कुछ बदलाव महसूस नहीं होते जिससे गर्भावस्था की अनुभूति हो।गर्भावस्था की स्थिति में थकावट,चक्कर आना,उलटी ,पेशाब अधिक आना आदि हो सकते है। कुछ महिलाओ में चिड़चिड़ापन,कुछ भी खाने का मन न करना,रोना,खाने की किसी चीज व वस्तु से गंध का आना आदि भी शामिल होते है।

गर्भ के अंदर की गतिविधियां

भ्रूण अब एक बच्चे की तरह दिखाई देता है। सिर ओर धड़ इस महीने विकसित हो जाते है। हाथो की कलाइयां ओर पैर इस महीने के अंत तक विकसित होने लगते है। इस महीने तक गुप्त अंग का पता नहीं चलता। चेहरा धीरे-धीरे सिर पर विकसित होना शुरू होता है ,भीतरी कानो का विकास होना शुरू होता है, आँखे ओर पलके बंद रहती है।

गर्भावस्था का तीसरा महीना

गर्भावस्था का तीसरा महीना काफी संतोषजनक होता है क्योकि इस महीने में आप सुरक्षित महसूस करने लगते है ओर गर्भ में भ्रूण का विकास तेजी से होने लगता है। जिससे आपके शरीर में बदलाव की स्थिति शुरू होने लगती है।

गर्भ के अंदर की गतिविधियां

बच्चे की आँखे,पलके और कान विकसित होने लगते है। शारीरिक संरचना बनना शुरू होता है इसलिए बच्चे की हड्डियां व मासपेशिया बनना प्रारम्भ होता है। बच्चे की पूंछ दिखाई नहीं देती लेकिन इस स्तर पर अभी अनुमान लगाना मुश्किल होता है की यह लड़का हे की लड़की।

गर्भावस्था का चौथा महीना

गर्भावस्था के चौथे महीने गर्भवती स्त्री का पेट बाहर निकलने लगता है। आप सुखद अनुभूति महसूस करते है। इस महीने में बच्चे का हिलना-डुलना थोड़ा शुरू हो जाता है। गर्भवती स्त्री को थकान,गैस,कब्ज,नाक से खून बहना,मसूड़ों में दर्द व खून बहना,नाराजगी,हाथ-पैरो में सूजन,योनि से सफेद स्त्राव,खिचाव आदि के साथ साथ भूख में बढ़ोतरी होती है।

गर्भ के अंदर की गतिविधियां

इस समय तक बच्चा जल्दी से बढ़ने लगता है। बच्चे की गर्दन में धीर-धीरे विकास होता दिखाई देता है,ठोड़ी उबरना शुरू होती है। बच्चे में चेहरे के साथ साथ उंगलियों के निशान बना शुरू हो जाते है। बच्चे में सिर के शीर्ष पर आइब्रो ,बाल और हड्डियों का विकास शुरू होने लगता है। बच्चे में बाहर की उत्तेजनाओं पर प्रतिक्रिया करने की क्षमता शुरू होने लगती है।

गर्भावस्था का पांचवा महीना

आपके अंदर तेजी से शारीरिक बदलाव हो रहे होते है और आगे चलकर आपको काफी जटिलताओं को सहना होता है। इसलिए थोड़ा सा धीरज रखकर आप बाकि के महीनो में भी सफलतापूर्वक आगे बढ़ेगी। इस महीने बच्चा ज्यादा सक्रिय होता है आप बच्चे की गतिविधियों को अनुभव कर सकती है। इस महीने के अंत तक बच्चे में गतिविधियों और सोने की एक आदत विकसित हो जाती है। गर्भवती स्त्री को थकान,गैस,कब्ज,नाक से खून बहना,मसूड़ों में दर्द व खून बहना,नाराजगी,हाथ-पैरो में सूजन,योनि से सफेद स्त्राव,खिचाव आदि के साथ साथ भूख में बढ़ोतरी, साँस लेने में तकलीफ, पीठ दर्द,त्वचा में खिचाव आदि होती है।

गर्भ के अंदर बच्चे की गतिविधियां

बच्चे के वजन में दुगनी बढ़ोतरी हो जाती है। एमनियोटिक द्रव साँस छोड़ने के लिए फेफड़ो का विकास करता है। बच्चे में गर्मी उतपन्न करने में अब फैट मदद करता है। मूत्र प्रणाली भी काम करना शुरू करते है।सिर,आइब्रो और पलको पर बाल अच्छे से आ जाते है। बच्चा अब जमाही और चेहरे को भाव बना सकता है।

गर्भावस्था का छठा महीना

गर्भावस्था के छठे महीने में, शरीर में तेजी से वजन बढ़ना शुरू हो जाता है। यह बच्चे के तेजी से विकास के कारण होता है। यह शरीर द्वारा बड़े पैमाने पर पानी की प्रक्रिया के कारण होता है। हाथ और पैरो में सूजन आने लगती है इसलिए आराम से चलने की सलाह दी जाती है। गर्भाशय बड़ा और भरी हो जाता है ताकि बच्चे को आरामदायक पकड़ मिल सके। ऐसी अवस्था में नीचे की ओर भारीपन और तनाव महसूस होता है। कान में घुटन महसूस होती है,माशपेशियों में ऐठन और खिचाव निचले हिस्सों में महसूस होता है। बच्चे के विकास के कारण वह अपनी मुट्ठी,कोहनी,घुटनो और पैरो से गर्भाशय की दीवारों को धकेलने की कोशिश करता है जिस कारण दर्द का अनुभव होता है। स्तन बड़े और निप्पल के चारो और काले घेरे बन जाते है। जिस कारण गर्भवती स्त्री को दर्द होता है। लेकिन यह भी दूध बनने की प्रक्रिया है। शरीर के तापमान में वृद्धि होने लगती है।

गर्भ के अंदर की गतिविधियां

सिर से एड़ी तक ३५ सेंटीमीटर तक लम्बाई हो जाती है और वजन लगभग ६६० गर्म हो जाता है। इस महीने में बच्चे के मष्तिष्क के विकास की तीर्व प्रतिक्रिया होती है। अब तक भ्रूण की आंखे रोशनी के प्रतिक्रिया करने लगती है। बच्चे शोर, संगीत और अपनी आवाज सुन सकते है। स्वाद भी छठे महीने तक विकसित होने लगता है।

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गर्भावस्था का सातवां महीना

इस समय वजन बढ़ जाता है। प्रसव के लिए और आपके अंदर भ्रूणनाल बड़ा होने के लिए गर्भाशय में गतिविधियां होती रहेगी। रक्त की मात्रा अब सामान्य की तुलना में ५०% अधिक करने के लिए ३०% की वृद्धि होती है। यह कारण है की भ्रूण के विकास के लिए अधिक खून की आवश्यकता होती है। स्तनों से कोलोस्ट्रम एक तरल पदार्थ निकलना शुरू हो सकता है।

गर्भ के अंदर की स्थिति

बच्चा आपके डायाफ्रम, लिवर,पेट और आंतो पर बहुत दबाव डालता है। हर २० मिनट में गर्भाशय की माशपेशियों का कसना शुरू हो जाता है। सफेद योनि स्त्राव तेजी से भारी हो जाता है और स्तनों में कोलोस्ट्रम रिसाव शुरू हो सकता है।

गर्भावस्था का आठवा महीना

गर्भावस्था के आठवे महीने के दौरान देखभाल बहुत जरूरी है। क्योकि गर्भ के अंदर शारीरिक संरचना में बहुत सारे परिवर्तन हो रहे होते है। आपका वजन तेजी से बढ़ेगा। रक्तचाप बढ़ने के कारण पैरो में सूजन आ जाती है। इस महीने के अंत तक ज्यादातर बच्चो का सिर नीचे की स्थिति में होता है।

गर्भ के अंदर की गतिविधियां

इस महीने बच्चा और भी आधी ऊर्जावान हो जाता है। बच्चे की लम्बाई ५० सेंटीमीटर और वजन ६ पोंड हो जाता है। उसकी प्रतिक्रिया और हरकते अधिक होने लगती है। गर्भाशय में बड़े वजन की वजह से पेट के निचले हिस्से में जोर रहता है और बार-बार बाथरूम जाना पड़ता है। बच्चा गर्भाशय में छोटे लयबद्ध धक्को के कारण हिचकी ले सकता है।

गर्भावस्था का नौवा महीना

गर्भावस्था के इस महीने को पूर्ण अवधि माना जाता है। आपको किसी भी समय प्रसव पीड़ा हो सकती है। जिसमे डरने की कोई बात नहीं है क्योकि बच्चा पूरी तरह बाहर आने के लिए तैयार है इस महीने ब्रैक्सटन हिक्स संकुचन अधिक व लगातार हो सकता है। आप अधिक थके और कभी अधिक कार्यशील अनुभव करेंगे।

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गर्भावस्था के समय सावधानियाँ

  • भारी सामान न उठाये।
  • बहुत देर तक खड़े न रहे।
  • सीढ़ियों का प्रयोग कम से कम करे।
  • हील वाली सैंडल व जूते न पहने।
  • जंक फ़ूड, तला हुआ भोजन अधिक न करे।
  • कॉफ़ी,चाय,ग्रीन टी और सोडा आदि के सेवन से बचे।
  • ट्रेवेल्लिंग कम करे।
  • पेट व पीठ के बल न सोये।
  • तनावग्रस्त न रहे।
  • डॉक्टर से पूछे बिना दवाइयों का सेवन न केरे।
  • ज्यादा तंग कपड़े न पहने और मोबाइल का प्रयोग ज्यादा न करे।
  • स्मोकिंग,पैसिव स्मोकिंग व शराब आदि न ले।
  • बिना डॉक्टर की सलाह से कोई व्यायाम न करे।
  • समय-समय पर डॉक्टर से अपने गर्भ की जाँच करवाते रहे।

किसी भी समस्या के लिए कमेंट करे, उचित सलाह दी जाएगी.