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प्रेगनेंसी में अल्ट्रासॉउन्ड कब और कितनी बार होना चाहिए

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प्रेगनेंसी में अल्ट्रासॉउन्ड

गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी के दौरान अल्ट्रासॉउन्ड करवाना बहुत ही जरुरी होता है, क्योंकि अल्ट्रासॉउन्ड के माध्यम से गर्भ में पल रहे शिशु की जानकारी मिलती है। जैसे की शिशु के अंगो का विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं, शिशु को कोई समस्या तो नहीं है, शिशु के हदय से सम्बंधित जानकारी, आदि। लेकिन प्रेग्नेंट महिला के मन में अल्ट्रासॉउन्ड को लेकर तरह तरह के सवाल होते है, जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान कितनी बार अल्ट्रासॉउन्ड करवाना चाहिए, कब अल्ट्रासॉउन्ड करवाना चाहिए, और क्या अल्ट्रासॉउन्ड करवाने से शिशु को किसी तरह का नुकसान तो नहीं पहुँचता है, आदि। तो लीजिये आज हम प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के मन में अल्ट्रासॉउन्ड के लिए उठने वाले इन कुछ सवालों का जवाब देने की कोशिश करने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में अल्ट्रासॉउन्ड कब करवाते हैं

हर गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अल्ट्रासॉउन्ड करवाने की सलाह दी जाती है, ज्यादातर प्रेग्नेंट महिलाओं को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही के दौरान, प्रेगनेंसी के 18वें हफ्ते के आस पास, और नौवें महीने की शुरुआत में अल्ट्रासॉउन्ड के लिए बोला जा सकता है। पहली तिमाही का अल्ट्रासॉउन्ड जहां शिशु के दिल की धड़कन को जानने के लिए किया जाता है और डिलीवरी की तारीख का अंदाजा लगाने के लिए किया है। वहीँ दूसरी तिमाही में होने वाले अल्ट्रासॉउन्ड के माध्यम से गर्भ में पल रहे शिशु के अंगो का विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं यह जानने के लिए किया जाता है।

क्योंकि यदि कोई समस्या होती है और उसका पता चल जाता है तो इससे शिशु को गर्भ से ही सुरक्षा प्रदान की जाती है ताकि शिशु को जन्म के समय किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। आखिरी महीने में होने वाले अल्ट्रासॉउन्ड से डिलीवरी का अंदाजा लगाने में और शिशु का शारीरिक विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं यह जानने के लिए किया जाता है। और यदि इस अल्ट्रासॉउन्ड के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के साथ किसी तरह की समस्या देखी जाती है तो कुछ गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी के लिए भी बोल सकते हैं।

प्रेगनेंसी में कितने अल्ट्रासॉउन्ड करवाने चाहिए

हर महिला के केस में अल्ट्रासॉउन्ड की गिनती अलग अलग हो सकती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की समस्या न होने पर महिला को दो से तीन अल्ट्रासॉउन्ड करवाने की सलाह दी जाती है। वहीँ यदि गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स है, महिला की अधिक उम्र होने के कारण प्रेगनेंसी में दिक्कतें अधिक है, या अन्य कोई और समस्या है तो डॉक्टर ज्यादा अल्ट्रासॉउन्ड करवाने के लिए भी बोल सकते हैं। ऐसे में हर महिला को इतने अल्ट्रासॉउन्ड ही करवाने चाहिए यह बताना मुश्किल होता है, लेकिन गर्भवती महिला पाने डॉक्टर से इस बारे में अच्छे से जान सकती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान कब और कितने अल्ट्रासॉउन्ड करवाने चाहिए ये एक डॉक्टर से बेहतर कोई नहीं जान सकता है।

गर्भावस्था में अल्ट्रासॉउन्ड से गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान तो नहीं होता

जी नहीं, अल्ट्रासॉउन्ड एक सेफ प्रक्रिया है जिसे करवाने से गर्भ में पल रहे शिशु को कोई भी नुकसान नहीं होता है। क्योंकि अल्ट्रासॉउन्ड करने के दौरान पेट पर एक रेडियोएक्टिव जैल लगाया जाता है, फिर उसके ऊपर मैग्नेटिक मशीन से उसे छूते हैं। जिसमे से कुछ किरणे निकलती है जो शरीर के अंदर पहुंचकर गर्भ में होने वाले शिशु का चित्र स्क्रीन पर दिखाने में मदद करती है। इन किरणों के कारण गर्भ के तापमान में परिवर्तन नहीं आता है, और यदि थोड़ा प्रभाव होता है तो वो एमनियोटिक फ्लूड की मदद से गर्भ में चारों और फ़ैल जाता है जिससे शिशु को किसी तरह की परेशानी नहीं होती है।

साथ ही अल्ट्रासॉउन्ड के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मशीन को जैल के ऊपर डॉक्टर घुमाते रहते हैं, जिससे अल्ट्रासॉउन्ड के दौरान किसी भी तरह की परेशानी न होती है। बल्कि x ray करवाने के कारण गर्भ पर बुरा असर पड़ता है, इसीलिए प्रेगनेंसी में x ray नहीं बल्कि अल्ट्रासॉउन्ड करवाने की सलाह दी जाती है। और आज कल को अल्ट्रासॉउन्ड से गर्भ में पल रहे शिशु को 3D में देखा जा सकता है, जिससे शिशु के अंगो को विकास को बेहतर तरीके से देखने और समझने में मदद मिलती है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान अल्ट्रासॉउन्ड करवाने से जुड़े कुछ खास टिप्स, जिनसे आपको अल्ट्रासॉउन्ड को समझने में आसानी होगी। और अल्ट्रासॉउन्ड करवाने जाने पर किसी तरह की चिंता करने की जरुरत नहीं होती है, इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के लिए हर प्रयास करना चाहिए। ताकि गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास और प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सके।